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Railway News: रेलवे ने की दलालों पर बड़ी कार्रवाई, कई राज्यों से पकड़े गए आरोपी, 43 लाख का रेल टिकट जब्त

 Edited By: Malaika Imam
 Published : Aug 29, 2022 06:57 pm IST,  Updated : Aug 29, 2022 07:16 pm IST

Railway News: ये आरोपी व्यक्ति IRCTC के फर्जी वर्चुअल नंबर और फर्जी यूजर आईडी प्रदान करने के साथ-साथ सोशल मीडिया यानी टेलीग्राम, व्हाट्सएप आदि का उपयोग करके इन अवैध सॉफ्टवेयरों के विकास और बिक्री में शामिल थे।

Railway News- India TV Hindi
Railway News Image Source : FILE PHOTO

Highlights

  • आरक्षित सीटों को थोक में बुक करवाते
  • ऊंचे दामों पर जरूरतमंदों को बेचते हैं
  • नकली आईपी पते बनाने के लिए सॉफ्टवेयर

Railway News: भारतीय रेलवे के यात्री परिवहन में सीटों और बर्थ की बहुत अधिक मांग है। इस मांग को देखते हुए कई दलाल आरक्षित सीटों को थोक में बुक करवा कर अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल करते हैं और फिर उन्हें ऊंचे दामों पर जरूरतमंदों को बेचते हैं। आरपीएफ (RPF) ने इसके खिलाफ एक अभियान ऑपरेशन उत्थान चलाया था। इसके तहत आरपीएफ की टीम ने 8 मई 2022 को राजकोट के मन्नान वाघेला (ट्रैवल एजेंट) को पकड़ा था। उससे पूछताछ के आधार पर अन्य जगहों से और आरोपियों को पकड़ा गया है। जो थोक में रेलवे टिकटों को करवा कर उनको अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए सर्कुलेट करते थे।

राजकोट के वाघेला से मिली जानकारी के मुताबिक, एक अन्य व्यक्ति कन्हैया गिरी को 17 जुलाई को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान गिरी ने अपने खुलासे में अन्य सहयोगियों और वापी के एडमिन/डेवलपर अभिषेक शर्मा का नाम लिया था,  जिसको 20 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। अभिषेक शर्मा ही इन सभी का मास्टर माइंड था। उसने अवैध सॉफ्टवेयर्स के एडमिन होने की बात कबूल की है। 

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अवैध सॉफ्टवेयरों के विकास और बिक्री में शामिल

आरपीएफ ने बाद में तीन और आरोपी- अमन कुमार शर्मा, वीरेंद्र गुप्ता और अभिषेक तिवारी को क्रमश: मुंबई, वलसाड (गुजरात) और सुल्तानपुर (यूपी) से गिरफ्तार किया है। आरपीएफ इस मामले में शामिल कुछ और संदिग्धों की तलाश में है। ये आरोपी व्यक्ति आईआरसीटीसी (IRCTC) के फर्जी वर्चुअल नंबर और फर्जी यूजर आईडी प्रदान करने के साथ-साथ सोशल मीडिया यानी टेलीग्राम, व्हाट्सएप आदि का उपयोग करके इन अवैध सॉफ्टवेयरों के विकास और बिक्री में शामिल थे। 

1688 टिकटों की कीमत 43,42,750 रुपये 

इन आरोपियों के पास नकली आईपी पते बनाने के लिए सॉफ्टवेयर थे, जिनका इस्तेमाल ग्राहकों पर प्रति आईपी पते की सीमित संख्या में टिकट प्राप्त करने के लिए लगाए गए प्रतिबंध को दरकिनार करने के लिए किया जाता था। उन्होंने डिस्पोजेबल मोबाइल नंबर और डिस्पोजेबल ईमेल भी बेचे, जिनका उपयोग आईआरसीटीसी की फर्जी यूजर आईडी बनाने के लिए ओटीपी सत्यापन के लिए किया जाता है। इस मामले में इन सभी आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के क्रम में 1688 टिकटों की कीमत रु. 43,42,750/-, जहां यात्रा शुरू नहीं की जा सकी, को जब्त कर लिया गया है। अतीत में, उन्होंने 28.14 करोड़ के टिकट खरीदे और बेचे थे, जिससे उन्हें भारी कमीशन मिला।

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