नई दिल्ली: दिवाली का सीजन आता नहीं है कि बाजार चाइनीज चीजों से सज जाता है। जिसके ढेरों खरीददार होते है। चाहें फिर वह लाइट्स हो या फिर कोई और सजावट का समान, लेकिन इस बार नजारा अलग ही दिख रहा है। जिसके कारण इस बार कोई चाइनीज चीजों को पूछ भी नहीं रहा है। यहां तक की सोशल मीडिया में भी इसका बायोकॉट लोग तेजी से कर रहे है। इसके साथ ही अपनी चीन के प्रति अपनी भड़ास निकाल रहे है।
आलम ये हो गय़ा है कि जहां चाइनीज समान तेजी से बिकता था। आज वहीं समान केवन 40-50 प्रतिशत ही बड़ी ही मुश्किल से बिक रहा है। भारत के लोगों के इसलिए चीन के समान को ठुकारा रहे है, क्योंकि चीन ने मसूद अज़हर और उरी हमले के मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ दिया। जो कि इनका समान ठुकराकर चीन से गुस्सा निकाल रहे है। जिसका आलम ये हो गया है कि बाजार तो चाइनीज चीजों से भरा हुआ है, लेकिन इसका खरीददार कोई न है।
आतंक से लेकर कूटनीति तक पाकिस्तान के साथ खड़े ये चीन को भारतीयों द्वारा करारा जवाब मिल रहा है। जिसके लिए चाइनीज सामानों के ख़िलाफ़ लोग सड़कों, पार्को, चौराहें में दिवाली की जगह होली बनाकर बहिष्कार कर रहे है।
ऐसे शुरु दुआ चीन के प्रति लोगों का गुस्सा
भारत के लोगों के मन में चीन के प्रति गुस्सें की कोई एक वजह नहीं है बल्कि कई वजह है। जानिए इन वजहों के बारें में-
- चीनी सामानों के बहिष्कार का दौर उड़ी हमले के बाद शुरू हुआ।
- चीन के ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी रोकने का फ़ैसला
- जैश के मुखिया मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने में चीनी अडंगे का सवाल
- पाकिस्तान को हर मौक़े पर साथ देने की चीन की चाल
सोशल मीडिया में चीनी समान के खिलाफ कैंपेन
लोगों का गुस्सा सिर्फ सड़को में दिख रहा है बल्कि सोशल मीडिया में तेजी से दिख रहा है। चाइनीज समान के बहिष्कार के खिलाफ कई संगठन बने हुए है। जो कि कैंपेन चला रहे है। साथ ही दुकान-दुकान जाकर लोगों और दुकानदारों से इसे न खरदीने और न बेचने की अपील कर रहे हैं।
इस बहिष्कार से मिल रहा है स्वदेशी चीजों को बढ़ावा
बाजार में चाइनीज समान होने के कारण लोगों का मन स्वदेशी चीजों से बिल्कुल हट गया। जिसका कारण रोजगारी बढ़ गी थी। लेकिन इस बहिष्कार का एक और फायदा यह हुआ कि लोग फिर से स्वदेशी चीजों की ओर रुख करेंगे। जिससे बेरोजगारी की समस्या भी कुछ कम हो सकती है। लोगों द्वारा चलाए जा रहे कैंपेन का असर भी दिख रहा है।
चीन को हो सकता हैं काफी नुकसान
इस तरह के बहिष्कार से ड्रैगन को काफी नुकसान हो सकता है। जहां पर साल इसकी बिक्री अधिक होती थी। वहीं आज इसे खरदीने वाला कोई नहीं है। दुकानदार भी मानते हैं कि इस दीवाली पर धंधा मंदा है क्योंकि चाइचीज़ सामानों की डिमांड काफी कम है। लोग चीनी सामान के बहिष्कार और भारतीयों सामानों की मांग कर रहे हैं।
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