अहमदाबाद: गुजरात में पिछले 80 सालों से भी ज्यादा समय से अन्न जल के बिना जीवित प्रह्लाद जानी का निधन हो गया है। इन्हें लोग चुनड़ी वाले माताजी के नाम से बुलाते थे। यह विज्ञान के लिए भी एक पहेली बने रहे। खुद DRDO ने इन पर रिसर्च किया था ताकि सैनिकों को विषम परिस्थितियों में बिना खाए-पिए सर्वाइव करने की ट्रेनिंग दी जा सके।जानकारी के मुताबिक 13 अगस्त वर्ष 1929 को जन्मे प्रह्लाद जानी ने 10 साल की उम्र में ही आध्यात्मिक जीवन जीने के लिए घर छोड़ दिया था। एक बरस बाद वह देवी अंबा के भक्त हो गए। भक्ति से लबरेज प्रह्लाद जानी साड़ी, सिंदूर, नाक में नथ सहित पूरा महिलाओं का श्रृंगार करते थे। पिछले 50 वर्षों से वह अहमदाबाद से 180 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर बड़े विख्यात अंबाजी मंदिर के पास गुफा में रहते थे।
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पिछले 80 सालों से भी ज्यादा समय से अन्न और जल के बिना जीवित प्रह्लाद जानी का निधन
गुजरात में पिछले 80 सालों से भी ज्यादा समय से अन्न जल के बिना जीवित प्रह्लाद जानी का निधन हो गया है। इन्हें लोग चुनड़ी वाले माताजी के नाम से बुलाते थे।
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