जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के प्रत्येक परिवार के लिए एक विशिष्ट पारिवारिक पहचान पत्र (फैमिली आईडी) शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी को सुव्यवस्थित करना, लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच बढ़ाना और सरकारी विभागों में योजना व निगरानी के लिए एक विश्वसनीय डेटा स्रोत तैयार करना है।
मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने शनिवार को सिविल सचिवालय, श्रीनगर में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें इस योजना की आधारशिला रखी गई। बैठक में वित्त, सूचना प्रौद्योगिकी, योजना, विकास और निगरानी विभागों के प्रमुख सचिवों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। डुल्लू ने बताया कि फैमिली आईडी से सरकारी योजनाओं की सही जानकारी लोगों तक पहुंचेगी और यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को उनका हक मिले। यह कदम प्रशासन को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस योजना को लागू करने के लिए एक समर्पित तकनीकी टीम बनाई जाएगी, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आईटी सचिव पीयूष सिंगला ने बताया कि उनके विभाग के पास इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सफल बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध है। डेटा अपडेशन और संशोधन के लिए भविष्य में प्रावधान भी किए जाएंगे ताकि परिवारों की जानकारी को नियमित रूप से अद्यतन किया जा सके।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कई सरकारी विभागों द्वारा बार-बार एक ही दस्तावेजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया की मांग नागरिकों पर बोझ डालती है। फैमिली आईडी इस समस्या का समाधान करेगा, क्योंकि यह सूचना का एकमात्र और आधिकारिक स्रोत होगा। इससे न केवल प्रक्रियाएं सरल होंगी, बल्कि सरकारी संसाधनों का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा। हालांकि, इस योजना को लेकर विपक्षी दलों ने कुछ चिंताएं जताई हैं। कुछ नेताओं ने इसे कश्मीरियों पर निगरानी का एक उपकरण बताते हुए आलोचना की है। उनका कहना है कि यह गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है। सरकार ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल सेवाओं को बेहतर बनाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
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