Chhath Puja Vidhi, Shubh Muhurt Live: छठ पर्व के दौरान छठी माता और सूर्य देव की पूजा की जाती है। भक्ति, संयम और पवित्रता इस महापर्व के मुख्य अंग हैं। साल 2025 में छठ का पर्व 25 अक्टूबर से शुरू हुआ था और 28 अक्टूबर तक यह पर्व मनाया जाएगा। चार दिवसीय छठ पर्व के दौरान भक्तों को किस विधि से पूजा करनी चाहिए, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब रहेगा इन सवालों का जवाब आपको हमारे इस लेख में मिलेगा। साथ ही हम आपको बताएंगे कि इस पर्व के दौरान आपको किन मंत्रों का जप करना चाहिए और भोग के रूप में क्या चीजें आपको अर्पित करनी चाहिए।
छठ पूजा विधि (Chhath Puja Vidhi)
सूर्य अर्घ्य का शुभ मुहूर्त
आज छठ पूजा संध्या अर्घ्य समय 27 अक्टूबर 2025 की शाम 5 बजकर 10 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 48 मिनट तक रहने वाला है।
धर्मशास्त्रों में बताया गया है 36 घंटे का निर्जला व्रत अगर टूट जाए तो क्या करें? ऐसी स्थिति में प्रायश्चित का तरीका अपनाना चाहिए। सबसे पहले स्नान करें, शांत मन से छठी मैया के सामने दीप जलाएं और क्षमा प्रार्थना करें। इसके बात मन में कहें, "हे छठी मैया, मुझसे अनजाने में गलती हुई है, कृपा करें और मुझे क्षमा करें।" इसके बाद किसी पंडित या बुजुर्ग से सलाह लेकर दान करना भी शुभ माना गया है।
कहते हैं जब पांडव अपना राजपाट हार गए थे, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था। वह सूर्य देव की उपासना करके अपने पति और परिवार की समृद्धि और पुनः राजपाट प्राप्त करने के लिए व्रत करने लगीं। उनकी भक्ति और तपस्या के परिणामस्वरूप पांडवों को खोया हुआ राजपाट और सुख-समृद्धि प्राप्त हुई।
छठ पूजा के तीसरे दिन सूर्य को अर्घ्य देने का समय शाम 05:48 बजे का है।
छठ के तीसरे दिन व्रतधारी डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह पूजा शाम के समय घाट या नदी में की जाती है। इस दिन व्रतधारी व्रत रखकर संध्या समय सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं। पूजा के लिए बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना, और अन्य सामग्री रखी जाती है। परिवार और समाज के लोग एक साथ घाट पर जाकर सूर्य को नमन करते हैं।
बिहार के औरंगाबाद में स्थित सूर्य मंदिर अपनी विशेष परंपरा के कारण प्रसिद्ध है। यहां न केवल उगते सूर्य की, बल्कि अस्त होते सूर्य की भी पूजा की जाती है। छठ पर्व के दौरान यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भगवान आदित्य के इस मंदिर में भक्तजन सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय के दौरान सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
छठ महापर्व दिवाली के छह दिन बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि छठी मैया, सूर्यदेव की बहन हैं और नवजात शिशुओं की रक्षा करती हैं। मार्कण्डेय पुराण में छठी देवी को प्रकृति का छठा अंश बताया गया है। छठ पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं, जिनमें राजा प्रियंवद और द्रौपदी की कथा प्रमुख है। इन कथाओं से प्रेरित होकर आज भी लाखों श्रद्धालु छठ का व्रत करते हैं।
छठ पर्व के तीसरे दिन सूर्यास्त के दौरान अर्घ्य देने के साथ सूर्यदेव की पत्नी प्रत्यूषा की भी पूजा की जाती है। देवी प्रत्यूषा का संबंध 'सांध्यकाल' से है, जब दिन समाप्त होकर रात्रि का आगमन होता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, प्रत्यूषा सूर्य की दूसरी पत्नी हैं और उनका नाम 'प्रत्यूष' से लिया गया है, जिसका अर्थ 'संध्य' या 'सूर्यास्त का समय' होता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जब सूर्य अपनी पत्नी संज्ञा से अलग हुए, तो उनका विस्तार प्रत्यूषा और छाया के रूप में हुआ। इस तह प्रत्यूषा और छाया दोनों ही संज्ञा के दो अलग-अलग रूप माने गए। कहते हैं कि सूर्य अस्त होने पर प्रत्युषा का प्रभाव बढ़ता है। इस समय की गई पूजा सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करती है।
छठ पूजा महापर्व के पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन उपवास, तीसरे दिन निर्जला उपवास और चौथे दिन पारण होता है। यह 36 घंटे का कठिन व्रत मन, शरीर और आत्मा को तपाकर शुद्ध करता है। लेकिन अगर किसी मजबूरी की वजह से व्रत अधूरा रह जाए, तो ऐसी स्थिति में प्रायश्चित का तरीका अपनाना चाहिए। सबसे पहले स्नान करें, शांत मन से छठी मैया के सामने दीप जलाएं और क्षमा प्रार्थना करें। कहें, "हे छठी मैया, मुझसे अनजाने में गलती हुई है, कृपा करें और मुझे क्षमा करें।" इसके बाद किसी पंडित या बुजुर्ग से सलाह लेकर दान करना भी शुभ माना गया है।
छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन दर्शन से जुड़ा प्रतीक है। डूबता सूर्य यह दर्शाता है कि हर कठिनाई या अंधकार का अंत होता है और नया सवेरा जरूर आता है। डूबते सूरज को प्रणाम करना हमें इस समय की अहमियत समझाता है। इस अर्घ्य के माध्यम से व्रती अपनी नकारात्मकता को समाप्त कर नवजीवन की शुरुआत का संकल्प लेते हैं।
छठी माता को भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय की पन्नी हैं। इसलिए इनका संबंध भगवान शिव से भी है और ऐसे में छठ पर्व के दौरान शिव जी की पूजा करने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
अर्घ्य से पहले कुछ भी ग्रहण न करें
प्रसाद को झूठा न करें
साफ-सफाई का रखें पूरा ध्यान
तामसिक भोजन से करें परहेज
अर्घ्य का समय न करें नजरअंदाज
छठी मईया को भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री माना जाता है। साथ ही ये सूर्य देव की बहन भी हैं। इन्हें षष्ठी देवी के नाम से भी जाना जाता है। छठी मईया की पूजा करने से पारिवार सुख की प्राप्ति होती है। संतान की खुशहाली और जीवन में समृद्धि प्राप्त करने के लिए भी माता की पूजा करना बेहद शुभ होता है।
ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
छठ पूजा का दूसरा दिन आज यानि 26 अक्टूबर को है। इस दिन खरना किया जाएगा। खरना पूजा का शुभ मुहूर्त आज शाम 5 बजकर 41 मिनट से शुरू होगा।
ठेकुआ
डाब नींबू (बड़े आकार का नींबू)
चावल के लड्डू
गुड़ की खीर
नारियल
केला
गन्ना
सुथनी
सिंघाड़ा
मंत्र- ॐ ह्रीं षष्ठीदेव्यै स्वाहा
ध्यान मंत्र-
षष्ठांशां प्रकृते: शुद्धां सुप्रतिष्ठाण्च सुव्रताम्।
सुपुत्रदां च शुभदां दयारूपां जगत्प्रसूम्।।
श्वेतचम्पकवर्णाभां रत्नभूषणभूषिताम्।
पवित्ररुपां परमां देवसेनां परां भजे।।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।।
ॐ सूर्याय नम:।।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा ।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।।
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।।
जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।। जय ।।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदिति होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए ।। जय ।।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ।। जय ।।
अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडरराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।। जय ।।
ऊ जे सुहनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए ।। जय ।।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।। जय ।।
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।। जय ।।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।। जय ।।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
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