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दिव्यांग ने घंटो तक पेंटिंग कर बनाया अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड, 75 घंटे गीता श्लोक पाठ को भी मिला दुनिया में सम्मान

 Published : Nov 02, 2023 03:35 pm IST,  Updated : Nov 02, 2023 03:35 pm IST

गुजरात के सूरत जिले में एक दिव्यांग चित्रकार ने अपनी कलाकारी दिखाते हुए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। इसके बाद उसकी पूरे शहर में चित्रकार की चर्चा हो रही है।

Painter Manoj bhingare- India TV Hindi
चित्रकार मनोज भिंगारे Image Source : INDIA TV

अगर किसी को छोटी-सी भी चोट लग जाती है तो वो घर में बैठ कर चोट का रोना रोने लगता है। चोट लगने पर हम काम भी नहीं कर पाते है। सोचिए अगर आपका दोनो हाथ कट न हो तो जीवन कैसा होगा? सोचकर भी डर लगता है न? लेकिन कहते है कि "जहां चाह वहां राह" अगर इंसान अगर कोई काम करने की ठान ले तो रास्ते में कैसी भी अड़चन हो, वो उसे पार कर अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाता है। ऐसा ही कुछ कारनामा एक शख्स ने किया है। दोनों हाथों से लाचार इस शख्स ने 15 घंटे तक मुंह और पैर से भारतीय विरासत के चित्र बनाए हैं। शख्स ने सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती के मौके पर सूरत के नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं।

बिना हाथ के बनाए चित्र

दरअसल, ये वर्ल्ड रिकार्ड सूरत की अर्चना स्कूल में बनाए गए हैं। शख्स का नाम मनोज भिगांरे हैं। मनोज पेशे से चित्रकार है और वे मुंह और पैरों से पेंटिंग करते हैं। दिव्यांग चित्रकार मनोज भिंगारे ने स्कूल में सुबह 7 बजे से चित्र बनाना शुरू किया और लगातार 15 घंटे तक अपने मुंह और अपने दोनों पैर से ब्रश के जरिए केनवास पर रंग चित्र बनाए। उनकी ये प्रतिभा को देख वहां मौजूद सभी दंग रह गए।

एक और बना वर्ल्ड रिकार्ड

वहीं, 28 अक्टूबर को अर्चना स्कूल में गीता श्लोक का पाठ शुरू किया गया था। छात्र और स्टाफ ने मिलकर लगातार 75 घंटे तक गीता के संस्कृत श्लोक पढ़ना शुरू किया गया था और लगातार 75 घंटे तक श्लोक का पाठ कर एक कीर्तिमान बनाया। इस दौरान यूनिवर्सल अमेजिंग वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम भी मौजूद रही। टीम की ओर से चित्रकार मनोज भिंगारे और अर्चना स्कूल को वर्ल्ड रिकॉड का सर्टिफिकेट देकर सम्मानित करेंगे।

"छात्रों में नेतृत्व को बढ़ाना"

विश्व कीर्तिमान स्थापित करने में सूरत की संकल्प एजुकेशन ट्रस्ट संचालित अर्चना स्कूल के प्रिंसिपल श्रीनिवास मिटकुल ने बताया कि हमारा उद्देश्य छात्रों में नेतृत्व के गुणों का विकास, समाज में बढ़ती आत्महत्याएं, वृद्धाश्रमों की संख्या रोकने और नकारात्मकता को दूर करने का संदेश देना है।

(रिपोर्ट- शैलेष चंपानेरिया सूरत)

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