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क्या कश्मीर पर परमाणु युद्ध हो सकता है, पाकिस्तान में किसके पास है 'न्यूक्लियर बटन'?

पाकिस्तान इस्लामाबाद से करीब एक हजार किलोमीटर दूर पहाड़ियों में एटमी टेस्ट का दावा करता रहा है। ये बलूचिस्तान की चगाई हिल्स का इलाका है। 1998 यानी दो दशक पहले पाकिस्तान ने चगाई हिल्स के इसी इलाके में पहली बार न्यूक्लियर टेस्ट किया था।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: August 27, 2019 13:16 IST
क्या कश्मीर पर परमाणु युद्ध हो सकता है, पाकिस्तान में किसके पास है 'न्यूक्लियर बटन'?- India TV
क्या कश्मीर पर परमाणु युद्ध हो सकता है, पाकिस्तान में किसके पास है 'न्यूक्लियर बटन'?

नई दिल्ली: दो दशक हो चुके हैं जब पाकिस्तान ने एटम बम के परीक्षण का दावा किया था और तभी से पाकिस्तानी वक्त-बेवक्त एटम बम की गीदड़ भभकी देता रहता है। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाहट में फिर एटम बम की गीदड़ भभकी दे रहा है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी देश की जनता को कश्मीर के मुद्दे पर संबोधित करते हुए भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दे दी। बता दें कि पाकिस्तान इस्लामाबाद से करीब एक हजार किलोमीटर दूर पहाड़ियों में एटमी टेस्ट का दावा करता रहा है। ये बलूचिस्तान की चगाई हिल्स का इलाका है। 1998 यानी दो दशक पहले पाकिस्तान ने चगाई हिल्स के इसी इलाके में पहली बार न्यूक्लियर टेस्ट किया था लेकिन पाकिस्तान के इन एटमी टेस्ट की कामयाबी और ताकत से दुनिया गफलत में रही है।

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दुनिया भर में सामरिक मुद्दों पर रिसर्च करने वाली अमेरिकी संस्था FAS यानी Federation of American Scientists ने, एक रिपोर्ट में पाकिस्तान की परमाणु नीयत को 2016 में बेपर्दा कर दिया था। ये संस्था पूरी दुनिया के एटमी असलहे का रिकॉर्ड रखती हैं, उसका विश्लेषण करती है। FAS से जुड़े Hans M. Kristensen और उनके साथी Robert Norris, परमाणु सुरक्षा के मुद्दे पर क़रीब 40 सालों से रिसर्च कर रहे हैं।

उनकी रिपोर्ट Nuclear Notebook on Pakistani Nuclear Forces में बहुत तफ़सील से बताया गया है कि पाकिस्तान ने अपना परमाणु ज़ख़ीरा कहां-कहां छुपाया हुआ है। पाकिस्तान ख़ुद हैरान था कि उसके सामरिक ठिकानों का ऐसा सूक्ष्म विश्लेषण कोई कैसे कर सकता है। उन्होंने रिपोर्ट में दावा किया था कि पाकिस्तान 2025 तक 250 परमाणु बम तैयार कर लेगा। आज पाकिस्तान के पास क़रीब 140 परमाणु बम है।

उन्होंने सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों की बुनियाद पर रिपोर्ट तैयारी की। उन्होंने पाकिस्तान के सभी ख़ुफ़िया ठिकानों को डीकोड कर दिया। Kristensen ने बाद में अपने एक लेख Pakistan's Evolving Nuclear Weapons Infrastructure में उन ठिकानों का और ज़्यादा ब्योरा दिया। इस रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के साथ पाकिस्तान के एक-एक मिलिट्री बेस की जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट में पाकिस्तान के 20 ऐसे बेस शामिल हैं जहां परमाणु बम छुपाकर रखे गये हैं। इनमें 6 मिसाइल बेस हैं, जबकि 4 बड़े एयरबेस भी शामिल हैं, जहां F-16 और मिराज विमान तैनात हैं लेकिन इनमें 9 ठिकाने ऐसे हैं जहां परमाणु बम होने की बात पुख़्ता हो सकती है। इनमें पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 4 बेस हैं, सिंध सूबे में 3 अड्डे हैं,  जबकि बलोचिस्तान और ख़ैबर पख़्तुनख्वा में एक-एक बेस हैं।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में गुजरांवाला आर्मी बेस भारत की सीमा से सिर्फ़ 60 किलोमीटर दूरी पर है। यहां पाकिस्तान की नस्र मिसाइल तैनात है जिसकी रेंज 70 किलोमीटर है। पाकिस्तान ने ये मिसाइल भारत पर Tactical Nuclear Weapon से हमला करने के लिये बनाई हैं। ये छोटे दायरे में दुश्मन पर परमाणु हमला करने वाली नीति का हिस्सा है। युद्ध में भारत के ख़िलाफ़ अगर पाकिस्तान Tactical Nuclear Weapon से हमला करता है तो उसके लिये नस्र मिसाइल का ही इस्तेमाल किया जाएगा लेकिन अगर भारत ने इस ठिकाने को पहले ही बर्बाद कर दिया तो भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान का परमाणु बम वाला ट्रंप कार्ड पहले राउंड में ही ख़त्म हो जाएगा।

पाकिस्तान ने 2014 के बाद से गुजरांवाला आर्मी बेस पर नस्र मिसाइल को तैनात कर दिया था। यह पंजाब मोर्चे पर सबसे बड़ी चुनौती होगी लेकिन गुजरांवाला अकेला ऐसा बेस नहीं है जहां पाकिस्तान की परमाणु ताक़त तैनात है। दक्षिण में आकरो आर्मी बेस सिंध सूबे में पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण बेस है। यह पाकिस्तान के हैदराबाद शहर से 18 किलोमीटर दूर है, जबकि भारत की सीमा से इसका फ़ासला 145 किलोमीटर है। सैटेलाइट से ली गई आकरो बेस की तस्वीर में बाबर क्रूज़ मिसाइल को लॉन्च करने वाले ट्रक दिखाई दे रहे हैं। ये बेस पूरे सिंध प्रांत को कवर करता है।

यहां अंडरग्राउंड फैसिलिटी शाहीन और ग़ौरी जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों को छुपाने के लिये बनाई गई है। सिंध सूबे में ही पाकिस्तानी सेना का एक और बेस पानो अकिल है जो भारत की सीमा से 80 किलोमीटर दूर है। पानो अकिल में एक हवाई पट्टी भी है, हथियारों का डिपो है और शूटिंग रेंज भी है। सैटेलाइट से मिली तस्वीर में यहां खड़े लॉन्चर नस्र, शाहीन-1 या ग़ज़नवी मिसाइल के बताये जाते हैं। पाकिस्तान को हमेशा ये डर सताता रहा है कि जंग के हालात में भारत उन मिसाइल बेस पर सबसे पहले हमला करेगा, जो इंटरनेशनल बॉर्डर के क़रीब हैं इसलिये बलोचिस्तान में भी एक बेस को परमाणु हमले के हिसाब से तैयार किया गया है।

बलोचिस्तान में खुज़दार आर्मी बेस है जिसकी भारत से दूरी 295 किलोमीटर है। बाक़ी सैन्य अड्डों के मुक़ाबले ये भारत की सीमा से सबसे ज़्यादा दूर है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि यहां मौजूद लॉन्चर शाहीन-2 मिसाइल के हैं, जिसकी रेंज क़रीब 2000 किलोमीटर है। यहां भी आरको सैन्य बेस की तरह अंडरग्राउंड ठिकाने हैं। खुज़दार को पाकिस्तान का सबसे ख़ुफ़िया सैन्य अड्डा माना जाता है। Hans Kristensen और Robert Norris ने अपनी रिपोर्ट में बार-बार F-16 और मिराज-5 विमान का ज़िक्र किया है।

पाकिस्तान वायु सेना में यही दो विमान हैं जो परमाणु हमला अंजाम दे सकते हैं। मिराज-5 विमान दक्षिण में पाकिस्तानी एयरबेस मसरूर एयरबेस पर तैनात हैं। ये हवाई अड्डा कराची शहर के पश्चिम में बना हुआ है। मसरूर एयरबेस पर दो हवाई पट्टी हैं लेकिन इसके आसपास बने ठिकाने बताती हैं कि ये आम हवाई अड्डा नहीं है। मसरूर एयरबेस पर तैनात पाकिस्तान के मिराज-5 विमान चार दशक पुराने हैं लेकिन अब इस विमान को परमाणु हमले के लिये अपग्रेड किया गया है। अब इससे राद क्रूज़ मिसाइल लॉन्च हो सकती हैं।

राद क्रूज़ मिसाइल परमाणु बम से लैस की जा सकती है। इसकी रेंज 350 किलोमीटर है। मसरूर एयरबेस में अंडरग्राउंड रास्ते बनाये गये हैं ताकि सैटेलाइट की नज़र से बचकर विमान को राद क्रूज़ मिसाइल से लैस किया जा सके लेकिन जंग के हालात में भारत सबसे पहली एयरस्ट्राइक मसरूर एयरबेस से क़रीब एक हज़ार किलोमीटर दूर करना चाहेगा। ये है सरगोधा में मुशाफ़ एयरबेस। यह भारत के बॉर्डर से क़रीब 220 किलोमीटर दूर है। सरगोधा में बना ये हवाई अड्डा पाकिस्तान का सबसे सीक्रेट एयरबेस माना जाता है। मुशाफ़ एयरबेस पर विमानों और हथियारों को छुपाने के लिये ऐसे शेल्टर बनाये गये हैं जो भारी बमबारी को झेल सकते हैं।

ये एयरबेस पाकिस्तानी वायु सेना की सेंट्रल कमांड का मुख्यालय भी है। यहां पाकिस्तान के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमान F-16 तैनात हैं, जो परमाणु बम से हमला कर सकते हैं। हालांकि ये बताया जाता है कि जब 80 के दशक में अमेरिका ने पाकिस्तान को F-16 विमान बेचे थे तो ये शर्त रखी गई थी कि ये कभी परमाणु हमले के लिये इस्तेमाल नहीं किये जाएंगे लेकिन पाकिस्तान ने अपने ज़्यादातर F-16 विमानों को अब एटमी हमले लायक़ बना लिया है। आज पाकिस्तान की वायु सेना के पास क़रीब 75 F-16 हैं। इनकी चार स्क्वाड्रन तीन एयरबेस पर तैनात हैं।

सरगोधा को हमेशा पाकिस्तानी वायु सेना का क़िला माना गया है। 1965 के युद्ध में भारतीय वायु सेना जब सरगोधा पर हमला किया था तब पाकिस्तान ने अपने विमान यहां से हटा लिये थे। युद्ध के हालात में भारत की रणनीति इस बेस को पूरी तरह तबाह करने की होगी। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान की हवाई ताक़त की कमर बहुत हद तक टूट जाएगी लेकिन सरगोधा में एक और जगह है, जिसपर भारत की नज़र ज़रूर होगी। मुशाफ़ एयरबेस से 10 किलोमीटर दूर है सरगोधा आर्मी बेस। यहां मिसाइलों को रखने का एक बड़ा डिपो है। Nuclear Notebook on Pakistani nuclear forces  रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 के दशक में जब पाकिस्तान ने चीन से M-11 मिसाइल ली थीं, तब उन्हें सरगोधा में रखने का इंतज़ाम किया गया था।

आज यहां अंडरग्राउंड ठिकानों के साथ सुरंग बनाई जा रही हैं, जिनमें ग़ौरी और शाहीन-2 जैसी बड़ी मिसाइल भी रखी जा सकती हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के दो और एयरबेस हैं जहां परमाणु बम रखे जाने की संभावना है क्योंकि वहां से F-16 और मिराज-5 विमान ऑपरेट करते हैं। एक है पंजाब प्रांत का रफ़ीक़ी एयरबेस और दूसरा है सिंध सूबे का शाहबाज़ एयरबेस। इन दोनों एयरबेस को 2015 के बाद अपग्रेड किया गया है ताकि यहां से F-16 और मिराज-5 को परमाणु बम से लैस किया जा सके। पाकिस्तान परमाणु हमले के लिये विमानों से ज़्यादा अपनी मिसाइलों पर भरोसा करता है। इसी वजह से अब नये विमान ख़रीदने की जगह उसने मिसाइल उत्पादन तेज़ कर दिया है।

पाकिस्तान में इस्लामाबाद के क़रीब बहुत ही संवेदनशील जगह है फ़तेह जंग। यहां बना है पाकिस्तान का National Development Complex, इसे National Defence Complex भी कहा जाता है। काला चिट्टा के पहाड़ों के पास बने इस Complex में 90 के दशक से ग़ज़नवी और शाहीन मिसाइल बनाई जा रही हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि अब यहां बाबर क्रूज़ मिसाइल और शाहीन-2 मिसाइल भी बनाई जाती हैं, क्योंकि उनके लॉन्चर यहां देखे गये हैं।

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