Mahashivratri Rudrabhishek: महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक कहां करना चाहिए, घर में या मंदिर में?
Mahashivratri Rudrabhishek: महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक कहां करना चाहिए, घर में या मंदिर में?
Mahashivratri Rudrabhishek: महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि इस दिन रुद्राभिषेक कहां करना शुभ माना जाता है।
Published : Feb 15, 2026 07:00 am IST, Updated : Feb 15, 2026 07:00 am IST
1/5Image Source : Freepik
महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजन के दौरान रुद्राभिषेक का भी बड़ा महत्व है। रुद्राभिषेक मुख्य रूप से दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस, गंगाजल, भांग, धतूरा आदि से किया जाता है। महाशिवरात्रि के पावन दिन पर रुद्राभिषेक करने से शिव जी की कृपा तो प्राप्त होती ही है साथ ही कुंडली में ग्रहों का बुरा प्रभाव भी दूर होने लगता है। ऐसे में सवाल उठता है कि महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक यानि शिवलिंग का अभिषेक कहां करना सही होता है घर में या मंदिर में, आइए जानते हैं।
2/5Image Source : Freepik
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के पावन दिन पर किसी ज्योतिर्लिंग या फिर किसी प्राचीन शिव मंदिर में रुद्राभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान शिव की असीम अनुकंपा आपको प्राप्त होती है और आपके जीवन में आ रही समस्याओं का समाधान आपको प्राप्त होता है।
3/5Image Source : Freepik
इसके अलावा किसी स्थानीय शिव मंदिर में जाकर भी आप शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं। अभिषेक करते हुए शिव मंत्रों का जप करना और भोलेनाथ की आरती का पाठ करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती है।
4/5Image Source : Freepik
आपके घर के आसपास मंदिर नहीं है तो घर पर भी आप रुद्राभिषेक कर सकते हैं। घर पर आपको पारद शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही रुद्राभिषेक करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। आप किसी पंडित या पुरोहित की देखरेख में भी घर पर रुद्राभिषेक कर सकते हैं।
5/5Image Source : Freepik
रुद्राभिषेक करते समय आपको गंगाजल, दूध, दही, गन्ने का रस, शहद, भांग, धतूरा, घी, बेलपत्र आदि का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही ॐ नमः शिवाय 'ॐ नमः शिवाय' के साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जप भी आप कर सकते हैं। आपको बता दें कि महाशिवरात्रि के दिन किसी भी समय आप रुद्राभिषेक कर सकते हैं क्योंकि इस दिन रुद्राभिषेक करते वक्त शिववास देखने की आवश्यकता नहीं होती।