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Money Laundering Case: हेमंत सोरेन की बढ़ेगी मुश्किल! ED ने कहा- बड़े-बड़े लोगों के पास पहुंचा मनी लॉन्ड्रिंग का पैसा

झारखंड हाई कोर्ट से ED ने कहा कि निलंबित IAS पूजा सिंघल से पूछताछ और दस्तावेज से अहम खुलासे हुए हैं। घोटाले की राशि शेल कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी।

Khushbu Rawal Written by: Khushbu Rawal @khushburawal2
Updated on: May 17, 2022 23:55 IST
Hemant Soren- India TV Hindi
Image Source : PTI Hemant Soren

Highlights

  • निलंबित IAS पूजा सिंघल से पूछताछ और दस्तावेज से अहम खुलासे
  • रिश्वत की रकम सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों तक पहुंचती थी
  • बड़े अधिकारियों और सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की भूमिका संदिग्ध

Money Laundering Case: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ माइनिंग लीज आवंटन और शेल कंपनी से जुड़े उनके करीबियों के मामले पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। झारखंड हाई कोर्ट से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कहा कि निलंबित IAS पूजा सिंघल से पूछताछ और दस्तावेज से अहम खुलासे हुए हैं। घोटाले की राशि शेल कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी। इसमें बड़े अधिकारियों और सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की भूमिका संदिग्ध है। झामुमो के पूर्व कोषाध्यक्ष रवि केजरीवाल ने भी ईडी की पूछताछ में कई शेल कंपनियों का नाम बताया है, जिसके जरिए पैसे होटल और रेस्टोरेंट में निवेश किए जाते थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबियों के शेल कंपनी चलाने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान ईडी ने उक्त जानकारी कोर्ट को दी।

'रिश्वत की रकम सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों तक पहुंचती थी'

ED की ओर से पेश सील बंद लिफाफे को खोला गया। कोर्ट को ईडी के वकील तुषार मेहता ने बताया, ''2010 में 16 एफआईआर हुई थी। इसके बाद ED ने अपनी जांच में पाया कि करोड़ों रुपये पूजा सिंघल के पास हैं। उन्हें मिलने वाली रिश्वत की रकम सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों तक पहुंचती थी। रिश्वत के पैसों को शेल कंपनी के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी। जांच में कुछ लोगों ने यह स्वीकार किया है कि मनी लॉन्ड्रिंग होती थी। एक व्यक्ति ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली कंपनियों की लिस्ट दी है।''

इसके बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि मनरेगा से जुड़ी 16 FIR की डिटेल कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। अब अगली सुनवाई 19 मई को होगी। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा, ''इस मामले को CBI को क्यों दिया जाए, जबकि इस मामले में किसी तरह की FIR दर्ज नहीं है।'' इस पर याचिकाकर्ता के वकील राजीव कुमार ने दलील देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर अदालत जांच का आदेश पारित कर सकती है। साथ ही उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि यह मामला पूजा सिंघल के मामले से जुड़ा है।

कपिल सिब्बल ने सरकार का और तुषार मेहता ने रखा ED का पक्ष
शेल कंपनी के मामले में सरकार की तरफ से अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। माइनिंग लीज प्रकरण मामले की सुनवाई में सीएम हेमंत सोरेन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मुकुल रहतोगी ने पक्ष रखा। जबकि, ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने पक्ष रखा। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी ने कोर्ट को बताया कि वह झारखंड की सिर्फ चार कंपनियों की जानकारी दे सकता है। झारखंड की यह चार कंपनियां उनके अधीन हैं। इसके अलावा जिन 45 कंपनियों का जिक्र है, उनकी जानकारी पटना, दिल्ली, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और कोलकाता के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी कार्यालय से मांगी जा सकती है।

इन्होंने की है CM के खिलाफ PIL दायर
इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ शिवशंकर शर्मा ने जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि सीएम के करीबी लगभग 400 शेल कंपनी चलाकर कमाई कर रहे हैं। इनमें झारखंड से कमाई गई राशि से होटल, मॉल सहित अन्य संपत्ति खरीदी गई है। इस पर हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी को प्रतिवादी बनाया और जानकारी मांगी।