Tuesday, January 13, 2026
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Iran Violence: खामेनेई के आदेश से ईरान की सड़कों पर बिछी लाशें, दिख रहा भयावह मंजर, अब आगे क्या होगा

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश दिए, जिसके बाद 2,000 से ज्यादा लोगों की बात कही जा रही है। कहा जा रहा है कि सड़कों पर लाशें बिछी हैं, भयावह मंजर दिख रहा है।

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
Published : Jan 13, 2026 06:52 pm IST, Updated : Jan 13, 2026 07:03 pm IST
ईरान में प्रदर्शन में 2,000 लोगों की मौत- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO (AP) ईरान में प्रदर्शन में 2,000 लोगों की मौत

ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश में हालिया अशांति के दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने का व्यक्तिगत रूप से आदेश दिया था।

सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और राष्ट्रपति कार्यालय से मिली जानकारी का हवाला देते हुए, ईरान इंटरनेशनल ने बताया कि ये हत्याएं खामेनेई के सीधे आदेश पर की गईं, और सरकार की तीनों शाखाओं के प्रमुखों को इसकी पूरी जानकारी और स्वीकृति थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने औपचारिक रूप से गोलीबारी की अनुमति देने वाला आदेश जारी किया था, और गोलीबारी के लिए मुख्य रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और बासिज मिलिशिया जिम्मेदार थे।

पहली बार ईरान सरकार ने मानी मौत की बात

ईरान प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी ने पहली बार माना है कि देशव्यापी हिंसा में अब तक दो हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और सबसे बड़ी बात ये है कि इनमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। बता दें कि ये पहली बार है जब ईरान ने दो हफ्ते से जारी प्रदर्शनों के दौरान इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है। हालांकि ये नहीं बताया गया कि मरने वालों में कितने आम नागरिक हैं और कितने सुरक्षा बल के जवान हैं?

अबतक 31 प्रांतों में फैल गया है विरोध प्रदर्शन

उस समाचार एजेंसी के अनुसार, उसके निष्कर्ष रविवार से शुरू हुई सूचनाओं की बहुस्तरीय समीक्षा पर आधारित थे, जिसमें सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के करीबी सूत्रों, राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारियों, मशहद, करमानशाह और इस्फ़हान में आईआरजीसी से जुड़े सूत्रों, साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों, पारिवारिक गवाहियों, अस्पताल के आंकड़ों और कई शहरों के डॉक्टरों और नर्सों से प्राप्त जानकारी का उपयोग किया गया था। बिगड़ती आर्थिक स्थितियों के कारण भड़के ये विरोध प्रदर्शन सभी 31 प्रांतों में फैल गए हैं।

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