West Bengal Assembly Election 2026: नोआपारा विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल विधानसभा के 294 सीटों में एक अहम सीट है। यह विधानसभा सीट उत्तर 24 परगना जिले में स्थित है। 2021 के चुनावों में टीएमसी उम्मीदवार मंजु बसु ने इस सीट से जीत हासिल की थी। नोआपारा कोलकाता मेट्रोपॉलिटन के अंदर पड़ता है। यह विधानसभा सीट समान्य श्रेणी का है। यह विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी। तब से लेकर अब तक 17 विधानसभा चुनावों में सीपीआईएम ने 8 बार इस सीट से जीत हासिल की है। तृणमूल कांग्रेस ने चार बार, कांग्रेस ने तीन बार जबकि प्रजा सोशलिस्टपार्टी और सीपीआई ने दो बार इस सीट पर जीत हासिल की थी।
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सियासी समीकरण
माना जाता है कि नोआपारा की राजनीति पर बैरकपुर के बाहुबली नेताओं का गहरा असर रहता है। इस क्षेत्र में जूट की कई मिलें है। इन मिलों में काम करनेवाले हिंदी भाषी और बंगाली श्रमिकों का वोट बैंक किसी भी दल की जीत-हार तय करता है। 2016 के मुकाबले 2021 में यहां बीजेपी के वोट शेयर में भारी बढ़ोतरी देखी गई थी। इस सीट पर टीएमसी और बीजेपी के बीच मुख्य मुकाबला है।
2021 विधानसभा चुनाव के नतीजे
2021 के विधानसभा चुनाव में नोआपारा सीट पर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार मंजू बासु ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने बीजेपी के सुनील सिंह को 26,710 वोटों से हरा दिया था। मंजू बासु को कुल 94,628 वोट मिले थे जबकि सुनील सिंह को 67,918 वोटों से संतोष करना पड़ा। वहीं कांग्रेस (संयुक्त मोर्चा) के उम्मीदवार देवशंकर सरकार को 24,010 वोट मिले। वोट प्रतिशत की बात करें तो मंजू बासु को कुल 48.90 प्रतिशत और सुनील सिंह को 35.10 प्रतिशत वोट हासिल हुए।
2016 विधानसभा चुनाव के नतीजे
2016 के विधानसभा चुनाव में नोआपारा विधानसभा सीट का रिजल्ट काफी चौंकाने वाला रहा था। यहां टीएमसी की लहर के बावजूद कांग्रेस-वाममोर्चा गठबंधन ने जीत हासिल की थी। कांग्रेस (वाममोर्चा गठबंधन) के नेता मधुसूदन घोष ने टीएमसी के मंजू बासु को 10,951 वोटों से हराया था। मधुसूदन घोष को कुल 1,03,116 वोट हासिल हुए जबकि मंजू बासु को 92,165 वोट मिले। वहीं बीजेपी तीसरे स्थान पर रही थी। मत प्रतिशत की बात करें तो मधुसूदन घोष को कुल 52.22 प्रतिशत और मंजू बासु को कुल 46.68 प्रतिशत वोट हासिल हुए।
2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के लिए एंटी इंकम्बेंसी और भ्रष्टाचार के स्थानीय मुद्दे चुनौती बन सकते हैं। वहीं, बीजेपी के लिए एक मजबूत स्थानीय चेहरे और संगठनात्मक एकता की जरूरत होगी।