बिहार चुनाव को लेकर आयोजित चुनाव मंच में राजीव प्रताप रूडी से राजपूत समाज को लेकर राजनीति पर सवाल किया गया। इस पर रूडी ने कहा कि मेरा अभियान इस चुनाव ये मुझसे नहीं जुड़ा हुआ है। ये आने वाली पीढ़ियों के लिए है। मेरी राजनीतिक यात्रा का 40 साल से ज्यादा की है। मैं 26 साल की उम्र में विधायक बना और कई बार सांसद बना। बिहार या देश में मेरे समकक्ष कुछ ही लोग होंगे। मुझे इस बात की खुशी है कि मैं भाजपा में हूं। लेकिन अब विश्लेषण की जरूरत है। ये सिर्फ भाजपा नहीं बल्कि सभी पार्टियों के लिए हैं।
राजीव प्रताप रूडी ने कहा- "पटना एयरपोर्ट से निकलने के बाद चिराग और उनके पिता रामविलास एक समाज के पोस्टर बॉय हैं। फिर उपेंद्र कुशवाहा, जीतनराम मांझी, तेजस्वी-लालू यादव, सभी के पोस्टर लगे हुए हैं। बिहार में हर जाति के एक नेता का पोस्टर लगा हुआ है। मैं भाजपा का कार्यकर्ता, महासचिव रहा हूं। लेकिन बिहार के संदर्भ में मेरी पहचान मेरी जाति नहीं बल्कि भाजपा से है। लेकिन जब मैंने कहा कि मैं भाजपा में एक राजपूत हूं तब मेरी पहचान और बढ़ गई। तब मैंने कहा कि इसे ही आगे बढ़ाते हैं।"
राजीव प्रताप रूडी ने कहा- "मुझे अपने लिए पोस्टर बॉय नहीं बनना है। मैं सभी अगड़े समाज की आवाज के रूप में आगे आना चाहता हूं। अगर गिनती से ही राजनीतिक महत्व है तो हम गिनती कराएंगे। तब तक का इंतजार करेंगे जबतक बिहार में गिनती का आधार न खत्म हो जाए। तब तक इसे लेकर चलेंगे। जिससे पार्टी और समाज दोनों को लाभ होगा। पार्टी ने इस पर मुझे कुछ नहीं कहा। जब मैं बिहार में घूम रहा था और विकास की बात कर रहा था तब कोई नहीं सुन रहा था।"
राजीव प्रताप रूडी ने कहा- "मैं कोई हक और अधिकार की बात नहीं कर रहा बल्कि अगड़ों को बता रहा हूं कि वो कौन हैं उनका महत्व क्या है। आज भी बिहार में गांव में गरीबों की पीठ पर खड़ा होने वाला, त्याग करने वाला समाज राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार है। हालांकि, उनकी पहचान विलीन हो रही है। उसे वापस लाया जा सके वही मेरी कोशिश है। मुझे राजपूत होने का गर्व है। अंग्रेजी बोलने वाला लड़का 40 साल से राजनीति में हो, लालू जी से 40 साल से लड़ रहा हो और खड़ा हो ये साधारण बात नहीं है। मैं बीते 25 साल से गांव में ही रहा हूं।"
राजीव प्रताप रूडी ने कहा- "भाजपा बिहार में स्टेबिलाइज हो गई है। जातिय राजनीति में थोड़ा संघर्ष है। पहले भी नीतीश कुमार के ही नेतृत्व में चुनाव हुआ था और इस बार भी होगा। लालू यादव या नीतीश कुमार में से लोगों का ऑप्शन नीतीश कुमार ही है। गरीब हो गया अमीर उनकी नीतीश जी के लिए काफी आस्था है। नीतीश कुमार सीएम थे, सीएम हैं और सीएम रहेंगे।"
रूडी ने चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि "जबकि जनसुराज दौड़ में भागीदार बने हुए हैं, मतदाताओं की गंभीर चिंताओं का मतलब है कि उनके केवल "सांत्वना पुरस्कार" या "भागीदारी का प्रमाण पत्र" जीतने की संभावना है।" रूडी ने प्रशांत किशोर के के दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए कहा कि "बिहार में 14 करोड़ भविष्य दांव पर हैं। प्रशांत किशोर खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। राजनीति की यह छद्म शैली काम नहीं करेगी।" किशोर को स्मार्ट और बुद्धिमान कहने के बावजूद, रूडी ने इस बात पर जोर दिया कि सीधे राजनीतिक मुकाबले में न होने से मतदाताओं की नज़र में उनका कद कम हो जाता है।
रूडी ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा- "लालू प्रसाद यादव ने हमेशा सहज भाव से राजनीति की, लेकिन तेजस्वी के नेतृत्व वाली अगली पीढ़ी को वह कौशल विरासत में नहीं मिला है। तेजस्वी जहां भी चुनाव लड़ेंगे उन्हें 30 फीसदी वोट मिलेंगे, लेकिन यह सफलता की कोई गारंटी नहीं है।" उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रभाव को ठीक-ठीक बताया और स्वीकार किया कि वंशवादी राजनीति- परिवारवाद- भारतीय राजनीति में एक अपरिहार्य वास्तविकता बन गई है।
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