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राजनाथ सिंह ने किया आईसीजीएस ‘वराह’ का जलावतरण, ये है इस जहाज की खासियत

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Sep 25, 2019 01:19 pm IST,  Updated : Sep 25, 2019 01:19 pm IST

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को यहां चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट में औपचारिक रूप से तटरक्षक बल के तटीय गश्ती जहाज ‘वराह’ का जलावतरण किया। जलावतरण समारोह के उपलक्ष्य में एक स्मृति पट्टिका का अनावरण करने के बाद सिंह ने कहा कि यह अत्याधुनिक जहाज भारतीय तटरक्षक बल की ताकत में और इजाफा करेगा।

राजनाथ सिंह ने किया आईसीजीएस ‘वराह’ का जलावतरण, ये है इस जहाज की खासियत- India TV Hindi
राजनाथ सिंह ने किया आईसीजीएस ‘वराह’ का जलावतरण, ये है इस जहाज की खासियत

चेन्नई: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को यहां चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट में औपचारिक रूप से तटरक्षक बल के तटीय गश्ती जहाज ‘वराह’ का जलावतरण किया। जलावतरण समारोह के उपलक्ष्य में एक स्मृति पट्टिका का अनावरण करने के बाद सिंह ने कहा कि यह अत्याधुनिक जहाज भारतीय तटरक्षक बल की ताकत में और इजाफा करेगा। उन्होंने कहा कि इसमें स्वदेशी एचएएल द्वारा विकसित दोहरे इंजन वाले एएलएच हेलीकॉप्टरों के संचालन की क्षमता है।

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इस जहाज में एडवांस्ड नेविगेशन तथा संचार उपकरण, सेंसर तथा मशीनरी का उपयोग किया गया है। इसमें 30 मिमी तथा दो 12.7 मिमी गन का उपयोग किया गया है। इसकी अधिकतम गति 26 नॉट है। इसमें इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, ऑटोमेटेड पॉवर मैनेजमेंट, इंटीग्रेटेड प्लेटफार्म मैनेजमेंट हाई पॉवर एक्सटर्नल फायर फाइटिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है।

सिंह अपनी दो दिवसीय यात्रा पर मंगलवार को चेन्नई पहुंचे। उन्होंने पोत के जलावतरण समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह वास्तव में भारतीय तटरक्षक, हमारे ‘समुद्र के प्रहरियों’ और लार्सन एंड टुब्रो शिपबिल्डिंग लिमिटेड की बढ़ती ताकत का गवाह है। लार्सन एंड टुब्रो हमारे समुद्री बलों के लिये निर्माण एवं संसाधन के रखरखाव का एक मजबूत सहायक स्तंभ है।’’ 

उन्होंने कहा कि ‘वराह’ नाम पुराणों से लिया गया है जो त्याग और समुद्र में बचाव, हमारी धरती मां की रक्षा करने, सौहार्द एवं ताकत बनाये रखने के सिद्धांत की याद दिलाता है। सिंह ने भारतीय तटरक्षक एवं एल एंड टी शिपयार्ड को ‘वराह’ को समुद्र में उतारने के लिये बधाई दी। 

उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी, तेल रिसाव की घटनाओं की व्यापक चुनौतियों, टकराव और समुद्री आतंकवाद के बढ़ते खतरे ने कई साल से विभिन्न समुद्री देशों एवं भारतीय तट रक्षक की क्षेत्रीय व्यवस्थाओं पर सहयोग की दिशा में आह्वान किया है तथा कूटनीतिक संबंध का निर्माण किया है।

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