MCX पर चांदी के वायदा भाव में पिछले हफ्ते 5532 रुपये यानी 2.2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली थी, जबकि सोने की कीमतों में 444 रुपये यानी 0.3 प्रतिशत की मामूली तेजी दर्ज की गई थी।
सोना और चांदी में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर है। बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच मार्केट रेगुलेटर SEBI ने गोल्ड और सिल्वर ETF के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। 13 फरवरी 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में सेबी ने ETF के बेस प्राइस और प्राइस बैंड की समीक्षा का संकेत दिया है।
2025 में शानदार रिटर्न देने और जनवरी 2026 में MCX पर ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद गोल्ड में तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है। बीते सप्ताह MCX पर सोना ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 13.5% नीचे है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में, पिछले सत्र की बिकवाली के बाद एक बार फिर सोने और चांदी में तेज उछाल आया। हाजिर चांदी 2.1% बढ़कर 77.27 डॉलर प्रति औंस हो गया, जो एक दिन पहले ही 11% की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
कीमती धातुओं के बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त उछाल देखने को मिला। MCX पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना करीब ₹2,000 यानी 1.30% की तेजी के साथ ₹1,54,837 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मार्च वायदा चांदी ₹6,600 से ज्यादा उछलकर ₹2,43,081 प्रति किलो पर कारोबार करती दिखी।
जनवरी से लेकर अब तक सोने और चांदी के भाव ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं। चांदी तो 4 लाख रुपये के लेवल को भी पार कर गई थी। आने वाले दिनों में सोने के भाव अमेरिकी आंकड़ों पर भी निर्भर रह सकते हैं।
लगातार उतार-चढ़ाव के बीच आज सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं के दाम फिसल गए, जिससे निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों की नजरें बाजार पर टिक गई हैं।
सोने और चांदी के भाव में बीते दो महीने में भारी उठापटक देखा गया है। चांदी तो 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार चली गई। जानकारों के मुताबिक, दोनों धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है।
सोने ने मंगलवार को लगातार दूसरे सत्र में बढ़त बनाई, जो आभूषण निर्माताओं और निवेशकों की लगातार खरीदारी के चलते संभव हुआ। इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट सिल्वर 1.13 अमेरिकी डॉलर या 1.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82.16 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
गोल्ड ईटीएफ में निवेश का आंकड़ा पहली बार इक्विटी म्यूचुअल फंड्स को पीछे छोड़ दिया। जनवरी में सोने की कीमतें ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के टॉप लेवल तक चली गई थीं।
MCX और COMEX पर सोने और चांदी में होने वाला कारोबार सीधे तौर पर सर्राफा बाजार की कीमतों पर असर डालता है। हालांकि, MCX, COMEX और सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में अलग-अलग वजहों से थोड़ा कम-ज्यादा हो सकता है।
MCX पर मंगलवार को शुरुआती आधे घंटे के कारोबार में चांदी की कीमतें 2,65,126 रुपये प्रति किलोग्राम के इंट्राडे लो से लेकर 2,68,498 रुपये प्रति किलोग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंच चुकी थीं।
चीन से आए वीकेंड के आंकड़ों से सोने-चांदी में निवेशकों की भावना मजबूत हुई है। आंकड़े बताते हैं कि पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने ऊंची कीमतों के बावजूद जनवरी में लगातार 15वें महीने सोने की खरीदारी जारी रखी।
भारतीय सर्राफा बाजार में हफ्ते की शुरुआत में ही सोना और चांदी के भाव में तेजी का रुझान देखने को मिला है, जिससे निवेशकों और जेवरात खरीदारों दोनों की नजरें बाजार पर टिकी हुई हैं। MCX पर 24 कैरेट सोने का भाव 2200 रुपये प्रति 10 ग्राम तक बढ़ गया। जानें आज क्या है चांदी का भाव।
दिल्ली के सर्राफा बाजार में 29 जनवरी, 2026 को चांदी की कीमत 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी,जबकि सोना भी उस दिन 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।
अप्रैल की डिलीवरी वाले सोने की कीमत गुरुवार को 2310 रुपये यानी 1.51 प्रतिशत गिरकर 1,50,736 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई।
लगातार दो दिनों की तेजी के बाद अब सोना–चांदी की चमक अचानक फीकी पड़ गई है। कीमती धातुओं में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों दोनों को चौंका दिया है। चांदी एक झटके में 24 हजार रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई, जबकि सोने की कीमत में भी 1800 रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
दुनिया में डिमांड, करेंसी में उतार-चढ़ाव और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल, ये तीन ऐसी ताकतें हैं जिन्होंने चांदी को सोने के साथ एक दिलचस्प इन्वेस्टमेंट बनाने के लिए मजबूर किया है।
अगर आप स्थिरता चाहते हैं तो गोल्ड ETF में निवेश कर सकते हैं। अगर आप हाई रिटर्न और रिस्क ले सकते हैं तो सिल्वर ETF में पैसा लगा सकते हैं। सलाह है कि कुल पोर्टफोलियो का 5–10% इनमें रखें, और SIP/लंपसम के जरिए निवेश करें।
पिछले सत्रों की गिरावट के बाद यह रिकवरी वैश्विक अनिश्चितताओं (जैसे जियोपॉलिटिकल टेंशन और डॉलर की कमजोरी) से जुड़ी हुई है। निवेशकों को सलाह है कि वे अल्पकालिक मूवमेंट्स के साथ-साथ मैक्रो फैक्टर्स पर भी नजर रखें, क्योंकि कीमती धातुएं अभी भी अस्थिरता के दौर से गुजर रही हैं।
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