गजल सम्राट जगजीत सिंह की आज 83वीं जयंती हैं। जगजीत सिंह ने अपने करियर में एक से एक गाने गाए और लोगों का दिल जीत लिया। अपनी आवाजा का जादू जगजीत सिंह ने इस कदर चलाया कि उनके निधन के इतने सालों बाद भी उनकी आवाज लोगों का दिल जीत रही है। जगजीत सिंह ने कई भाषाओं में गाने गाए। जगजीत सिंह का संगीत के प्रति रूझाव बचपन से ही था। उन्होंने उस्ताद जमाल खान और पंडित छगनलाल शर्मा से संगीत की शिक्षा हासिल की थी। उनका गाना 'चिट्ठी न कोई संदेश' काफी पॉपुलर रहा। गाना काफी दर्द भरा है और इसमें जगजीत सिंह की जिंदगी का असल दर्द पिरोया गया है।
जगजीत सिंह ने फिल्म 'दुश्मन' के लिए एक खास गाना गाया था, जिसे लोग आज भी सुनना पसंद करते हैं। इस गाने के बोल थे 'चिट्ठी न कोई संदेश'। इस दर्द भरे गाने में जगजीत की आवाज ने और दर्द भर दिया था। वैसे कहा जाता है कि इस गाने में जगजीत की लाइफ का दर्द झलकता है, जिससे उबरने में उन्हें बहुत वक्त लगा। जगजीत ने ये गाना बेहद अजीज शख्स के लिए गाया था।
जगजीत सिंह और उनकी पत्नी गायिका चित्रा का एक बेटा था, जिसका नाम विवेक सिंह था। एक सड़क हादसे में विवेक की साल 1990 में मौत हो गई। इस हादसे ने जगजीत सिंह और चित्रा को तोड़कर रख दिया। इस घटना के बाद उन्होंने अपने पेशे और गानों से भी दूरी बना ली थी। लाख दुखों के बाद भी उन्होंने वापसी की। हर गम से उबरने के लिए उन्होंने दोबारा नई शुरुआत की। उन्होंने वापसी के साथ ही 'चिट्ठी न कोई संदेश' गाया, जिसमें उनका गम साफ नजर आया। उन्होंने अपनी जिंदगी का पूरा दर्द इस गाने बयां कर दिया। सिंगर ने ये गाना अपने बेटे की याद में गाया है। ये गाना काफी हिट रहा और इसे आज भी लोग सुनना पसंद करते हैं।
गजल सम्राट जगजीत सिंह की गजल 'होठों से छू लो तुम', 'कागज की कश्ती' और 'मेरी जिंदगी किसी और की मेरे नाम का कोई और है' सदाबहार हैं। 150 से ज्यादा एलबम में अपनी जादुई आवाज का जादू बिखेरने वाले जगजीत सिंह भले ही अब दुनिया में नहीं हैं मगर उनकी आवाज आज भी अमर है।
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