इसरो ने इस कम्यूनिकेशन सैटेलाइट को निर्धारित लॉन्चिंग टाइम से करीब डेढ़ मिनट की देरी से लॉन्च किया। अगर 90 सेकेंड की देरी नहीं होती तो इस मिशन में बड़ी बाधा आ सकती थी।
इसरो के मुताबिक 6100 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट एलवीएम-3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी के लो-ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया जाने वाला अब तक सबसे भारी पेलोड होगा।
इसरो ने बताया कि 6,100 किलोग्राम वजनी यह कम्यूनिकेशन सैटेलाइट एलवीएम3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी की निम्न कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया जाने वाला अब तक सबसे भारी सैटेलाइट है।
ISRO ने गगनयान मिशन की तैयारी में बड़ी छलांग लगा दी है। उसने ड्रोग पैराशूट के अहम क्वालिफिकेशन टेस्ट को पूरा कर लिया है। यह सफलता देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन को भरोसेमंद और सुरक्षित बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का ये आयोजन साइंस से जुड़ा है लेकिन मैं सबसे पहले क्रिकेट में भारत की शानदार जीत की बात करूंगा।
ISRO ने भारतीय नौसेना के GSAT 7R (CMS-03) कम्युनिकेशन सैटेलाइट को लॉन्च कर दिया है। यह भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे उन्नत संचार सैटेलाइट होगा। यह सैटेलाइट नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार और समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं को मज़बूत करेगा।
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि लगभग 4,410 किलोग्राम वज़नी यह उपग्रह भारतीय धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में प्रक्षेपित होने वाला सबसे भारी उपग्रह होगा।
ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने घोषणा की कि भारत 2040 तक चांद पर मानव भेजने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ISRO चीफ के मुताबिक, 2027 में 'गगनयान' मिशन की शुरुआत होगी, और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तैयार हो जाएगा।
आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार हर साल 51 छात्रों को विद्यार्थी विज्ञान वारी योजना के तहत नासा भेजने की योजना बना रही है। आइए आपको इस योजना के बारे में विस्तार से बताते हैं।
भारत और अमेरिका ने टैरिफ विवाद के बावजूद चंद्रमा और मंगल मिशन में दोस्ती का नया उदाहरण पेश किया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों ने अंतरिक्ष में साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम उठाया है।
ISRO के सेमीकंडक्टर लैब में बनाया गया विक्रम चिप का पूरा निर्माण भारत में ही हुआ है। ये चिप स्पेस लॉन्च व्हीकल्स की एक्सट्रीम कंडीशन्स में इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह से योग्य है।
चंद्रयान-5 मिशन में एक अधिक परिष्कृत लैंडर और रोवर भेजा जा सकता है, जो पहले से ज्यादा उन्नत उपकरणों से लैस होंगे और चंद्रमा पर अधिक समय तक कार्य करने में सक्षम होंगे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रयान-5 को एक सैंपल रिटर्न मिशन के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में चल रहा सहयोग न केवल दोनों देशों की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ा रहा है, बल्कि भविष्य में मानवता के लिए नए आयाम खोलने की दिशा में भी एक मजबूत कदम है। अब दोनों देश मिलकर अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई सफलताओं और उपलब्धियों की ओर बढ़ रहे हैं।
देश में आज राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जा रहा है। इस बार दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जा रहा है। आइये जानते हैं कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस क्यों मनाते हैं और इसे मनाने का उद्देश्य क्या है?
इसरो दिन प्रतिदिन सफलता की नई कहानी लिख रहा है। साल 1975 के आर्यभट्ट के प्रक्षेपण से लेकर 2023 के आदित्य एल वन के प्रक्षेपण तक इसरो ने कामयाबी के कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। जानिए इसरो के आर्यभट्ट से लेकर आगामी मिशन गगनयान तक का सफर...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल स्पेस डे के अवसर वैज्ञानिकों को बधाई दी है और कहा है कि भारत जल्द ही गगनयान की उड़ान भरेगा।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को लेकर ISRO की टीम दिन रात लगी हुई है। हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) मॉड्यूल के एक मॉडल का अनावरण किया गया है। इससे इस प्रोजेक्ट में और तेजी आएगी।
ISRO की रॉकेट लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा और बालासोर से इसलिए होती है क्योंकि ये स्थान भूमध्य रेखा के पास, समुद्र किनारे और पूर्व दिशा में हैं, जिससे लॉन्चिंग सुरक्षित और प्रभावी होती है। श्रीहरिकोटा बड़े मिशनों, जबकि बालासोर छोटे रॉकेट्स की लॉन्चिंग के लिए सही है।
स्पेस यात्री शुभांशु शुक्ला, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और इसरो के अध्यक्ष ने आज सामूहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत आज भी अंतरिक्ष से सारे जहां से अच्छा दिखता है।
इसरो के चीफ वी. नारायणन ने कहा कि गगनयान का टेस्ट मिशन इस साल दिसंबर में लॉन्च होगा। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया। इस प्रेस कॉन्फेंस में हाल में अतंरिक्ष यात्रा से लौटे शुभांशु शुक्ला और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद थे।
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