आजकल के बच्चे मिट्टी-मैदान में खेलने से ज़्यादा मोबाइल, लैपटॉप, वीडियो गेम्स जैसे गैजेट्स पर टाइमपास करना ज्यादा पसंद आता है।बच्चे छोड़िए, आजकल तो ऐसे पेरेंट्स भी काफी हैं जो हाइजीन, साफ सफाई के नाम पर बच्चों को ज़्यादा ही कैद करके रखते हैं। मिट्टी से खेलना तो दूर बिना जूते या चप्पल, ज़मीन पर पैर भी नहीं रखने देते जबकि मिट्टी में खेलने के इतने फायदे हैं कि गिनते गिनते थक जाएंगे।इससे क्रिएटिविटी बढ़ती है, sensory development मज़बूत होता है, इम्यूनिटी बढ़ती है...नर्वस सिस्टम बेहतर होता है। हमारा शरीर मिट्टी, पानी, हवा, अग्नि, आकाश इन्हीं पंचतत्वों से बना है और इसलिए हमारी 5000 साल पुरानी विरासत आयुर्वेद में सूर्य चिकित्सा, मिट्टी, चिकित्सा, रश्मि चिकित्सा जैसी थेरेपी से ही इलाज किया जाता है।
अपनी ही हज़ारों साल पुरानी विरासत को देश के लोग ही नहीं समझ रहे लेकिन विदेशी लोग खूब समझ रहे हैं तभी तो डेनमार्क में बच्चों को स्पेशली मिट्टी में खेलने के लिए encourage किया जा रहा है क्योंकि यूरोपियंस mud therapy की ताकत को खूब समझ रहे हैं।नेचुरोपैथी वरदान है जिसमें 100 रोगों का निदान है इसलिए आज शुगर-बीपी, हार्ट, थायराइड, मोटापा, इनडायजेशन जैसी लाइफस्टाइल डिजीज़ को नेचुरल उपाय से ठीक करने के उपाय स्वामी रामदेव से जानेंगे जो हरिद्वार से पहुंच गए हैं पावन धरती प्रयागराज में।अब अगले 3 दिन महाकुंभ से ही योगगुरू हर बीमारी दूर करवाएंगे
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