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बांग्लादेश में BNP की जीत से भारत पर क्या होगा इसका असर? जानिए विशेषज्ञों की राय

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj Published : Feb 13, 2026 06:42 am IST, Updated : Feb 13, 2026 06:50 am IST

बांग्लादेश और भारत की सीमा आपस में जुड़ी हुई है। इसलिए वहां की नई सरकार भारत की सुरक्षा व्यवस्था के नजरिए से काफी अहम हो सकती है। शेख हसीना की सरकार जाने के बाद बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं को टार्गेट किया जा रहा है।

वोट डालते हुए बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस- India TV Hindi
Image Source : PTI वोट डालते हुए बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस

बांग्लादेश में किसकी सरकार बनेगी, अब से कुछ ही देर में चुनावी नतीजे आ जाएंगे। इस चुनाव में जीत बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) की हो या फिर जमात की, दोनों ही स्थिति में भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है। इन सबसे ऊपर भारत के लिए सबसे अहम मुद्दा सुरक्षा है। भारत बांग्लादेश के साथ 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। यह भारत की किसी भी पड़ोसी के साथ सबसे लंबी सीमा है। ऐसे में भारत की शांति और सुरक्षा के लिए एक स्थिर बांग्लादेश जरूरी है। 

जानवरों की तस्करी, नशीली दवाओं का व्यापार 

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां कोई बाड़ नहीं है। इन्हीं इलाकों से गैर-कानूनी इमिग्रेशन, जानवरों की तस्करी, नशीली दवाओं का व्यापार और नकली करेंसी का आना-जाना होता है।

बांग्लादेश की स्थिरता एक बड़ी चिंता

एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश की स्थिरता एक बड़ी चिंता है। एक मजबूत सरकार के साथ एक स्थिर बांग्लादेश का मतलब होगा कि सीमाएं सुरक्षित रहेंगी, क्योंकि दोनों पक्ष बातचीत करेंगे। भारत बांग्लादेश से आतंकवादियों की एंट्री को लेकर भी चिंतित है।

यूनुस के काल में आईएसआई एक्टिव 

यूनुस के शासन में कई कट्टरपंथियों और आतंकवादियों को रिहा किया गया है। साथ ही बांग्लादेश में यूनुस के काल में आईएसआई एक्टिव हो चुकी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिसका भविष्य में भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा।

काउंटर-टेररिज्म प्रमुख मुद्दा

शेख हसीना सरकार गिरने से पहले, काउंटर-टेररिज्म दोनों देशों के बीच संबंधों का एक अहम हिस्सा रहा है। दोनों देशों ने पहले जो काउंटर-टेरर ऑपरेशन किए हैं। वे बिना किसी रुकावट के हुए हैं। भारत चाहेगा कि यह संतुलन बना रहे और इसलिए, लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार का होना बहुत जरूरी है।

भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी 

बांग्लादेश और भारत लंबे समय से व्यापारिक साझेदार रहे हैं। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए एक स्थिर बांग्लादेश बहुत जरूरी है। हसीना की सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध काफी अच्छे थे। दोनों देशों ने मिलकर आर्थिक सहयोग बढ़ाया था। इसमें व्यापार से आगे बढ़कर ऊर्जा सहयोग और बिजली का व्यापार भी शामिल था।

सालों की मेहनत पर फिर सकता है पानी

ये जरूरी मुद्दे हैं और दोनों देश चाहेंगे कि ये बने रहें। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिरता पर निर्भर करेगा। किसी भी तरह की अस्थिरता दोनों देशों के सालों की मेहनत पर पानी फेर देगी। भारत और बांग्लादेश ने 1971 से अब तक साथ मिलकर जिस तरह से हर क्षेत्र में आपसी संबंध स्थापित किए हैं और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया है, वह सब बर्बाद हो जाएगा।

जमात और बीएनपी अब एक दूसरे के दुश्मन

भारत को उम्मीद है कि बीएनपी चुनाव जीतेगी, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी की तुलना में इस पार्टी के साथ काम करना आसान होगा। एक अधिकारी ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि अगर जमात सत्ता में आई तो संबंध पूरी तरह टूट जाएंगे। भारत ने जमात के साथ तब काम किया है, जब वह पहले बीएनपी के साथ गठबंधन में थी। अभी स्थिति अलग है क्योंकि जमात और बीएनपी अब सहयोगी नहीं बल्कि दुश्मन हैं। 

इनपुट-डीडी न्यूज

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