ये सुविधा आने वाले महीनों में शुरू होने की संभावना है। इस सहयोग से देश भर में मौजूद 60,000 से ज्यादा आधार केंद्रों तक लोगों की आसान पहुंच सुनिश्चित होगी।
भुवनेश कुमार ने बताया कि रजिस्टर्ड संस्थाओं को नई टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे क्यूआर कोड स्कैन करके या आधार के नए ऐप के माध्यम से वैरिफिकेशन कर सकेंगे।
ऑफलाइन वैरिफिकेशन करने वाली संस्थाओं को एपीआई उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके जरिए वे अपने सिस्टम को आधार वैरिफिकेशन के लिए अपडेट कर सकेंगी।
UIDAI का कहना है कि किसी मृत व्यक्ति का आधार सक्रिय रहने पर पहचान की चोरी, धोखाधड़ी या सरकारी लाभों की अवैध प्राप्ति जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
नए ऐप का उद्देश्य आधार होल्डरों के लिए ऑफलाइन डिजिटल वैरिफिकेशन को प्रोत्साहित करना और आधार कार्ड की फोटोकॉपी के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना है।
भुवनेश कुमार ने कहा कि किसी व्यक्ति की गोपनीयता बनाए रखते हुए आधार का इस्तेमाल करके उम्र सत्यापन प्रक्रिया को बढ़ाया जा सके।
बच्चों के लिए आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट की सभी फीस माफ करने के साथ ही, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) MBU को अपनाने को प्रोत्साहन देने के लिए व्यवहारिक अंतर्दृष्टि का भी इस्तेमाल करेगा।
UIDAI ने आधार सेवाओं के लिए नई फीस का ब्योरा जारी कर दिया है। डेमोग्राफिक डिटेल्स में बदलाव के लिए 75 रुपये की फीस लगेगी, जबकि बायोमेट्रिक अपडेट के लिए 125 रुपये की फीस लगेगी।
यह नई प्रणाली उपकरणों के ईकोसिस्टम को पूरी तरह बदल देगी। वर्तमान में, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए विशिष्ट उपकरणों की जरूरत होती है। लेकिन, फेस ऑथेन्टिकेशन के साथ, यह सीमा खत्म हो जाएगी।
e-Aadhaar ऐप पर कई तरह के काम हो रहे हैं और इसे लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।
यूआई़डीएआई अब एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिसके जरिए माता-पिता की सहमति के साथ बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट स्कूल परिसर में ही किया जाएगा। तय समय में अगर यह अपडेट नहीं किया गया, तो आधार नंबर निष्क्रिय भी किया जा सकता है।
यूआईडीएआई ने कहा, ‘‘परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु की सूचना पर, मृतक के परिवार के किसी भी सदस्य को स्वयं को प्रमाणित करने के बाद, पोर्टल पर मृतक व्यक्ति का आधार नंबर और मृत्यु पंजीकरण संख्या के साथ जनसंख्या संबंधी अन्य विवरण देना आवश्यक है।’’
बयान के मुताबिक, ‘‘बच्चों के बायोमेट्रिक डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए MBU का समय पर पूरा होना एक आवश्यक शर्त है। अगर 7 साल की उम्र के बाद भी एमबीयू को पूरा नहीं किया जाता है, तो मौजूदा नियमों के अनुरूप आधार संख्या निष्क्रिय हो सकती है।’’
UIDAI ने आधार में होने वाले 4 प्रमुख प्रमाण- पहचान, घर का पता, जन्म तिथि का प्रमाण और रिश्ते के प्रमाण के लिए अलग-अलग डॉक्यूमेंट्स तय किए हैं।
अगर आपने किसी वजह से अपना रजिस्टर्ड नंबर खो दिया है या अपना फोन नंबर बदल लिया है, तो आप उसे ऑनलाइन भी अपडेट कर सकते हैं।
आधार के नए मोबाइल ऐप की मदद से आप आधार की हार्ड कॉपी दिए बिना ही एयरपोर्ट, होटल और बाकी जगहों पर अपने आधार डेटा को बेहद सुरक्षित तरीके से शेयर करने के लिए फेशियल ऑथेंटिफिकेशन की सुविधा होगी।
वयस्कों से अलग, बच्चों को कार्ड जारी करने के लिए किसी बायोमेट्रिक डेटा की आवश्यकता नहीं होती है। इसके बजाय, यूआईडी को जनसांख्यिकीय जानकारी और उनके माता-पिता के यूआईडी से जुड़े चेहरे की तस्वीर के आधार पर इसे जारी किया जाता है।
आधार, सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली डिजिटल पहचान के रूप में, कई सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लाभ उठाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
Aadhaar Card: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की ओर से चार तरह के आधार जारी किए जाते हैं। इसमें आधार लेटर, ई-आधार, एमआधार ऐप और पीवीसी आधार ऐप शामिल है।
UIDAI ने इसे हर जगह कैरी करने में आसान बनाने के लिए पीवीसी कार्ड वाला आधार कार्ड लॉन्च किया है। इसे कोई भी आधार कार्ड धारी 50 रुपये के शुल्क में बनवा सकता है।
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