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फ्लाइट में फ्री सीट का फैसला बना विवाद! Air India, IndiGo और SpiceJet ने सरकार के फैसले का किया विरोध

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 21, 2026 12:21 pm IST,  Updated : Mar 21, 2026 12:57 pm IST

हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सरकार का एक फैसला अब बड़ा विवाद बन गया है। सरकार ने एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटों का चयन मुफ्त किया जाए। पहली नजर में यह फैसला यात्रियों के लिए राहत भरा लगता है, एयरलाइंस कंपनियों ने इसका कड़ा विरोध किया है।

फ्लाइट में 60% फ्री सीट...- India TV Hindi
फ्लाइट में 60% फ्री सीट चयन के फैसले पर मचा बवाल Image Source : PTI

हवाई यात्रा करने वालों के लिए राहत की खबर मानी जा रही सरकार की नई पहल अब विवाद का कारण बन गई है। सरकार ने एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि फ्लाइट में कम से कम 60% सीटों का चयन मुफ्त किया जाए। लेकिन इस फैसले के खिलाफ अब देश की बड़ी एयरलाइंस एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट एकजुट हो गई हैं। उनका कहना है कि इससे टिकट महंगे हो सकते हैं और यात्रियों पर उल्टा बोझ बढ़ेगा।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने DGCA को निर्देश दिया है कि हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटों का चयन यात्रियों के लिए फ्री किया जाए। इसका उद्देश्य यात्रियों को राहत देना और सीट चयन पर लगने वाले भारी शुल्क को कम करना है। अभी एयरलाइंस सीट चुनने के लिए ₹200 से ₹2,100 तक वसूलती हैं।

एयरलाइंस क्यों कर रही हैं विरोध?

पीटीआई के मुताबिक, एयरलाइंस का कहना है कि सीट सिलेक्शन फीस उनकी कमाई का अहम हिस्सा है। यह पैसा उन्हें बढ़ते खर्च जैसे ईंधन, मेंटेनेंस और एयरपोर्ट चार्ज को संभालने में मदद करता है। अगर यह आय खत्म होती है, तो कंपनियां इसकी भरपाई टिकट के दाम बढ़ाकर करेंगी।

टिकट महंगे होने का खतरा

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) का कहना है कि अगर यह नियम लागू होता है, तो सभी यात्रियों को महंगे टिकट का सामना करना पड़ेगा। यानी फ्री सीट का फायदा सीमित होगा, लेकिन नुकसान सभी को उठाना पड़ेगा। एयरलाइंस पहले से ही कम मुनाफे में काम कर रही हैं। बढ़ती ईंधन कीमतें और ऑपरेशन खर्च उनके लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में यह फैसला उनकी वित्तीय स्थिति को और कमजोर कर सकता है।

सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग

FIA ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के बड़े फैसले से पहले सभी पक्षों से चर्चा होनी चाहिए थी। आपको बता दें कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण जेट फ्यूल की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जिससे एयरलाइंस पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ रहा है। ऐसे में नए नियम उनके लिए और मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

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