कल्याण : महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए, लेकिन कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम (केडीएमसी) के नतीजों ने सबसे ज्यादा राजनीतिक उथल-पुथल मचाई है। चुनाव के बाद के नाटकीय घटनाक्रमों में तो इसने बीएमसी को भी पीछे छोड़ दिया है। केडीएमसी में असली मुकाबला सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच नहीं, बल्कि सत्ताधारी तंत्र के भीतर ही था। कल्याण सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उसके सहयोगी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के नेतृत्व वाले दल के बीच।
उद्धव ठाकरे गुट चार के नगरसेवक गायब
महाराष्ट्र के कल्याण डोंबिवली में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के नवनिर्वाचित नगरसेवकों के अचानक नॉट-रिचेबल होने से खलबली मच गई है। इस मामले को गंभीर मानते हुए कोळसेवाड़ी पुलिस थाने में मिसिंग की लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है और विपक्ष ने सत्ताधारियों पर संदेह जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव में ठाकरे गुट के कुल 11 नगरसेवक निर्वाचित हुए हैं, जिनमें से चार नगरसेवक फिलहाल संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं, इनमें से नगरसेवक मधुर उमेश म्हात्रे और कीर्ति राजन ढोणे बीते 16 जनवरी से नॉट-रिचेबल हैं। इस संबंध में कल्याण पूर्व जिला प्रमुख शरद पाटील के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों ने कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में नगरसेवकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है और अपहरण, दबाव या फुसलाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।
सियासत चरम पर, की गई अपील
ठाकरे गुट की ओर से मांग की गई है कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स सहित तकनीकी जांच कर तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू करे, ताकि लापता नगरसेवकों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। इस दौरान शरद पाटील ने नॉट-रिचेबल नगरसेवकों से अपील करते हुए कहा कि, अगर आप सुरक्षित हैं तो जहां भी हों, वहां से मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट करें। इस घटनाक्रम के बाद कल्याण-डोंबिवली की राजनीति में एक बार फिर राजनीति गरमाने की संभावना हैं और पूरे मामले पर सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हुई हैं।
(कल्याण से सुनील शर्मा की रिपोर्ट)