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सबरीमाला विवाद: मंदिर के कपाट 1 महीने के लिए बंद, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रवेश नहीं कर सकीं महिलाएं

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में तीर्थयात्रा का पहला चरण आज समाप्‍त हो गया। इसी के साथ मंदर के कपाट 1 महीने बंद हो गए हैं।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: October 22, 2018 17:47 IST
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केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में तीर्थयात्रा का पहला चरण आज समाप्‍त हो गया। इसी के साथ मंदर के कपाट 1 महीने बंद हो गए हैं। पहले चरण के अंत के बाद भी भक्‍तों और पुजारियों के विरोध के आगे सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी बौना नज़र आया। अभी तक महिलाएं मंदिर में नहीं कर सकीं हैं। इसके साथ ही पुलिस ने मीडिया को भी शनीधामन और पंबा मंदिर को छोड़ने के निर्देश दिए हैं। पुलिस को सूचना मिली है कि भीड़ मीडिया कर्मियों पर भी हमले कर सकती है। 

इससे पहले रविवार को, बड़ी संख्‍या में मौजूद भगवान अयप्‍पा के हजारों समर्थकों ने 6 महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने नहीं दिया। 10 से 50 वर्ष उम्र वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिबंध हटाने के आदेश को लागू करने का श्रद्धालु विरोध कर रहे हैं। श्रद्धालुओं ने अयप्पा के मंत्रों का उच्चारण करते हुए तेलुगु बोलने वाली छह महिलाओं को मंदिर में पहुंचने से पहले ही रोक दिया। 

भारी बारिश के बावजूद भक्‍तों का जमावड़ा 

उच्चतम न्यायालय द्वारा सदियों पुराने प्रतिबंध को पिछले महीने हटाने के बाद मासिक पूजा के लिए मंदिर के दरवाजे पांच दिन पहले खोले गए थे। 

पहाड़ियों और पम्बा में लगातार बारिश के बावजूद काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। एक कार्यकर्ता सहित कुछ युवतियां ‘नैश्तिक ब्रह्मचारी’ (शाश्वत ब्रह्मचर्य) मंदिर में बुधवार से ही प्रवेश करने का प्रयास कर रही हैं लेकिन पुजारियों के समर्थन में श्रद्धालु उनका मार्ग रोक रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे परम्परा को तोड़ने की अनुमति नहीं देंगे। अभी तक मौजूद संकेतों के मुताबिक दस से 50 वर्ष उम्र वर्ग की एक भी महिला मंदिर में नहीं पहुंच पाई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मासिक पूजा के लिए मंदिर के कपाट खोले जाने के बाद से अभी तक दस से 50 वर्ष उम्र वर्ग में 12 महिलाओं को मंदिर में पूजा करने से रोका गया है। 

भाजपा ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की 

भाजपा ने मामले में केंद्र से हस्तक्षेप करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने की मांग की है जबकि कांग्रेस ने राजग सरकार द्वारा अध्यादेश लाए जाने की मांग की है। सबरीमला मंदिर के परम्परागत संरक्षक पंडालम शाही परिवार ने आरोप लगाया कि माकपा नीत एलडीएफ सरकार मासिक धर्म उम्र वर्ग की महिलाओं को ‘‘नैश्तिक ब्रह्मचारी’’ मंदिर में प्रवेश देकर मंदिर की पवित्रता को बर्बाद करने का प्रयास कर रही है। 

रविवार का घटनाक्रम 

रविवार को 47 वर्षीय एक महिला मंदिर के गर्भ गृह ‘नडाप्पंधाल’ के नजदीक पहुंच गई लेकिन श्रद्धालुओं ने ‘‘स्वामिये शरणम अयप्पा’’ का मंत्रोच्चार करते हुए उसे वहां प्रवेश करने से रोक दिया जबकि मंदिर मंदिर की तरफ जा रहीं पांच महिलाओं को भी श्रद्धालुओं ने रोक दिया। वहां मौजूद एक बुजुर्ग महिला श्रद्धालु ने कहा कि महिला के पहचान पत्र में उसके जन्म का वर्ष 1971 अंकित था और वह ‘अनुमन्य उम्र’ तक नहीं पहुंच पाई थी इसलिए अन्य श्रद्धालुओं ने मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे रोक दिया।
 
इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने अपने रिश्तेदारों के साथ आईं दो महिलाओं को मंदिर के रास्ते में ही रोक दिया जिनकी उम्र 40 वर्ष के करीब थी। 
पुलिस ने दोनों महिलाओं को सुरक्षित निकाला। पुलिस ने कहा कि दोनों ने उन्हें बताया कि मंदिर की परम्परा की उन्हें जानकारी नहीं थी, इसलिए वे सबरीमला आ गईं। महिलाओं को आधार शिविर निलक्कल लाए जाने के बाद उन्होंने पुलिस को लिखित में जवाब दिया कि वे मंदिर की सदियों पुरानी परम्परा को नहीं तोड़ना चाहती थीं।

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