इसरो के चीफ वी. नारायणन ने कहा कि गगनयान का टेस्ट मिशन इस साल दिसंबर में लॉन्च होगा। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया। इस प्रेस कॉन्फेंस में हाल में अतंरिक्ष यात्रा से लौटे शुभांशु शुक्ला और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद थे।
ISRO चीफ ने इस रॉकेट की तुलना भारत के पहले रॉकेट से की, जिसे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने बनाया था। उन्होंने कहा, वह रॉकेट 17 टन का था, जो 35 किलो भार को अंतरिक्ष में ले जा सकता था। आज हम 75 टन भार ले जाने वाला रॉकेट बना रहे हैं, जिसकी ऊंचाई 40 मंजिला इमारत जितनी होगी।
ISRO जल्द ही एक और सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है, जो सैटेलाइट कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी से लैस होगा। इसरो के चीफ वी. नारायणन ने इसकी जानकारी दी है। इसमें अमेरिकी ब्लूबर्ड सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, जिसके जरिए सैटेसलाइट कनेक्टिविटी की जा सकती है।
सैटेलाइट तस्वीरों में तबाही का मंजर साफ दिख रहा है। युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब तक 600 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। सेना के चिनूक और MI-17 हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन किया जा रहा है।
NASA और ISRO के सहयोग से बना निसार सैटेलाइट आज लॉन्च होगा। यह दुनिया का पहला डबल रडार वाला पृथ्वी अवलोकन मिशन है, जो भूकंप, बाढ़, फसल और जलवायु परिवर्तन की निगरानी कर वैश्विक आपदा प्रबंधन में क्रांति ला सकता है।
वैश्विक पृथ्वी अवलोकन के लिए ये ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। इस मिशन से भारत और अमेरिका समेत वैश्विक निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी पर आ गए हैं। हालांकि, अंतरिक्ष से वापसी के बाद भी शुभांशु शुक्ला की राह आसान नहीं होगी। उन्हें कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा।
मिशन गगनयान को एक बड़ी सफलता मिली है। इसरो ने गगनयान सर्विस मॉड्यूल प्रणोदन प्रणाली का अल्प अवधि हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक कर लिया है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को लेकर देश का हर एक नागरिक बेहद खुश है और अपने को गौरान्वित महसूस कर रहा है। ऐसे में वह स्कूली छात्रों और ISRO के इंजीनियर से बात करेंगे कई नई जानकारियां दे सकते हैं।
Axiom 4 Mission के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष यान आईएसएस में सफलतापूर्वक डॉकिंग की। इसके बाद उनके साथ मौजूद अन्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस में पहले से मौजूद एस्ट्रोनॉट्स ने गले लगा कर स्वागत किया।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री और एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में पहुंचते ही अब एक नया इतिहास रच दिया है। उनका अंतरिक्ष अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में डॉकिंग कर चुका है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला समेत 4 अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हो गए हैं। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि एक Astronaut कैसे बन सकते हैं।
Axiom 4 mission: अंतरिक्ष के लिए रवाना होने के बाद शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष में मेरी उड़ान भारत की उड़ान है। मैं हाथों में तिरंगा लेकर जा रहा हूं।
शुभांशु शुक्ला 41 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय हैं। आठ बार तकनीकी खामियों के कारण टलने के बाद अब सबकी नजर इस मिशन की सफलता पर टिकी हुई है। आइए जानते हैं इस मिशन से जुड़ी कुछ खास बातें
एक्सिओम-4 मिशन का नेतृत्व कमांडर पैगी व्हिटसन कर रही हैं। इस मिशन में शुभांशु शुक्ला मिशन पायलट हैं। हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कपू और पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की मिशन विशेषज्ञ हैं।
Shubhanshu Shukla Axiom-4 Mission: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हो गया है। मिशन पर जाने वाले 4 अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेसएक्स के मशहूर फॉल्कन 9 रॉकेट से भेजा गया है।
यूपी के कुशीनगर जिले में इसरो ने एक रॉकेट लॉन्च टेस्ट किया। यह टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इसमें 1.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक रॉकेट गया। खास बात यह रही कि इस रॉकेट के साथ पेलोड को भी भेजा गया था।
अंतरिक्ष की यात्रा के सपने देखने वाले शुभांशु शुक्ला को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए लॉन्च होने वाला एक्सिओम-4 मिशन को चौथी बार टाल दिया गया है।
Axiom-4 Mission 11 जून को लॉन्च होने जा रहा है। इस अंतरिक्ष मिशन में भारत के शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं। आइए जानते हैं कि कितनी चुनौती भरी होगी शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा।
मौसम की खराबी के कारण Axiom-4 मिशन को अभी टाला गया है। इसके लॉन्चिंग की नई तारीख और टाइमिंग भी बता दी गई है। इस मिशन में भारत की ओर से शुभांशु शुक्ला समेत अन्य तीन अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) जाने वाले हैं।
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