एयरलाइन उद्योग में निर्धारित संख्या से अधिक सीटों की बुकिंग की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। विमान की सीटें समय के हिसाब से संवेदनशील होती हैं। एक बार फ्लाइट के रवाना होने के बाद खाली सीटें बेकार हो जाती हैं। इस प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उड़ान के दौरान सभी सीटें भरी हुई हों। हालांकि, इसमें यह संभावना बनती है कि कई बार वैध टिकट होने के बावजूद यात्री को यात्रा से वंचित कर दिया जाए।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नागर विमानन मंत्रालय एयरलाइंस द्वारा टिकटों की ओवरबुकिंग की व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए काम कर रहा है। हालांकि अभी टिकटों की ओवरबुकिंग के लिए कोई विशेष ढांचा या प्रणाली नहीं है। यह भी पढ़ें : मार्च 2018 से म्यूचुअल फंड और बीमा बेचना शुरू करेगा डाक भुगतान बैंक, हर जिले में होगा पूर्ण परिचालन
अधिकारी ने कहा कि इस बारे में कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। इनमें एक ऐसी व्यवस्था पर विचार हो रहा है जिसमें यात्रा के लिए नहीं आने वाले यात्री का टिकट किसी अन्य यात्री को दिया जा सकेगा। मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के अधिकारियों के अधिकारियों के बीच इस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए शुरुआती विचार-विमर्श चल रहा है।