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क्या भारत और यूरोप में 43 डिग्री पर गर्मी एक जैसी लगती है ? यूजर के सवाल पर लोगों ने दिए चौंकाने वाले जवाब

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Jun 28, 2026 03:09 pm IST,  Updated : Jun 28, 2026 03:09 pm IST

सोशल मीडिया पर यूरोप और भारत में गर्मी को लेकर एक पोस्ट वायरल हुई है। इस पर पूछा गया है कि, क्या भारत और यूरोप में 43 डिग्री पर गर्मी एक जैसी लगती है ?

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यूरोप और भारत में गर्मी। Image Source : PEXELS

सोशल मीडिया पर एक सवाल वायरल हो रहा है- 'क्या यूरोप में 43°C और भारत में 43°C में कोई फर्क है?' इस सवाल पर लोगों ने जो जवाब दिए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं बल्कि जलवायु, अनुकूलन और इंफ्रास्ट्रक्चर के अंतर को उजागर करते हैं। कई यूजर्स का कहना है कि थर्मामीटर पर भले ही आंकड़ा एक हो, लेकिन वास्तविक अनुभव पूरी तरह अलग होता है। यह पोस्ट उमेद प्रताप सिंह ने शेयर की थी। कैप्शन में लिखा था, 'क्या यूरोप में 43°C और भारत में 43°C में कोई फर्क है? इसमें रोने-धोने वाली क्या बात है? यहां तो तापमान 48°C तक भी पहुंच जाता है।' 

सवाल का यूजर्स ने दिया जवाब 

एक्स पर @umedpratapsingh नामक हैंडल से इस सवाल को पूछा गया था। कई यूजर्स ने बताया कि घरों और शहरों के निर्माण का तरीका इस बात पर बहुत असर डालता है कि गर्मी का अनुभव कैसा होता है। एक यूजर ने लिखा था, 'बुनियादी ढांचा ठंड के हिसाब से बनाया गया है। यूरोप में 43 डिग्री सेल्सियस का तापमान भारत में 55 डिग्री सेल्सियस से भी ज़्यादा महसूस होगा। कई घरों में तो पंखे भी नहीं हैं। मजबूरी में अब लोग पोर्टेबल पंखे इस्तेमाल करने लगे हैं।'

दूसरे यूजर ने​ लिखा था कि, 'इनमें एयर कंडीशनर नहीं हैं। बहुत कम अपार्टमेंट में पंखे हैं। कई अपार्टमेंट में खिड़की खोलने की सीमा तय है। कुछ खिड़कियां केवल 10 डिग्री तक ही खुलती हैं।'

कई लोगों ने बताया कि भारतीय बुनियादी ढांचा किस प्रकार अलग ढंग से डिजाइन किया गया है। एक यूजर ने लिखा, 'उनके मेट्रो शहरों और घरों में एसी तक नहीं हैं। हमारे यहां तो बुनियादी ढांचा शीतलन को ध्यान में रखकर बनाया जाता है।'

एक यूजर में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि, 'यह हमारे तटीय क्षेत्रों जैसी उच्च आर्द्रता के कारण हो सकता है, जहां 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान भी असहनीय लगता है।' 

बदलती जलवायु पर आराम का स्तर भी बदलता है 

कुछ यूजर्स का तर्क था कि यूरोपीय देश अत्यधिक गर्मी के अनुकूल नहीं हैं, जिससे ऐसे तापमान को संभालना मुश्किल हो जाता है। एक टिप्पणी में लिखा था, 'यूरोपीय लोग इस तरह की गर्मी के आदी नहीं हैं। पेरिस में तापमान बढ़ने के कारण शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। क्या आप इस पर विश्वास कर सकते हैं?'

कुछ अन्य लोगों ने कहा, 'वे अपने घरों में एयर कंडीशनर लगवा सकते हैं, लेकिन उन्हें मानसिक समस्याएं हैं। यह उनका स्वार्थ है, मौसम से इसका कोई लेना-देना नहीं है।' 

कई यूजर्स ने भारत से तुलना भी की। एक यूजर ने कहा, 'हम तो पूरी जिंदगी भीषण गर्मी में ही रहे हैं। कई जगहों पर तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और हम फिर भी अपना काम करते रहते हैं। हम तो इस पर मजेदार वीडियो भी बनाते हैं और आगे बढ़ जाते हैं।'

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, 'भारत के पहाड़ों पर जाइए और 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के तापमान का सामना कीजिए। प्रदूषण रहित और साफ आसमान का अनुभव बिल्कुल अलग होता है।'

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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