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ध्यानचंद पुरस्कार पर हाईकोर्ट ने खेल मंत्रालय को दिया सुझाव, कहा वेन्नम ज्योति के नाम पर हो विचार

Reported By : Surekha Abburi Edited By : Avinash Rai Published : Jan 29, 2025 12:55 pm IST, Updated : Jan 29, 2025 12:55 pm IST

देश के सर्वश्रेष्ठ खेल पुरस्कार मेजर ध्यानचंद खेल रत्न के लिए तीरंदाज वेन्नम ज्योति सुरेखा के नाम पर विचार करना चाहिए। दरअसल ये निर्देश आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने खेल मंत्रालय को दिया है।

Andhra pradesh High Court gave suggestion to Sports Ministry on Dhyanchand Award said Vennam Jyothi'- India TV Hindi
Image Source : WIKIPEDIA/PTI खेल मंत्री मनसुख मंडाविया और तीरंदाज वेन्नम ज्योति सुरेखा

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने केंद्रीय खेल मंत्रालय को देश के सर्वश्रेष्ठ खेल पुरस्कार मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के लिए विजयवाड़ा की तीरंदाज वेन्नम ज्योति सुरेखा के नाम पर विचार करने का निर्देश दिया है। 2023 में सुरेखा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि उन्हें इस पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया, जबकि उनके पास खेल रत्न पाने के लिए सभी योग्यताएं थीं। लंबी बहस के बाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस निम्मगड्डा वेंकटेश्वरलु ने हाल ही में अंतिम फैसला सुनाया। फैसला हर मंगलवार को उपलब्ध होता है। 

हाईकोर्ट ने दिया सुझाव

इस फैसले में सुझाव दिया गया कि वर्ष 2023 और 2024 के लिए खेल रत्न पुरस्कार के लिए पहले ही चयनित खिलाड़ियों के साथ ज्योति सुरेखा के नाम पर भी विचार किया जाना चाहिए। आदेश में कहा गया है कि चूंकि 2023 में आयोजित पुरस्कारों का चयन इस स्तर पर उचित नहीं होगा, इसलिए सुरेखा के पुराने आवेदन पर विचार किया जाना चाहिए और सुरेखा से नया आवेदन जमा करने के लिए कहे बिना उसका नाम खेल पुरस्कारों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए।

क्या कहती है ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार नीति

पुरस्कार नीति के अनुसार, पदकों के लिए आवंटित अंकों के अनुसार सुरेखा के पास 148 अंक थे, उस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं के पास केवल 58.5 अंक थे और यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया कि सुरेखा के साथ कोई अन्याय न हो। नीति के प्रावधानों के अनुसार पुरस्कार का 80 प्रतिशत भाग पदकों पर आधारित होता है तथा 20 प्रतिशत भाग चयन समिति के विवेक पर निर्भर होता है। हालांकि, केंद्रीय खेल विभाग ने इस विवेकाधिकार का दुरुपयोग न हो इसके लिए दिशानिर्देश तैयार करने का आदेश दिया है। इस मुकदमे में याचिकाकर्ता की ओर से वकील उन्नम मुरलीधर राव और अखिल चौधरी ने बहस की ।

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