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बंगाल चुनाव के बीच सामने आया टेप, अभिषेक बनर्जी तक हर महीने 35 करोड़ रुपए पहुंचाने का दावा

ऑडियो टेप में कोल तस्करी केस के आरोपी अनूप मांझी के करीबी गणेश बागड़िया और एक सरकारी अफसर के बीच बातचीत का दावा किया जा रहा है। गणेश बागड़िया और और सरकारी अफसर के बीच इस टेप में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्ज़ी का ज़िक्र है।

Written by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Apr 03, 2021 07:43 pm IST, Updated : Apr 03, 2021 11:13 pm IST
बंगाल चुनाव के बीच सामने आया टेप, अभिषेक बनर्जी तक हर महीने 35 करोड़ रुपए पहुंचाने का दावा- India TV Hindi
Image Source : PTI/FILE PHOTO बंगाल चुनाव के बीच सामने आया टेप, अभिषेक बनर्जी तक हर महीने 35 करोड़ रुपए पहुंचाने का दावा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कोल तस्करी केस से जुड़ा एक सनसनीखेज ऑडियो टेप सामने आने के बाद हलचल तेज हो गई है। ऑडियो टेप में कोल तस्करी केस के आरोपी अनूप मांझी के करीबी गणेश बागड़िया और एक सरकारी अफसर के बीच बातचीत का दावा किया जा रहा है। दावा है कि गणेश बागड़िया और और सरकारी अफसर के बीच इस टेप में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्ज़ी का ज़िक्र है। टेप में दोनों की बातचीत में अभिषेक बनर्जी तक हर महीने 35 करोड़ रुपए पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।

टेप में बंगाल में हर काम में सिंडिकेट को पैसे दने का जिक्र किया गया

कोल माफिया से हर महीने 35 करोड़ रुपए विनय मिश्र के जरिए अभिषेक बनर्जी तक पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। ये पैसा कोल माफिया से विनय मिश्र के ज़रिए अभिषेक बनर्जी तक पहुंचाने की बात टेप में किये जाने का दावा है। टेप में जो बातचीत है उसमें कहा जा रहा है अभिषेक बनर्जी को पहले 15 से 20 करोड़ हर महीने पहुंचता था लेकिन अब हर महीने 35 करोड़ रुपए पहुंचाएं जा रहे हैं। ऑडियो टेप मं सिंडिकेट का जिक्र किया गया है। टेप में बंगाल में हर काम में सिंडिकेट को पैसे दने का जिक्र किया गया है। टेप में रिश्वत को पॉलिटिकल बॉस तक पहुंचाने का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इंडिया टीवी इस ऑडियो टेप की पुष्टि नहीं करता है।

आप भी सुनिए पूरी बातचीत

अनूप माझी के करीबी गणेश बागड़िया की बातचीत

दूसरी आवाज़- एक स्टोरी और सुनिए। एक्साइज कमिशन्र बहुत बड़ा आदमी पोस्टिंग कर दिया। और एक्साइज कमिश्नर यहां बैठा हुआ है उसके बगल में खुद बैठ गया। और सब जितने भी प्रोड्यूसर हैं सबको बुला लिया और सबको बोलता है पर बोतल इतना देना होगा। उसमें से एक दो जो स्ट्रॉन्ग थे वो बोल दिए नहीं दे सकेंगे। बोला तो ठीक है कल से अपना बिज़नेस बंद करना, सबके सामने।

हम जो सनसनीखेज वीडियो आपको दिखा रहे हैं उसमें साफ-साफ ये कहा जा रहा है कि बंगाल में अगर कोई भी काम कराना है तो सिंडिकेट के जरिए ही करना होगा..इसी सिंडिकेट के जरिए कटमनी ली जाती है..कोई भी काम हो तो बिना सिंडिकेट के पास जाए पूरा नहीं होगा..

अनूप माझी के करीबी 

गणेश बागड़िया की बातचीत

पहली आवाज़- ये सिंडिकेट क्या है? सिंडिकेट बहुत सुनता हूं? पेपर वगैरह में पड़ता हूं सिंडिकेट..सिंडिकेट।

दूसरी आवाज़- सिंडिकेट तो बंगाल में पेट वर्ड है सर..

पहली आवाज़- क्या है ये?

दूसरी आवाज़- एक सिंडिकेट है वहां पर जो न्यू टाउन एरिया में नया कंस्ट्रक्शन हो रहा है और सिंडिकेट फॉर्म कर दिया पॉलिटिकली..जिसको भी बालू, पत्थर, ईंट मैटिरियल लेने पड़े सिंडिकेट के ज़रिए लेना पड़ेगा और वही सिंडिकेट फेमस हो गया।

पहली आवाज़- उसका फिर कट कहां जाता है? जो भी कलेक्शन होता होगा उसका कट कहां जाता है?

दूसरी आवाज़- जैसे मानो किसी चीज़ का रेट 100 रुपए है, सिंडिकेट वाले लेते हैं 120 रुपए..ख़राब क्वालिटी देते हैं..नाप तौल में गलती..सिंडिकेट वाले कमाते हैं और जो पॉलिटिकल बॉसेस हैं, अपना अंडरस्टेंडिंग रहता है उनका..बीजेपी ज्वाइन कर लिया सिंडिकेट के लीडर सब्यसांची दत्त?

बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान आप बार-बार सिंडिकेट का नाम सुनते होंगे.,.ये आरोप लगता रहा है कि सिंडिकेट के जरिए ही कटमनी ली जाती थी..इस ऑडियो टेप में भी इस बात का जिक्र है कि 2011 में ममता सरकार बनने के एक-डेढ़ साल के भीतर ही सिंडिकेट बन गए थे..

अनूप माझी के करीबी 
गणेश बागड़िया की बातचीत

पहली आवाज़- वो फिर कैसे फंड का ट्रांसमिशन कैसे करता था, हां तो वो कहानी नहीं आप लोगों को पता है कहानी तो बताया होगा न किसी ने 

दूसरी आवाज़- नहीं बताया होगा लेकिन उतना मेरे को याद नहीं है लेकिन सबका अपना कोर ग्रुप रहता है न सर वो बातें बाहर नहीं आ पातीं 

पहली आवाज़- अच्छा लेकिन फिर भी चूंकि अब ये इन सबसे इन्वॉल्व हुए तो पता नहीं चलता है कि उनका फंडिंग कैसे जाता था वहां पॉलिटिकल जो फंडिंग 

दूसरी आवाज़- यही यही 

पहली आवाज़- कौन अशोक जी ने विनय, विनय के थ्रू ही शुरु से विनय ही 

दूसरी आवाज़- शुरु से 

पहली आवाज़- शुरु से विनय ही देख रहा है शुरु से ही विनय देख रहा है कब से

दूसरी आवाज़- टीएमसी गवर्नमेंट आई है उससे समझ लीजिए डेढ़ साल बाद से चालू हो गया 2012/13 से चालू हो गया

दूसरी आवाज़- घर में आग लगा देते हैं

पहली आवाज़- ये भी कर देते हैं?

दूसरी आवाज़- पब्लिक के थ्रू..पुलिस आएगी, फैक्ट्री लुटवा देंगे

पहली आवाज़- क्या इनके पास इस तरह की मैन पावर है?

दूसरी आवाज़- पॉलिटिकल पार्टी के पास क्या नहीं है सर..सबकुछ कर सकते हैं..और कुछ ज्यादा करना होगा, ठिकानों में, घर में..जाली नोट रखवा देंगे..हथियार रखवा देंगे, केस करवा देंगे..ये अभिषेक बनर्जी लास्ट टर्म में अभी इतने केस करवाया है विपक्ष के कि पुलिसवाले लोग थक गए..ये सब बहुत होता है, बहुत ख़तरनाक है

पहली आवाज़- एक बात बताइए, अभी एडवाइज़र बना दिए प्रशांत किशोर को PK को..वो भी शायद लाइक नहीं करता इसको, अभिषेक को?

दूसरी आवाज़- ऐसा तो है, ममता बनर्जी लाइक नहीं करती थी PK को..डोज़ दिया था और कहा था मुझे पॉलिटिक्स सिखाएगा..ये जब आया था..मुझसे ज्यादा जानता है पॉलिटिक्स..धीरे-धीरे क्या होता है ना आदमी को हार का डर होता है ना फिर वो मानना चालू कर देता है।

दूसरी आवाज़- इसे तो अच्छा बोल सकते हैं..भाई ये फिक्स इनकम आ रहा है हर महीने

पहली आवाज़- कितना, मोटामाटी कितना वहां तक पहुंच जाता था..अभिषेक तक कितना पहुंच जाता था?

दूसरी आवाज़- दो साल, ढाई साल 35 तो लग रहा है..

पहली आवाज़- उस तक पहुंच जाता था

दूसरी आवाज़- कुछ विनय बाबू खा जाते थे..

पहली आवाज़- यानि वहां तक डिलीवरी कम से कम 35 तक हो जाती थी..

दूसरी आवाज़- अशोक मिश्रा के पास सही जानकारी है..वही देता था सारा पैसा..लास्ट ढाई तीन साल से..आखिरी तीन साल से वही देता था..तीन-चार साल हो गया।

पहली आवाज़- तो वो वहीं पोस्टेड है, तीन साल से?

दूसरी आवाज़- पहले विष्णुपुर में था, डायमंड हार्बर जो अभिषेक का निर्वाचन क्षेत्र है..दो साल से, डेढ़ साल से इधर है।

पहली आवाज़- बोल के गया?

दूसरी आवाज़- बोला दिक्कत हो रहा है, दूसरे लोगों को बुलाये हो..नज़दीक में पोस्टिंग कर दीजिए..सबको वहां बुला-बुलाकर डील कर लेंगे।

पहली आवाज़- किसे बोला?

दूसरी आवाज़- विनय को बोला, विनय ने अभिषेक को बोला..अभिषेक तो किसी से बात नहीं करता था।

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