Bihar News: बिहार के कैमूर जिले में पति के झगड़े से नाराज एक महिला ने अपने तीन बच्चों को कुएं में फेंक दिया और फिर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान भगवानपुर थाना क्षेत्र के पटेरिया गांव की रहने वाली रिंकी देवी के रूप में हुई है, जिसकी रविवार रात अपने पति से तीखी नोकझोंक हुई थी। पुलिस ने कहा कि उनके घर से लापता होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें सूचित किया। उन्होंने कुएं में देखा तो वहां महिला की चप्पलें तैर रही थीं।
भगवानपुर थाने के एक अधिकारी ने कहा, "हम तुरंत मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कुएं के अंदर महिला और दो बेटों समेत तीन बच्चों के शव मिले। हमने उन्हें बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।"उन्होंने कहा, "हमने मृतक के पति को गिरफ्तार कर लिया है और सही कारण जानने के लिए पूछताछ की जा रही है।"
देश में आत्महत्या के कई मामले सामने आते रहे हैं। हाल में ही राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, 2021 में 23,178 गृहणियों ने सुसाइड की थी। यह संख्या खुदकुशी करने वाले कुल संख्या का 14.1% है। इसमें सबसे ज्यादा हैरान करने वाली यह बात है कि आत्महत्या करने वाले आंकड़ों में सबसे अधिक गृहणियों का है। एनसीआरबी के अनुसार, हर रोज लगभग 63 महिलाओं ने आत्महत्या किया, इसके अलावा हर 30 मिनट में एक गृहणी ने खुदकुशी की है।
वहीं 2020 में आंकड़े 2021 की अपेक्षा में कहीं अधिक आए। एनसीआरबी के मुताबिक, 2020 में 1,53,052 आत्महत्या के केस सामने आए थे। इस रिपोर्ट में बताया गया कि ज्यादातर आत्महत्याओं का कारण परिवारिक समस्या, शादी से जुड़े मसले और अकेलापन था। हालांकि सबसे बड़ी बात यह है कि घर में काम करने वाली महिलाएं आत्महत्या करने पर क्यों मजबूर हो रही हैं। क्या वो डिप्रेशन का शिकार हो रही है या घरेलू कलह के वजह से तंग है। रिपोर्ट में देखा गया कि खुदकुशी करने वालों में से 66.9 परसेंट यानी 1,64,033 में से 1,09,749 विवाहित थी। इसके अलावा 24% अविवाहित शामिल थे। वही बात करें विधवा या विधुर, तलाकशुदा, जीवनसाथी से अलग रहने वाले कुल आत्महत्याओं की संख्या की तो क्रमश 2,485,788 और 871 कुल मामले सामने आए हैं।
इस संबंध में हमने एक डॉक्टर से बात की उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि ज्यादातर महिलाएं घरेलू हिंसा से परेशान होकर सुसाइड जैसा कदम उठाती है। इसके अलावा शहर में रहने वाली महिलाएं अकेली रहने के कारण डिप्रेशन का शिकार हो जाती है, जिसके कारण वह अकेलापन महसूस होने से इस तरह के कदम उठाते हैं। डॉक्टर ने बताया कि कम उम्र में शादी हो जाना भी एक गंभीर समस्या है। अगर किसी लड़की की शादी कम उम्र में हो जाती है तो उन्हें समझ में नहीं आता है कि अपने जीवन में क्या फैसला ले। डॉक्टर ने आगे बताया कि हमें इस पर खुलकर चर्चा करने की जरूरत है ताकि कई व्यक्ति ऐसा कोई कदम उठाने की सोच रहा है तो उसे हम रोक सकें।
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