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फ्रांस में सड़कों पर उतरे किसान, ट्रैक्टर से किया संसद तक मार्च, जानिए क्यों कर रहे विरोध प्रदर्शन

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Jan 13, 2026 09:16 pm IST,  Updated : Jan 13, 2026 09:16 pm IST

फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों में किसानों का आक्रोश कई चुनौतियों के चलते बढ़ गया है। मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे किसान संघों ने कहा कि वे फ्रांस की खाद्य सुरक्षा की रक्षा के लिए ठोस और तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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फ्रांस में ट्रैक्टर लेकर सड़कों पर उतरे किसान Image Source : AP

पेरिस: फ्रांस की सड़कों पर भी भारत में हुए किसान आंदोलन जैसा नजारा देखने को मिला। यहां भी किसान सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर ट्रैक्टर लेकर उतर पड़े। किसानों ने अपनी कम आय और दक्षिण अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ (ईयू) के व्यापार समझौते के विरोध में मंगलवार को 350 ट्रैक्टर के साथ संसद तक मार्च किया। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौते से उनकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। 

फ्रांस की खाद्य सुरक्षा के लिए ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे किसान

किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ पीक ऑवर में चैंप्स-एलिसी और पेरिस की अन्य सड़कों से गुजरते हुए ट्रैफिक को अवरुद्ध कर दिया। इसके बाद किसान सीन नदी को पार करके नेशनल असेंबली तक पहुंचे। फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों में किसानों का आक्रोश कई चुनौतियों के चलते बढ़ गया है। मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे किसान संघों ने कहा कि वे फ्रांस की खाद्य सुरक्षा की रक्षा के लिए ठोस और तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

लगातार घटती आय से परेशान हैं किसान

फ्रांस के किसानों ने कहा कि ईंधन, उर्वरक और पशुओं के चारे की बढ़ती लागत के साथ-साथ पर्यावरण संबंधी कड़े नियमों और पावरफुल खुदरा विक्रेताओं और खाद्य कंपनियों द्वारा मूल्य को लेकर दबाव बनाये जाने के चलते उनकी आय घट रही है। यूरोपीय संघ के अन्य देशों के किसानों की तरह ही फ्रांसीसी किसान भी लंबे समय से ब्राजील, अर्जेंटीना, बोलीविया, पैराग्वे और उरुग्वे जैसे मर्कोसुर देशों के साथ यूरोपीय संघ के प्रस्तावित व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इस समझौते से दक्षिण अमेरिकी बीफ, पॉल्ट्री, चीनी और अन्य कृषि उत्पादों का सस्ता आयात बाजार में भर जाएगा, जो अलग-अलग मानकों के तहत उत्पादित होते हैं। 

सरकार किसानों की मदद के लिए जल्द नई घोषणाएं करेगी

इससे यूरोपीय उत्पादकों को नुकसान होगा तथा कीमतें और भी गिरेंगी। फ्रांस सरकार की प्रवक्ता मौड ब्रेगॉन ने मंगलवार को टीएफ1 टेलीविजन पर कहा कि सरकार किसानों की मदद के लिए जल्द ही नयी घोषणाएं करेगी। राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और उनकी सरकार यूरोपीय संघ-मर्कोसुर व्यापार समझौते के विरोध में हैं, लेकिन उम्मीद है कि शनिवार को पैराग्वे में इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे, क्योंकि इसे ज्यादातर अन्य ईयू देशों का समर्थन प्राप्त है। इस समझौते पर 1999 से वार्ता हो रही है।

मर्कोसुर दक्षिण अमेरिकी देशों का क्षेत्रीय व्यापार संगठन है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा शनिवार को पैराग्वे में समझौते पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है, क्योंकि पिछले सप्ताह यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने बहुमत के साथ इसका समर्थन किया था। इसके बाद यह यूरोपीय संसद में जाएगा, जहां अगले सप्ताह महीनों तक चलने वाली अनुमोदन प्रक्रिया शुरू होगी। यूरोपीय संसद के 720 सदस्यों में से कई इस समझौते का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन अंतिम मतदान में कांटे का मुकाबला हो सकता है और संसद अंततः इस समझौते को अस्वीकार भी कर सकती है।

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