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NEET PG Admission: सुप्रीम कोर्ट ने पीजी डेंटल के 7 छात्रों का एडमिशन किया रद्द, पिछले दरवाजे से प्रवेश को माना अवैध

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Oct 25, 2022 11:09 pm IST,  Updated : Oct 25, 2022 11:09 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि प्रवेश की अंतिम तारीख पर भी सीटें खाली रहती हैं, तो कॉलेजों द्वारा एकतरफा प्रवेश देने का कोई आधार नहीं है और वह भी चिकित्सा शिक्षा निदेशालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ को खाली सीटों की सूचना दिए बिना।

सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दरवाजे से प्रवेश को अवैध ठहराते हुए 2018 में डेंटल साइंस में पीजी के पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले सात छात्रों के प्रवेश को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों और छात्रों के इस अनुरोध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि उनका परिणाम जारी करने की अनुमति दी जाए, क्योंकि उन्होंने पढ़ाई पूरी कर ली है। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एम.एम. सुंदरेश ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अवैध रूप से प्रवेश दिया गया था। इसके बाद उन्हें पढ़ाई की अनुमति देना अवैधता को कायम रखना होगा। यह कहते हुए पीठ ने छत्तीसगढ़ के डेंटल कॉलेजों में 2018 में डेंटल साइंस में पीजी पाठ्यक्रम में सात छात्रों के प्रवेश को रद्द कर दिया।

छात्रों का संस्थान में प्रवेश अवैध था

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि प्रवेश की अंतिम तारीख पर भी सीटें खाली रहती हैं, तो कॉलेजों द्वारा एकतरफा प्रवेश देने का कोई आधार नहीं है और वह भी चिकित्सा शिक्षा निदेशालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ को खाली सीटों की सूचना दिए बिना। पीठ ने कहा कि ऐसा कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं है कि किसी अन्य छात्र को खाली सीटों पर प्रवेश के लिए संबंधित संस्थानों / कॉलेजों में प्रवेश के लिए आवेदन करने का कोई अवसर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं को कैसे पता चला कि 31 मई, 2018 को शाम 4:30 बजे, संस्थानों या फिर कॉलेजों में सीटें खाली रह गई हैं। छात्रों का संस्थान में प्रवेश अवैध था। उन्हें पिछले दरवाजे से प्रवेश दिया गया।

हाई कोर्ट के आदेश को बताया गलत

पीठ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा छात्रों का प्रवेश रद्द करने के बावजूद याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश के अनुसार अपनी पढ़ाई जारी रखी। लेकिन हाई कोर्ट को प्रवेश देने या प्रवेश / पाठ्यक्रम जारी रखने का निर्देश देने वाला ऐसा अंतरिम आदेश नहीं देना चाहिए था। हाई कोर्ट का आदेश कानूनी रूप से ठीक नहीं है। शीर्ष अदालत ने मामले में भारतीय दंत चिकित्सा परिषद (dental council of india) की अपील को स्वीकार करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया।

डेंटिस्ट शैलेंद्र शर्मा व छह अन्य को एमओपी राउंड में भी पीजी की सीटें आवंटित नहीं की गईं, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद उन्हें पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया गया। संबंधित अधिकारियों ने इसे रद्द कर दिया तो हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। मामले में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने शीर्ष अदालत का रुख किया।

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