भले ही आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार आपको कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। इन विचारों को आप नजरअंदाज ही क्यों न कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य हमेशा दूसरों के हित के लिए बात करते थे।
आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में समाज को उच्च बनाने के लिए कई नीतियां लिखी है। इन्हीं में से एक नीति में आचार्य चाणक्य ने ऐसे लोगों के बारे में जिक्र किया है और बताया है कि इन्हें सोते समय कभी नहीं जगाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना आपके जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं।
श्लोक
अहिं नृपं च शार्दूलं वराटं बालकं तथा।
परश्वानं च मूर्खं च सप्तसुप्तान् बोधयेत्॥
आचार्य चाणक्य के अनुसार सांप, राजा, शेर, बर्र (डंक मारने वाले कीड़े), बच्चा, दूसरे का कुत्ता तथा मूर्ख इनको सोए से नहीं जगाना चाहिए।
सांप
चाणक्य नीति कहती है कि सोते हुए सांप के साथ कुछ नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से वह आपको डस सकता है जिससे आपको नुकसान पहुंच सकती हैं। यहां तक की आपकी मौत तक हो सकती हैं।
राजा
कभी भी राजा, बड़े अधिकारी आदि को जगाने से पहले एक बार जरूर सोच लें, क्योंकि ऐसा करने से उन्हें गुस्सा आ सकता है।
शेर
आचार्य चाणक्य के अनुसार सोते हुए शेर को भी कभी नहीं जगाना चाहिए। अगर आप उन्हें जगाते हैं तो वह आपके ऊपर झपट सकता है जिससे आपकी मौत हो सकती है।
बर्र
किसी भी डंक मारने वाले कीड़े को नहीं जगाना चाहिए। ऐसा करने से वह आपको डंक मार सकता है।
बच्चा
कभी भी सोए हुए बच्चों को नहीं जगाना चाहिए। ऐसा करने से आधी नींद में उठा बच्चा रोना शुरू कर देता है जिसके बाद उसे संभालना बेहद मुश्किल हो जाता है।
दूसरे का कुत्ता
आचार्य चाणक्य के अनुसार कभी भी दूसरे के कुत्ते को नहीं जगाना चाहिए। ऐसा करने से वह आपके ऊपर हमला कर सकता है।
मूर्ख
चाणक्य जी कहते हैं कि मुर्ख व्यक्ति को भी नहीं जगाना चाहिए। इससे आपकी परेशानी बढ़ सकती हैं। ऐसा करने से वह आपका समय के साथ बुद्धि भी खराब कर सकता है।
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