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Pegasus Case: फोन टैपिंग के आरोप गलत, संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव का संसद में बयान

बता दें कि Pegasus स्पाइवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो व्हाट्सएप जैसे एप समेत फोन में अन्य एप्लिकेशन को हैक कर सकता है। ये सॉफ्टवेयर इज़रायली कंपनी NSO Group द्वारा डेवलेप किया गया है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: July 19, 2021 22:27 IST
Pegasus Case: Allegations of phone tapping is false, says Ashwini Vaishnav in Lok Sabha- India TV Hindi
Image Source : PTI पेगासस जासूसी कांड पर संचार मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने लोकसभा में केंद्र सरकार का पक्ष रख रखा।

नई दिल्ली: पैगसस जासूसी कांड पर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने लोकसभा में केंद्र सरकार का पक्ष रख रखा। उन्‍होंने कहा कि 'रिपोर्ट कहती है कि डेटा में फोन नंबर्स की मौजूदगी से हैक की पुष्टि नहीं होती। फोन टापिंग के मामले में जासूरी के आरोप गलत, लीक डेटा का जासूसी से कोई लेना देना नहीं, फोन टैपिंग के लिए भारत में सख्त प्रोटोकॉल, राष्ट्रहित और सुरक्षा से जुड़े मामलों में ही फोन टैपिंग की अनुमति।' उन्होंने यह भी कहा कि संसद के मानसून सत्र से पहले जासूसी से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट भारतीय लोकतंत्र की छवि को धूमिल करने का प्रयास है।

लोकसभा में स्वत: संज्ञान के आधार पर दिये गए अपने बयान में वैष्णव ने कहा कि जब देश में नियंत्रण एवं निगरानी की व्यवस्था पहले से है तब अनधिकृत व्यक्ति द्वारा अवैध तरीके से निगरानी संभव नहीं है। केंद्रीय मंत्री का बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब मॉनसून सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों ने संसद के दोनों सदनों में इसके समेत कुछ अन्य मुद्दों पर शोर-शराबा किया। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री का यह बयान मीडिया में आई रिपोर्ट के मद्देनजर सामने आया है कि कुछ राजनीतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों, पत्रकारों सहित अनेक भारतीयों की निगरानी करने के लिये पैगसस स्पाइवेयर का उपयोग किया गया था। 

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा, ‘‘कल रात को एक वेब पोर्टल द्वारा बेहद सनसनीखेज खबर प्रकाशित की गई। यह प्रेस रिपोर्ट संसद के मॉनसून सत्र के एक दिन पहले सामने आई। यह संयोग नहीं हो सकता है। अतीत में वॉट्सऐप पर पैगसस के इस्तेमाल करने का दावा सामने आया। इन खबरों का तथ्यात्मक आधार नहीं है और सभी पक्षों ने इससे इनकार किया है।’’ वैष्णव ने कहा कि 18 जुलाई 2021 को आई प्रेस रिपोर्ट भारतीय लोकतंत्र और एक स्थापित संस्थान की छवि को धूमिल करने का प्रयास लगती है।

बता दें कि मीडिया संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय संगठन ने खुलासा किया है कि केवल सरकारी एजेंसियों को ही बेचे जाने वाले इजराइल के जासूसी साफ्टवेयर के जरिए भारत के दो केन्द्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और अधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर हो सकता है कि हैक किए गए हों। यह रिपोर्ट रविवार को सामने आई है।

Pegasus स्पाईवेयर कैसे काम करता है?

बता दें कि Pegasus स्पाइवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो व्हाट्सएप जैसे एप समेत फोन में अन्य एप्लिकेशन को हैक कर सकता है। ये सॉफ्टवेयर इज़रायली कंपनी NSO Group द्वारा डेवलेप किया गया है। पैगसस एक स्पाइवेयर है जिसे इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ ने बनाया है। ये एक ऐसा प्रोग्राम है जिसे अगर किसी स्मार्टफोन फोन में डाल दिया जाए तो कोई हैकर उस स्मार्टफोन के माइक्रोफोन, कैमरा, ऑडियो और टेक्सट मेसेज, ईमेल और लोकेशन तक की जानकारी हासिल कर सकता है।

पैगसस के इस्तेमाल से हैक करने वाले को उस व्यक्ति के फ़ोन से जुड़ी सारी जानकारियां मिल सकती हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद NSO ग्रुप ने अपनी सफाई दी है। कंपनी के मुताबिक, मीडिया रिपोर्ट्स में जो आरोप लगाए गए हैं और जिन मुद्दों की बात की गई है, वह पूरी तरह से गलत है।

हालांकि सरकार ने अपने स्तर पर खास लोगों की निगरानी संबंधी आरोपों को खारिज किया है। सरकार ने कहा,‘‘ इसका कोई ठोस आधार नहीं है या इससे जुड़ी कोई सच्चाई नहीं है।’’ सरकार ने मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा,‘‘भारत एक मजबूत लोकतंत्र है और वह अपने सभी नागरिकों के निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के तौर पर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। 

साथ ही सरकार ने ‘‘जांचकर्ता, अभियोजक और ज्यूरी की भूमिका’’ निभाने के प्रयास संबंधी मीडिया रिपोर्ट को खारिज कर दिया। रिपोर्ट को भारत के न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ के साथ-साथ वाशिंगटन पोस्ट, द गार्डियन और ले मोंडे सहित 16 अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों ने पेरिस के मीडिया गैर-लाभकारी संगठन फॉरबिडन स्टोरीज और राइट्स ग्रुप एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा की गई एक जांच के लिए मीडिया पार्टनर के रूप में प्रकाशित किया है।

यह जांच दुनिया भर से 50,000 से अधिक फोन नंबरों की लीक हुई सूची पर आधारित है और माना जाता है कि इजरायली निगरानी कंपनी एनएसओ ग्रुप के पैगसस सॉफ्टवेयर के माध्यम से संभवतया इनकी हैकिंग की गई है। द वायर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मीडिया जांच परियोजना के हिस्से के रूप में किए गए फोरेंसिक परीक्षणों में 37 फोन को पैगसस जासूसी सॉफ्टवेयर द्वारा निशाना बनाए जाने के स्पष्ट संकेत मिले हैं, जिनमें से 10 भारतीय हैं।

द वायर ने कहा कि इन आंकड़ों में भारत के जो नंबर हैं उनमें 40 से अधिक पत्रकार, तीन प्रमुख विपक्षी हस्तियां, एक संवैधानिक अधिकारी, नरेन्द्र मोदी सरकार के दो मंत्री, सुरक्षा संगठनों के वर्तमान और पूर्व प्रमुख और अधिकारी,एक न्यायाधीश और कई करोबारियों के नंबर शामिल हैं। सरकार ने रिपोर्ट का जवाब देते हुए, मीडिया संगठन को दिए गए अपने जवाब का उल्लेख किया और कहा कि भारत द्वारा व्हाट्सएप पर पैगसस के उपयोग के संबंध में इस प्रकार के दावे अतीत में भी किए गए थे और उन रिपोर्ट का भी कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था और भारतीय उच्च न्यायालय में व्हाट्सएप सहित सभी पक्षों ने इससे इनकार किया था। 

सरकार ने कहा कि एक स्थापित प्रक्रिया है जिसके जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर इलेक्ट्रॉनिक संवाद को केन्द्र या राज्यों की एजेंसियों द्वारा कानूनी रूप से हासिल किया जाता है और यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी कंप्यूटर संसाधन से सूचना को हासिल करना,उसकी निगरानी करना तय कानूनी प्रक्रिया के तहत हो। द वायर के अनुसार लीक आंकडों में बड़े मीडिया संगठनों हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे,नेटवर्क 18, द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस के अनेक जाने माने पत्रकार के नंबर शामिल हैं।

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