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काशी, बनारस और वाराणसी में क्या अन्तर है, बताने में कन्फ्यूजन होता है तो आज दूर कर लें झिझक; ये रहा जवाब

Kashi, Banaras and Varanasi Difference: सोशल मीडिया पर आपने काशी विश्वनाथ मंदिर की कई मनोरम फोटोज देखी होंगी। हालांकि, आज हम आपको काशी से जुड़ा एक ऐसा फैक्ट बताने जा रहे हैं जिसे लेकर शायद आप भी कन्फ्यूज रहते होंगे।

Written By: Shaswat Gupta
Published : Jan 08, 2026 07:56 pm IST, Updated : Jan 09, 2026 04:54 pm IST
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Image Source : FREEPIK काशी के घाट का दृश्य।

Kashi, Banaras and Varanasi Difference: भारत में जब भी रमणीक स्थलों की बात होती है तो कई ऐसे शहर हैं जिनके नाम सबसे लोगों के ज़हन में आते हैं। ​हर शहर से जुड़ा कोई न कोई ऐसा रहस्य भी होता है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा होती ही रहती है। वैसे तो शहरों से जुड़े बहुत से रहस्य लोगों के बीच फेमस रहते हैं मगर उस अमुख शहर में आने वाले मेहमानों के ऐसे रहस्य हैरत भरे होते हैं। अगर केवल नामों की बात की जाए तो स्थानीय लोग अपने शहरों को अलग—अलग नामों से जानते हैं मगर, आगंतुकों के लिए वे नाम और उनके प्रचलन की वजह काफी नए होते हैं जिसके सच से वे अनभिज्ञ होते हैं। मसलन, उत्तर प्रदेश के वाराणसी को ही ले लीजिए...इस जगह को काशी, बनारस और वाराणसी जैसे नामों से पुकारा जाता है। ये तीनों ही नाम एकदम ठीक हैं मगर तीनों नाम प्रचलन में क्यों हैं इसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि, काशी, बनारस और वाराणसी में क्या अन्तर है ? यदि आपको भी इसे लेकर कन्फ्यूजन है तो आज ये सारे संशय दूर हो जाएंगे। 

आखिर क्यों फेमस है ये शहर 

उत्तर प्रदेश में स्थित वाराणसी अपनी प्राचीनता, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक है। ये जगह भगवान शिव की नगरी (काशी विश्वनाथ मंदिर) कहलाती है, गंगा नदी के किनारे स्थित है, और यह मोक्ष का द्वार माना जाता है, जहां मृत्यु से मोक्ष मिलता है। यह शिक्षा और ज्ञान का भी केंद्र रहा है, जहां बुद्ध और कई आचार्य आए थे।

वाराणसी की संस्कृति और विरासत 

विश्व प्रसिद्ध बनारसी सिल्क की साड़ियां और वाराणसी का पान जैसे— बनारसी पान यहां की पहचान हैं। यह शहर संगीत और कला का केंद्र रहा है, पंडित रविशंकर और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जैसे महान कलाकार यहीं से थे। यहां की संकरी गलियां, पुराने बाजार और स्थानीय लाइफस्टाइल बेहद खास है, जहां कई कहानियां और इतिहास छिपे हैं। एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक, BHU यहीं स्थित है, जो शिक्षा और स्वास्थ्य (बीएचयू अस्पताल) के लिए जाना जाता है।

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Image Source : FREEPIK
काशी के घाट का दृश्य।

काशी के अनोखे नाम और प्रचलित नाम

काशी को आमतौर पर बनारस और वाराणसी भी कहते हैं जो कि इसके सबसे प्रचलित नाम हैं। मगर किंवदंतियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसके कई अनोखे और पौराणिक नाम हैं। काशी के अन्य नामों की बात करें तो इसे आनंदवन (खुशियों का जंगल), महाश्मशान (महान श्मशान), अविमुक्त (जो कभी त्यागा न गया), रुद्रावास (शिव का निवास), काशिका (चमकने वाली), शिवपुरी, और मोक्षभूमि भी कहा जाता है। यह 'दीपों का शहर', 'मंदिरों का शहर', और 'ज्ञान नगरी' भी कहलाती है। गौरतलब है कि, इस जगह को त्रिपुरारिराजनगरी, तपसः स्थली, शंकरपुरी, जितवारी, आनंदरूपा, श्रीनगरी, गौरीमुख, महापुरी, तपस्थली, धर्मक्षेत्र, अर्लकपुरी, जयंशिला, पुष्पावती, पोटली, हरिक्षेत्र, विष्णुपुरी, शिवराजधानी, कसीनगर, काशीग्राम भी कहते हैं। 

काशी, बनारस और वाराणसी में अन्तर 

काशी, बनारस और वाराणसी में अन्तर को इस प्रकार से समझा जा सकता है: 

  • काशी : इस जगह का सबसे पुराना और प्राचीन नाम काशी है। ऐसा माना जाता है कि, ये नाम करीब 3 हजार साल से बोला जा रहा है। धार्मिक ग्रन्थों में आपको यही नाम पढ़ने को मिलेगा। बता दें कि, काशी को कई बार 'कशिका' भी कह दिया जाता है। काशी का अर्थ 'चमकना' होता है। लोगों की मान्यता है कि, भगवान शिव की नगरी होने के कारण यह शहर हमेशा चमकता रहता है। 
  • बनारस : प्रचलित कथाओं और किंवदंतियों की मानें तो बनारस नाम पाली भाषा के बनारसी से उद्धृत है। मुगल और अंग्रेजों के शासनकाल में इसे बनारस ही कहा जाता था। माना जाता है, ये नाम बनार नाम के राजा से जुड़ा है, जो मोहम्मद गोरी के हमले के दौरान यहां मारा गया था। लोग बताते हैं कि, बनारस एकमात्र शहर ऐसा था जहां जीवन के अलग रंगों को देख मुगल भी हैरान हो गए थे। 
  • वाराणसी : बौद्ध जातक कथाओं और हिन्दू पुराणों में बताया जाता है कि, वाराणसी एक प्राचीन नाम भी है। वाराणसी 'वरूण' और 'असी' नदियों के नाम से उद्धृत है, जो इस शहर से होकर गुजरती हैं। वैसे तो कई छोटी और बड़ी नदियां यहां से गुजरती हैं, मगर लेकिन इन दोनों नदियों का शहर से अलग लगाव है।

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Image Source : FREEPIK
काशी के घाट का दृश्य।

वाराणसी नाम कैसे पड़ा 

यदि आपको नहीं पता है तो बता दें कि, 15 अगस्त, 1947 से पहले भी बनारस के राजा विभूतिनारायण सिंह थे। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद जब रियायतों का विलय हो रहा था, तब महाराजा ने अपनी रियासत के भारत में विलय के पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। उत्तर प्रदेश के गठन के दौरान टिहरी गढ़वाल, रामपुर और बनारस की रियासतों का इसमें विलय हुआ और 24 मई 1956 को शहर का नाम बदल दिया गया।

परिणामस्वरूप, काशी/बनारस/वाराणसी सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिकता का एक जीता-जागता संगम है। 

डिस्क्लेमर: 
यह जानकारी प्राचीन मान्यताओं, किंवदंतियों, जातक कथाओं, बौद्ध कथाओं से प्रेरित है। किसी भी तथ्य या जानकारी को सच मानने या अमल में लाने से पहले इतिहासकारों से सलाह अवश्य लें अथवा अन्य पुख्ता साक्ष्यों/प्रमाणों का अवलोकन कर सत्यापित अवश्य करें। इंडिया टीवी इन तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है।

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