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महाराष्ट्र में अवैध बांग्लादेशी और घुसपैठियों की खैर नहीं ! नकेल कसने के लिए फडणवीस सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

 Reported By: Dinesh Mourya Written By: Shaswat Gupta
 Published : Nov 27, 2025 06:38 pm IST,  Updated : Nov 27, 2025 09:06 pm IST

मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या शरणार्थियों की घुसपैठ एक गंभीर समस्या बन चुकी है। ये लोग मुख्य रूप से निर्माण स्थलों, झुग्गी-झोपड़ियों और अनौपचारिक क्षेत्रों में रहते हैं।

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महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस। Image Source : PTI

अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की जांच भारत में एक संवेदनशील और चल रहा मुद्दा है। अलग-अलग राज्यों में इसे लेकर सरकारें कड़े कदम उठा रही हैं। इसी कड़ी में अब महाराष्ट्र का नाम चर्चा में आ गया है। दरअसल, महाराष्ट्र में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों पर नकेल कसने के लिए फडणवीस सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार की ओर से जाली दस्तावेज के आधार पर बनाए गए फर्जी जन्म-मृत्यु सर्टीफिकेट को तत्काल रद्द करने के आदेश दिए गए हैं।  

जांच में सामने आई थी सच्चाई 

अभी कुछ समय पहले पुलिस ने महाराष्ट्र में सघन चेकिंग अभियान चलाया था। इसमें पता चला था कि, कुछ जिलों में गैरकानूनी रुप से रह रहे कई बांग्लादेशी नागरिकों ने स्थानीय नगरपालिका और ग्रामपंचायत से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए हैं। अवैध तरीके से और नकली दस्तावेजों के आधार पर जन्म–मृत्यु प्रमाणपत्रों बनाने वाले रैकेट पर कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए गए। किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र के कई महानगरपालिका द्वारा जारी किए गए ऐसे फर्जी सर्टीफिकेट रैकेट की शिकायत की थी। इस शिकायत की जांच में तथ्य पाए जाने के बाद सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया। 

महाराष्ट्र में अवैध घुसपैठियों की समस्या

बता दें कि, मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या शरणार्थियों की घुसपैठ एक गंभीर समस्या बन चुकी है। ये लोग मुख्य रूप से निर्माण स्थलों, झुग्गी-झोपड़ियों और अनौपचारिक क्षेत्रों में रहते हैं, जहां वे कम मजदूरी वाले काम करते हैं। यह समस्या न केवल स्थानीय रोजगार और संसाधनों पर बोझ डालती है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करती है। हाल के वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की सख्ती से डिपोर्टेशन बढ़ा है और इस समस्या के समूल नाश के लिए तेजी से काम हो रहा है।  

ये शहर रडार पर

अवैध जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों में राज्य के कई शहर और तहसीलें हॉटस्पॉट के रूप में सामने आएं हैं। अमरावती, सिल्लोड, अकोला, संभाजीनगर शहर, लातूर, अंजनगाँव सुर्जी, अचलपुर, पुसद, परभणी, बीड, गेवराई, जालना, अर्धापुर और परली—इन 14 स्थानों पर संदिग्ध मामलों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। इसके बाद संबंधित तहसीलदारों और जिलाधिकारियों को सभी मामलों की गंभीरता से जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

किस बुनियाद पर रद्द होंगे प्रमाणपत्र ? 

  • केवल आधार कार्ड के आधार पर जारी हुए जन्म प्रमाणपत्र अब रद्द किए जाएंगे।
  • जन्मतिथि में किसी भी प्रकार की विसंगति मिलने पर सीधे पुलिस में शिकायत दर्ज की जाएगी।
  • फर्जी प्रमाणपत्र लेकर फरार होने वाले लाभार्थियों को ‘फरार आरोपी’ घोषित किया जाएगा।
  • संभाजीनगर, अमरावती, लातूर सहित 14 स्थानों पर विशेष जांच अभियान शुरू किया गया है।

इसलिए बढ़ाई गई जांच   


सामान्यत: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होती है। लेकिन एक वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद ये प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार राजस्व विभाग के पास आ जाता है, जहां तहसीलदार और वरिष्ठ अधिकारी इन्हें प्रमाणित करते हैं। हालांकि विभिन्न स्थानों पर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर बड़े पैमाने पर हेरफेर और अनियमितताएं सामने आईं। इसी के बाद सरकार ने पुराने प्रमाणपत्रों की पुन: जांच और संदिग्ध प्रमाणपत्रों को रद्द करने का निर्णय लिया है।

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