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11 सितंबर 2001 को अल-कायदा आतंकियों ने अमेरिका पर बड़ा हमला किया था। उन्होंने 4 विमानों को हाईजैक किया था जिनमें 2 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराए थे, एक पेंटागन से जा भिड़ा था और एक खेत में गिरा थ। इस हमले में लगभग 3000 लोग मारे गए थे। यह हमला इतिहास का सबसे भयावह आतंकी हमला माना जाता है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। आज हम आपको इस हमले के 10 अनसुनी या कम सुनी बातों के बारे में बता रहे हैं:
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1: 11 सितंबर 2001 को हुआ आतंकी हमला अमेरिका की धरती पर हुआ सबसे बड़ा विदेशी हमला था। इस आतंकी हमले में 3000 से ज्यादा लोग मारे गए जिनमें करीब 400 पुलिस वाले और फायर फाइटर शामिल हैं।
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2: साउथ टॉवर से प्लेन नॉर्थ टॉवर के बाद टकराया था, लेकिन वह पहले ही ढह गया। साउथ टॉवर हमले के करीब 56 मिनट बाद गिरा, जबकि नॉर्थ टावर 102 मिनट बाद ढहा। तस्वीर में बिल्डिंग्स के गिरने के बाद धुएं का गुबार नजर आ रहा है।
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3: घटना के बाद जगह-जगह जहरीली धूल के कारण कई लोगों और सुरक्षाकर्मियों को सांस संबंधी बीमारियां हुईं। घटना के बाद कई लोग मानसिक बीमारियों से भी ग्रस्त हुए।
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4: यूनाइटेड फ्लाइट 93 के यात्रियों को फोन के जरिए हमलों की खबर मिली थी जिसके उन्होंने हिम्मत दिखाई और हाइजैकर्स से मुकाबला किया। यात्रियों द्वारा किए गए प्रतिरोध की वजह से प्लेन पेनसिल्वेनिया के एक खाली मैदान में क्रैश हो गया। माना जाता है कि फ्लाइट 93 का निशाना व्हाइट हाउस या यू.एस. कैपिटल था। तस्वीर में क्रैश साइट पर बने मेमोरियल पर मौजूद लोग नजर आ रहे हैं।
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5: कई आतंकियों ने हमले से महीनों पहले अमेरिकी फ्लाइट स्कूलों में विमान उड़ाने की ट्रेनिंग ली थी। ये आतंकी अमेरिका में कानूनी तरीके से छात्र या टूरिस्ट वीजा पर आए थे।
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6: माना जाता है कि लगभग 200 लोग टावरों से गिरने या कूदने से मारे गए, क्योंकि वे ऊपर की मंजिलों पर फंसे थे और धुएं से उनका दम घुट रहा था।
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7: अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 77 ने पेंटागन की जिस दीवार से टक्कर मारी, उसमें मरम्मत चल रही थी, जिससे जान-माल का नुकसान थोड़ा कम हुआ।
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8: कहा जाता है कि इस पूरी साजिश का '20वां हाइजैकर' माना जाने वाले व्यक्ति का नाम मोहम्मद अल-कहतानी था, जिसे अमेरिका में एंट्री ही नहीं मिल पाई थी। इसके अलावा 20वें हाइजैकर के तौर पर जकारियास मौसाउई और रमजी बिन अल-शिब का भी नाम सामने आता है।
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9: मलबे में सिर्फ और सिर्फ लाशें मिलने के कारण रेस्क्यू डॉग्स यानी कि खोजी कुत्ते डिप्रेशन में चले गए थे। इसके बाद जान-बूझकर जिंदा लोगों को वहां लिटाया गया और रेस्क्यू किया गया ताकि उन्हें अच्छा महसूस हो। खोजी कुत्तों के कई हैंडलर्स को भी मानसिक समस्याएं हुईं।
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10: प्लेन हाइजैक करते समय आतंकियों ने कुछ फ्लाइट्स में पेपर स्प्रे और केमिकल्स का इस्तेमाल किया था। कई आतंकियों ने फर्जी आईडी और चोरी के कागजात के दम पर फ्लाइट्स में एंट्री करने में कामयाबी पाई थी।