Kashi, Banaras and Varanasi Difference: भारत में जब भी रमणीक स्थलों की बात होती है तो कई ऐसे शहर हैं जिनके नाम सबसे लोगों के ज़हन में आते हैं। हर शहर से जुड़ा कोई न कोई ऐसा रहस्य भी होता है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा होती ही रहती है। वैसे तो शहरों से जुड़े बहुत से रहस्य लोगों के बीच फेमस रहते हैं मगर उस अमुख शहर में आने वाले मेहमानों के ऐसे रहस्य हैरत भरे होते हैं। अगर केवल नामों की बात की जाए तो स्थानीय लोग अपने शहरों को अलग—अलग नामों से जानते हैं मगर, आगंतुकों के लिए वे नाम और उनके प्रचलन की वजह काफी नए होते हैं जिसके सच से वे अनभिज्ञ होते हैं। मसलन, उत्तर प्रदेश के वाराणसी को ही ले लीजिए...इस जगह को काशी, बनारस और वाराणसी जैसे नामों से पुकारा जाता है। ये तीनों ही नाम एकदम ठीक हैं मगर तीनों नाम प्रचलन में क्यों हैं इसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि, काशी, बनारस और वाराणसी में क्या अन्तर है ? यदि आपको भी इसे लेकर कन्फ्यूजन है तो आज ये सारे संशय दूर हो जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में स्थित वाराणसी अपनी प्राचीनता, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक है। ये जगह भगवान शिव की नगरी (काशी विश्वनाथ मंदिर) कहलाती है, गंगा नदी के किनारे स्थित है, और यह मोक्ष का द्वार माना जाता है, जहां मृत्यु से मोक्ष मिलता है। यह शिक्षा और ज्ञान का भी केंद्र रहा है, जहां बुद्ध और कई आचार्य आए थे।
विश्व प्रसिद्ध बनारसी सिल्क की साड़ियां और वाराणसी का पान जैसे— बनारसी पान यहां की पहचान हैं। यह शहर संगीत और कला का केंद्र रहा है, पंडित रविशंकर और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जैसे महान कलाकार यहीं से थे। यहां की संकरी गलियां, पुराने बाजार और स्थानीय लाइफस्टाइल बेहद खास है, जहां कई कहानियां और इतिहास छिपे हैं। एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक, BHU यहीं स्थित है, जो शिक्षा और स्वास्थ्य (बीएचयू अस्पताल) के लिए जाना जाता है।

काशी को आमतौर पर बनारस और वाराणसी भी कहते हैं जो कि इसके सबसे प्रचलित नाम हैं। मगर किंवदंतियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसके कई अनोखे और पौराणिक नाम हैं। काशी के अन्य नामों की बात करें तो इसे आनंदवन (खुशियों का जंगल), महाश्मशान (महान श्मशान), अविमुक्त (जो कभी त्यागा न गया), रुद्रावास (शिव का निवास), काशिका (चमकने वाली), शिवपुरी, और मोक्षभूमि भी कहा जाता है। यह 'दीपों का शहर', 'मंदिरों का शहर', और 'ज्ञान नगरी' भी कहलाती है। गौरतलब है कि, इस जगह को त्रिपुरारिराजनगरी, तपसः स्थली, शंकरपुरी, जितवारी, आनंदरूपा, श्रीनगरी, गौरीमुख, महापुरी, तपस्थली, धर्मक्षेत्र, अर्लकपुरी, जयंशिला, पुष्पावती, पोटली, हरिक्षेत्र, विष्णुपुरी, शिवराजधानी, कसीनगर, काशीग्राम भी कहते हैं।
काशी, बनारस और वाराणसी में अन्तर को इस प्रकार से समझा जा सकता है:

यदि आपको नहीं पता है तो बता दें कि, 15 अगस्त, 1947 से पहले भी बनारस के राजा विभूतिनारायण सिंह थे। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद जब रियायतों का विलय हो रहा था, तब महाराजा ने अपनी रियासत के भारत में विलय के पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। उत्तर प्रदेश के गठन के दौरान टिहरी गढ़वाल, रामपुर और बनारस की रियासतों का इसमें विलय हुआ और 24 मई 1956 को शहर का नाम बदल दिया गया।
परिणामस्वरूप, काशी/बनारस/वाराणसी सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिकता का एक जीता-जागता संगम है।
डिस्क्लेमर:
यह जानकारी प्राचीन मान्यताओं, किंवदंतियों, जातक कथाओं, बौद्ध कथाओं से प्रेरित है। किसी भी तथ्य या जानकारी को सच मानने या अमल में लाने से पहले इतिहासकारों से सलाह अवश्य लें अथवा अन्य पुख्ता साक्ष्यों/प्रमाणों का अवलोकन कर सत्यापित अवश्य करें। इंडिया टीवी इन तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है।
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