दूसरे विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ पर भी खतरा टला नहीं है। प्रशांत महासागर में डूबे जहाज, बम और रेडियोएक्टिव कचरा पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं। रिसाव से समुद्री जीवन, खाद्य श्रृंखला और लोगों की सेहत पर असर हो रहा है।
अमेरिका-मेक्सिको के बीच तिजुआना नदी की गंदगी और कचरे को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। अब दोनों देश मिलकर गंदगी और कचरे को साफ करने के लिए करोड़ों डॉलर का खर्च करेंगे।
जापान ने चीन को अपने दक्षिण-पश्चिम तट और प्रशांत महासागर के लिए रणनीतिक खतरा बताया रहा है। जापान ने कहा कि चीन की सैन्य गतिविधियां इन इलाकों में सभी के लिए खतरा हैं।
प्रशांत महासागर में एक मालवाहक जहाज डूब गया है। मालवाहक जहाज में आग लग गई थी। यह जहाज चीन से मेक्सिको जा रहा था। जहाज में 3,000 नए वाहन लदे थे।
प्रशांत महासागर में करोड़ों साल पहले घटी महत्वपूर्ण घटना पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों को इसके कारणों से जुड़ा सुराग लग गया है। इसे बारे में जानकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं।
एक हंपबैक व्हेल ने कुछ ऐसा किया है जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। इस नर व्हेल ने जो किया उसके बार में जानकर आप हैरान हो जाएंगे। तो चलिए आपको आपको हंपबैक व्हेल की पूरी कहनी बताते हैं।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र से लेकर दक्षिण चीन सागर तक चीन की बढ़ती दादागिरी अमेरिका समेत यूरोपीय यूनियन को चिंता में डाल रही है। ऐसे में चीन को चित करने के लिए अमेरिका और यूरोपीय यूनियन को भारत का साथ चाहिए। इन देशों को पता है कि भारत ही इस क्षेत्र का बड़ा खिलाड़ी है।
जापानी नौसेना के दो हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गए हैं। यह दिल दहला देने वाला हादसा दक्षिण प्रशांत महासागर में हुआ। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, अन्य 7 लोग लापता हैं। लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
सुदूर पूर्वी एशियाई देश जापान को थोड़ी सी जमीन और मिल गई है। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि यह जमीन किसी देश ने नहीं दी, बल्कि कुदरत के करिश्मे से मिली है। एक नया द्वीप उभरकर सामने आया है। हालांकि इसे लेकर विशेषज्ञों का दावा हैरान करने वाला है।
सुनामी से तबाह हुए फुकुशिमा दाइची न्यूक्लियर प्लांट से 133 करोड़ लीटर रेडियोएक्टिव पानी जापान ने छोड़ना शुरू कर दिया है। इस पानी के छोड़ने से चीन और हांगकांग व दक्षिण कोरिया जैसे देश डर गए हैं। चीन ने जापान पर यह पाबंदी लगा दी है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो से मुलाकात की। उन्हें आसियान की अध्यक्षता के लिए बधाई भी दी। भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड संगठन की भूमिका और उसकी महत्ता भी बताई।
विदेश मंत्री एक हफ्ते के लिए इंडोनेशिया और थाईलैंड की यात्रा समेत आसियान और बिम्सटेक देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेना पहुंच गए हैं। एस जयशंकर ने सबसे पहले इंडोनेशिया पहुंचकर वहां आसियान महासचिव डॉ. काओ किम होर्न के साथ बैठक की। इस दौरान साइबर और समुद्री सुरक्षा पर भारत का मुख्य फोकस रहा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी।
रूसी सेना ने अपने बयान में कहा कि मिग-31 विमान कामचटका प्रायद्वीप के दक्षिणपूर्वी तट पर अवचा खाड़ी में गिर गया।
जर्मनी के रक्षामंत्री बोरिस पिस्टोरियस दो दिवसीय यात्रा पर भारत में हैं। उन्होंने यहां रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा समझौता और अन्य रणनीतिक साझेदारियों पर बातचीत की है। जर्मनी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की हेकड़ी निकालने के लिए भारत के साथ और अधिक सक्रियता से काम करेगा।
आपूर्ति श्रृंखला के तहत आईपीईएफ भागीदार आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला, मजबूत और अच्छी तरह से एकीकृत बनाने की मंशा रखते हैं। इस स्तंभ के तहत अपने संबोधन में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बातचीत में तेजी लाने की सराहना की।
दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में चीनी सेना की आक्रामकता लगातार बढ़ती ही जा रही है। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आने वाले सभी देश भड़क उठे हैं। सभी देशों ने मिलकर चीन की दादागीरी को खत्म करने और उसे सबक सिखाने की ठान ली है। दूसरे ईयू इंडो-पैसिफिक मिनिस्ट्रियल फोरम (ईआईपीएमएफ) में भाग लेने के लिए स्वीडन के स्टॉकहोम पहुंचे।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विभिन्न देशों के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी से चीन चिंता में पड़ गया है। अब तक हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत का सहयोग लेने और देने वाले देशों में अमेरिका से लेकर, आस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा, फिलीपींस जैसे महत्वपूर्ण देश सामिल हैं।
आस्ट्रेलिया भारत को शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में देखता है। उसे यह भी लगता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागीरी को रोकने के लिए भारत का साथ जरूरी है। इसलिए वह भारत के साथ रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना चाहता है।
Canada Becomes China's new Challenging Country: दक्षिण चीन सागर में दादागीरी दिखाने वाले चीन को अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के अलावा एक और नया चैलेंजर्स मिल गया है। इससे चीन की चुनौती बढ़ गई है।
Indo-Pacific region:हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामता और दादागिरी से वह सभी देश परेशान हैं, खासकर जिनकी सीमा चीन से लगती है। चीन दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक में आक्रामक रवैया अपनाए हुए है। वह अधिकांश क्षेत्रों पर अपना दावा करता है। इसलिए चीन की आक्रामकता को रोकना अब बहुत जरूरी हो गया है।
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