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Axiom-4 Mission: शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष के लिए भरी उड़ान, जान लीजिए डॉकिंग की टाइमिंग

 Reported By: T Raghavan Edited By: Mangal Yadav
 Published : Jun 25, 2025 11:05 am IST,  Updated : Jun 25, 2025 12:12 pm IST

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गए। शुक्ला की मां आशा शुक्ला अपने बेटे के लिए खुशी से भावुक हो गईं।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला- India TV Hindi
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला Image Source : FILE-PTI

शुभांशु शुक्ला एक्सिऑम-4 मिशन:  भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला तीन अन्य चालक दल के सदस्य अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हो गए हैं। भारतीय समय के अनुसार, दोपहर 12 बजकर एक मिनट पर मिशन को लांच किया गया। नासा ने बताया कि गुरुवार शाम चार बजकर 30 मिनट पर डॉकिंग की टाइमिंग है। इस मिशन का संचालन भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला कर रहे हैं। क्रू कंपनी के फाल्कन 9 रॉकेट पर एक नए स्पेसएक्स ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट पर सवार होकर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा कर रहा है।  इस मिशन का नेतृत्व अमेरिका की कमांडर पैगी व्हिटसन कर रही हैं, जिसमें शुभांशु शुक्ला मिशन पायलट हैं और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कपू और पोलैंड के स्लावोज़ उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की मिशन विशेषज्ञ हैं।

 क्या है डॉकिंग की टाइमिंग

फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष यात्रियों ने उड़ान भरी। कंपनी के फाल्कन 9 रॉकेट पर लॉन्च होने के बाद चालक दल एक नए स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान पर परिक्रमा प्रयोगशाला की यात्रा करेगा। नासा ने एक बयान में कहा कि मिशन की डॉकिंग समय गुरुवार, 26 जून को भारतीय मानक समय के अनुसार शाम 4.30 बजे है। 

नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री और एक्सिऑम स्पेस में मानव अंतरिक्ष उड़ान के निदेशक पैगी व्हिटसन मिशन की कमान संभाल रहे हैं, जबकि इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला पायलट के रूप में काम करेंगे। दो मिशन विशेषज्ञ हैं - पोलैंड के ईएसए (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी) परियोजना अंतरिक्ष यात्री स्लावोज़ उज़्नान्स्की-विस्निएव्स्की और हंगरी के एचयूएनओआर (हंगेरियन टू ऑर्बिट) अंतरिक्ष यात्री टिबोर कापू।

स्पेस डॉकिंग क्या है

डॉकिंग तब होती है जब कोई अंतरिक्ष यान खुद को अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ता है। अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक तब उपयोगी होती है जब सामान्य मिशन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कई रॉकेट अंतरिक्ष में लॉन्च किए जाते हैं। अंतरिक्ष डॉकिंग तेज स्पीड से चलने वाले अंतरिक्ष यान को एक ही कक्षा में लाकर पास लाने और एकसाथ जोड़ने की जटिल प्रक्रिया है। बता दें कि शुभांशु शुक्ला लगभग 40 साल बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बन रहें हैं। इसके पहले राकेश शर्मा ने 1984 में रूस के सोयूज अंतरिक्ष यान से अंतरिक्ष की यात्रा की थी। 

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