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क्या 'गंगासागर सेतु' बनेगा ममता के लिए चुनावी सेतु? कितना सधेगा हिंदू वोट; जानें चुनाव से पहले क्या हैं इसके मायने

ममता बनर्जी ने सोमवार को गंगासागर सेतु की आधारशिला रखी। चुनाव से पहले इस पुल की आधारशिला के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। आइये जानते हैं कि गंगासागर सेतु की चुनाव में क्या अहमियत होगी।

Edited By: Amar Deep @amardeepmau
Published : Jan 06, 2026 12:56 pm IST, Updated : Jan 06, 2026 12:56 pm IST
ममता ने रामसागर सेतु की रखी आधारशिला। - India TV Hindi
Image Source : PTI ममता ने रामसागर सेतु की रखी आधारशिला।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को सागर द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले 'गंगासागर सेतु' का शिलान्यास किया। यह पुल मुरीगंगा नदी पर बनाया जाएगा और इससे लाखों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। करीब  4.75 किलोमीटर लंबे इस पुल की लागत 1670 करोड़ रुपये है और इसे 2-3 साल में पूरा करने का दावा किया गया है। सागर द्वीप दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है, जहां हर साल माघ महीने में गंगासागर मेले के दौरान लाखों लोग गंगा स्नान करने आते हैं। खासकर 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर देशभर से श्रद्धालु कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं।

क्यों अहम है गंगासागर सेतु?

बता दें कि अब तक सागर द्वीप तक पहुंचने के लिए लोगों को नाव या फेरी का सहारा लेना पड़ता है, जो मौसम खराब होने या भीड़ के कारण अक्सर बाधित हो जाती है। फेरी सेवा में औसतन 45 मिनट से 1.5 घंटे लगते हैं और बरसात या तूफान में यह कई घंटों तक रुक जाती है। इस वजह से इस पुल की मांग लंबे समय से की जा रही थी।गंगासागर सेतु की खासियतें इसे एक महत्वपूर्ण परियोजना बनाती हैं। यह पुल लगभग 4.75 किलोमीटर लंबा और चार लेन का होगा। यह काकद्वीप को सीधे सागर द्वीप से जोड़ेगा, जिससे हुगली नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित द्वीप को हर मौसम में सड़क संपर्क मिलेगा। पुल बनने से यात्रा का समय घटकर सिर्फ 10-15 मिनट रह जाएगा, यानी औसतन 30 मिनट से एक घंटे की बचत होगी। इससे न सिर्फ गंगासागर मेले में सुविधा बढ़ेगी, बल्कि सागर द्वीप पर शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियां भी ज्यादा आसान और तेज हो जाएंगी। 

एक करोड़ हिंदुओं को सहूलियत

शिलान्यास के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि इस पुल से एक करोड़ से ज्यादा हिंदुओं को सहूलियत मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि यह ब्रिज अगले दो-तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। ममता ने कहा, "वैसे तो इस योजना में केंद्र सरकार को मदद करनी चाहिए थी, लेकिन वो केंद्र सरकार से भीख नहीं मांगेंगी। बंगाल की सरकार खुद ही पूरा पैसा देकर इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगी।" उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी सिर्फ झूठ बोलती है और लोगों को आपस में लड़ाती है, लेकिन बंगाल में ये सब नहीं चलेगा। 

हिंदू वोट साधने की कोशिश

ममता बनर्जी इस पुल के जरिए बंगाल की सियासत को मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। एक तरफ यह परियोजना हिंदू श्रद्धालुओं की बड़ी आबादी को सीधा फायदा पहुंचाएगी, जो राज्य में चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर वह खुद को बंगाल के हितों की रक्षक के रूप में पेश कर रही हैं, जो बीजेपी के खिलाफ उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। इससे वह राज्य सरकार की स्वतंत्रता और विकास पर जोर देकर विपक्षी दलों को जवाब दे रही हैं, खासकर तब जब केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय मदद को लेकर विवाद चल रहे हैं। 

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