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शादी के बाद पहली होली ससुराल में क्यों नहीं मनाती हैं लड़कियां? जान लें इसके पीछे की वजह

Written By: Ritu Raj Published : Feb 26, 2026 12:51 pm IST, Updated : Feb 26, 2026 12:51 pm IST

होली का त्योहार नजदीक है। 4 मार्च को होली मनाई जाएगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शादी के बाद लड़कियां पहली होली ससुराल में क्यों नहीं मनाती हैं। चलिए जानते हैं इसके पीछे की वजह।

शादी के बाद पहली होली ससुराल में क्यों नहीं मनाती हैं लड़कियां- India TV Hindi
Image Source : PINTEREST/FREEPIK शादी के बाद पहली होली ससुराल में क्यों नहीं मनाती हैं लड़कियां

हिंदू धर्म में कई त्योहारों को बड़े धूम धाम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है। होली भी इन्हीं त्योहारों में से एक है। हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले त्योहार सिर्फ पर्व नहीं बल्कि परंपरा का भी संगम हैं। होली का त्योहार रंगों और परंपराओं का त्योहार है। होली का त्योहार नजदीक है। इस साल 4 मार्च को होली मनाई जाएगी। इसकी धूम अभी से बाजारों में देखने को मिल रही है। ये होली कई नए कपल्स की पहली होली होगी। ऐसे में शादी के बाद पहली होली को लेकर जहां कपल्स एक्साइडेट होंगे तो वहीं दूसरी तरफ परंपराओं का भी पालन करना होगा। आपने भारतीय घरों में ये जरूर सुना होगा कि शादी के बाद लड़कियां अपनी पहली होली ससुराल में नहीं मनाती हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि ऐसा क्यों है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि शादी के बाद ससुराल में पहली होने नहीं मनाने की परंपरा क्यों है।  

1. धार्मिक और पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, होली का त्योहार 'होलिका दहन' से जुड़ा है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि शादी के बाद पहली होली पर ससुर और बहू को एक साथ जलती हुई होली नहीं देखनी चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से ससुर के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है या घर में कलह की स्थिति पैदा हो सकती है।

2. 'दो पीढ़ियों' का साथ जलती होली देखना
एक प्रचलित लोक मान्यता यह भी है कि जलती हुई होली को दो पीढ़ियों द्वारा एक साथ देखना शुभ नहीं माना जाता। चूंकि शादी के बाद पहली होली बेहद खास होती है, इसलिए किसी भी संभावित "दोष" से बचने के लिए बहू को उसके मायके भेज दिया जाता है।

3. नए रिश्तों में तालमेल और सम्मान
सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो पुराने समय में शादियां बहुत कम उम्र में होती थीं और लड़कियां एकदम नए माहौल में घबरा जाती थीं। शादी के शुरुआती महीनों में लड़की को अपने परिवार की याद आती है। पहली होली पर मायके जाने से उसे अपने पुराने परिवेश में खुशी मनाने का मौका मिलता है। ससुराल में नए रिश्तों के बीच रंगों के त्योहार पर होने वाली हंसी-मजाक में बहू असहज महसूस कर सकती है। मायके में वह खुलकर त्योहार का आनंद ले पाती है।

4. संतान के लिए शुभ संकेत
कुछ क्षेत्रों में यह भी माना जाता है कि यदि नवविवाहिता अपनी पहली होली मायके में मनाती है, तो आने वाली संतान स्वस्थ और भाग्यशाली होती है। यह परंपरा वंश वृद्धि और सौभाग्य से जोड़कर देखी जाती है।

क्या आज भी यह अनिवार्य है?
आज के समय में कई परिवार इन परंपराओं को अपनी सुविधा और इच्छा के अनुसार बदलते जा रहे हैं। कई लोग अब साथ मिलकर त्योहार मनाना पसंद करते हैं, जबकि कई लोग परंपरा का मान रखने के लिए आज भी इसे निभाते हैं।

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