तेहरानः ईरान को फिर परमाणु हथियार जुटाने की कोशिश करने पर अमेरिका द्वारा सैन्य हमले की नई धमकियां मिलने के बाद तेहरान भड़क उठा है। ट्रंप के बयान पर इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार ने देश के खिलाफ अमेरिका की सैन्य हमले की नई धमकियों की कड़ी निंदा की है और किसी भी संभावित आक्रमण का करारा जवाब देने की प्रतिज्ञा की है।
ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन की अमेरिकी धमकी पर पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी राष्ट्रपति ने एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कहा, "किसी भी दमनकारी आक्रमण के प्रति इस्लामिक गणराज्य ईरान की प्रतिक्रिया कठोर और खेदजनक होगी।"
ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले की नई सैन्य धमकियों के जवाब में एडमिरल अली शामखानी ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईरान की रक्षा नीति के तहत, धमकियों के प्रकट होने से पहले ही उसके जवाब की योजना बनाई जाती है। उन्होंने जोर दिया कि देश की मिसाइल और रक्षा क्षमताएं नियंत्रित या अनुमति-आधारित नहीं हैं। शामखानी ने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ कोई भी आक्रमण उसके योजनाकारों की कल्पना से परे तत्काल कठोर जवाब का सामना करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक बैठक के बाद पत्रकारों के सवाल का जवाब देते कहा था कि अगर तेहरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम जारी रखता है तो वह इजरायल द्वारा ईरान पर हमले का समर्थन करेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा, “अब मैं सुन रहा हूं कि ईरान फिर से निर्माण करने की कोशिश कर रहा है, और अगर ऐसा है, तो हमें उन्हें गिराना होगा। “हम उन्हें गिरा देंगे। हम उन्हें नर्क की तरह गिरा देंगे...लेकिन उम्मीद है कि ऐसा नहीं हो रहा।” अगर हमने ईरान को नहीं हराया होता, तो मध्य पूर्व में शांति नहीं होती।”
बीते जून में ट्रंप ने तेहरान के साथ शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत जारी होने के बावजूद इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ आक्रमण का सीधा समर्थन किया था। इतना ही नहीं, अमेरिका ने भी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सुरक्षा समझौते के तहत संरक्षित ईरान के परमाणु स्थलों पर अवैध हमले किए थे। इस दौरान अमेरिका ने ईरान के तीनों प्रमुख गुप्त परमाणु ठिकानों को हवाई हमले में नष्ट करने का दावा किया था। इस बीच ट्रंप ने फिर से ईरान पर नये हमले की धमकी देकर तनाव बढ़ा दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका दोबारा ईरान पर हमला नहीं चाहता, इसमें 37 घंटे लगते हैं, लेकिन ईरान दोबारा परमाणु हथियार जुटाने की कोशिश करेगा तो वह इजरायल द्वारा तेहरान पर हमले का समर्थन करेंगे।
इस्लामी क्रांति गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने सोमवार को एक बयान में कहा कि दुश्मन (अमेरिका और इजरायल) संज्ञानात्मक युद्ध, मनोवैज्ञानिक ऑपरेशनों, झूठी कथाओं, भय फैलाने और उनके प्रति समर्पण को प्रोत्साहित करके ईरानी समाज में फूट के बीज बोने की कोशिश कर रहे हैं। आईआरजीसी ने जून में इजरायल-अमेरिका के ईरान के खिलाफ 12-दिवसीय आक्रमण युद्ध को हाइब्रिड खतरे का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जिसमें सैन्य टकराव से कहीं अधिक व्यापक सुरक्षा, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक आयाम थे। ईरानी सशस्त्र बलों ने अपनी तैयारी दोहराते हुआ कहा, किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्य का दृढ़ जवाब देंगे। ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने चेतावनी दी कि देश के खिलाफ कोई भी शत्रुतापूर्ण कार्य हुआ तो इससे कहीं अधिक कठोर, अधिक करारा और अधिक हानिकारक जवाब का सामना करेगा।
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