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AIUDF ने 3 लोकसभा सीटों पर किया प्रत्याशियों का ऐलान, कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे अजमल!

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Mar 16, 2024 12:31 pm IST, Updated : Mar 16, 2024 12:31 pm IST

असम की जिन 3 लोकसभा सीटों पर AIUDF ने कैंडिडेट उतारे हैं वहां मुसलमानों के वोट निर्णायक साबित होते आए हैं और यही वजह है कि कांग्रेस को इन सीटों पर मुश्किल हो सकती है।

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Image Source : FACEBOOK.COM/MBADRUDDINAJMAL AIUDF नेता बतरुुद्दीन अजमल।

गुवाहाटी: AIUDF ने शुक्रवार को असम की 3 लोकसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल अपने चौथे लोकसभा कार्यकाल के लिए धुबरी सीट से चुनाव लड़ेंगे। अजमल की पार्टी ने दो और लोकसभा सीटों नागांव और करीमगंज में उम्मीदवार उतारे हैं। AIUDF ने करीमगंज से सहाबुल इस्लाम चौधरी और नागांव से अमीनुल इस्लाम को मैदान में उतारा है। इन सीटों पर कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है क्योंकि सूबे की इन 3 लोकसभा सीटों, नागांव, करीमगंज और धुबरी पर मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा है।

‘14 में से कम से कम 13 सीटें जीतेगी बीजेपी’

बीजेपी नेता और मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने कहा है कि नागांव और करीमगंज में भी उनकी पार्टी की अच्छी संभावनाएं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बीजेपी राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से कम से कम 13 सीटें जीतेगी। सीएम सरमा ने धुबरी लोकसभा सीट छोड़ दी है औरर इस सीट पर बीजेपी की सहयोगी असम गण परिषद (AGP) चुनाव लड़ेगी। बता दें कि धुबरी लोकसभा सीट एक ऐसी सीट है जिस पर आजादी के बाद से लेकर अब तक सिर्फ मुस्लिम सांसद ही निर्वाचित हुए हैं। बदरुद्दीन अजमल इस सीट से लगातार तीन बार चुने जा चुके हैं।

2019 में बीजेपी ने असम में जीती थीं 9 सीटें 

नागांव सीट की बात करें तो 2019 के लोकसभा चुनावों में यहां से कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी जबकि 1999 से लेकर 2014 तक यहां से लगातार बीजेपी का सांसद चुना गया था। वहीं, करीमगंज की लोकसभा सीट पर पिछले चुनावों में बीजेपी प्रत्याशी कृपानाथ मल्लाह ने जीत दर्ज की थी जबकि 2014 में AIUDF के राधेश्याम विश्वास को विजय मिली थी। इससे पहले 1998 से लेकर 2009 तक लगातार कांग्रेस ने इस सीट को जीता था। 2019 के लोकसभा चुनावों की बात करें तो बीजेपी ने 14 में से 9 लोकसभा सीटें जीती थी जबकि कांग्रेस के खाते में 3, UIDF के खाते में एक और एक ही सीट निर्दलीय के खाते में गई थी।

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