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कर्नाटक विधान परिषद में सिद्धारमैया सरकार की बड़ी हार! मंदिर विधेयक निरस्त होने पर आया CM का बयान

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Feb 24, 2024 08:14 pm IST, Updated : Feb 24, 2024 08:14 pm IST

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधान परिषद में मंदिर विधेयक पारित न होने पर विपक्ष पर भड़कते हुए कहा कि मंदिरों के पैसे का इस्तेमाल किसी अन्य धर्म के धार्मिक स्थानों के लिए नहीं होना था।

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Image Source : PTI कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया।

हासन:  कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती (संशोधन) विधेयक, 2024 के कर्नाटक विधान परिषद में निरस्त होने को सिद्धारमैया सरकार के लिए बड़ी हार माना जा रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने विधान परिषद में हिंदू मंदिरों पर टैक्स लगाने वाले इस बिल के पारित नहीं होने के लिए शनिवार को विपक्ष, खासकर BJP को जिम्मेदार ठहराया। मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर बिल के बारे में लोगों के बीच 'झूठी सूचना' फैलाने का आरोप लगाया। बता दें कि इस सप्ताह की शुरुआत में विधानसभा में पारित यह बिल शुक्रवार को विधान परिषद में पारित नहीं हो सका।

विपक्ष पर बुरी तरह भड़क उठे सिद्धारमैया

बता दें कि कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के पास बहुमत है। सिद्धरमैया ने बिल के पारित न होने पर विपक्ष पर बरसते हुए कहा, 'इसमें कुछ भी नहीं था, उन्होंने (BJP के नेतृत्व वाले विपक्ष) जानबूझकर ऐसा किया। वे गलत सूचनाएं फैला रहे हैं। इस विधेयक में संपन्न हिंदू मंदिरों से पैसे का एक हिस्सा लेकर उन हिंदू मंदिरों को देने का प्रावधान था, जिनके पास कम दान या चंदा आता है या फिर बिल्कुल दान नहीं आता। इसका इस्तेमाल किसी अन्य धार्मिक स्थानों के लिए नहीं किया जाता।'

जानें, क्या था कांग्रेस सरकार के इस बिल में

सीएम ने कहा, 'अगर हम इस मकसद से विधेयक लाते हैं, तो विपक्ष इसे परिषद में गिरा देता है क्योंकि उनके पास वहां बहुमत है।' बीजेपी नेताओं द्वारा कांग्रेस सरकार पर हिंदुओं का पैसा लूटने का प्लान बनाने का आरोप लगाये जाने के सवाल पर सिद्धारमैया ने कहा, 'वे लूट रहे थे इसलिए जनता ने पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया।' बता दें कि बिल में उन मंदिरों से 5 फीसदी टैक्स वसूलने का प्रस्ताव था जिनकी आय 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये के बीच है, जबकि जिन मंदिरों की आय एक करोड़ रुपये से ज्यादा है उनसे 10 फीसदी टैक्स लेने का प्रावधान था। (भाषा)

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