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अफगानिस्तान: अमेरिका के 'निशान' मिटा रहा तालिबान, बदला काबुल के 'बुश बाजार' का नाम

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Oct 13, 2021 02:39 pm IST,  Updated : Oct 13, 2021 02:39 pm IST

मोहम्मद जलाल नाम के ट्विटर यूजर ने बताया कि काबुल शहर का 'बुश बाजार' जो अमेरिकी मिलिट्री आईट्म जैसे जैकेट, बूट और कुछ चीनी प्रोडक्ट्स के लिए जाना जाता था, उसका नाम बदलकर 'मुजाहिद्दीन बाजार' कर दिया गया है।

अफगानिस्तान: अमेरिका के 'निशान' मिटा रहा तालिबान, बदला काबुल के 'बुश बाजार' का नाम- India TV Hindi
अफगानिस्तान: अमेरिका के 'निशान' मिटा रहा तालिबान, बदला काबुल के 'बुश बाजार' का नाम Image Source : HTTPS://TWITTER.COM/MJALAL313

काबुल. अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ज्यादा से ज्यादा जगहों पर अपनी छाप छोड़ने में लगा है। तालिबान अफगानिस्तान से हर वो चिन्ह, प्रतीक खत्म कर देना चाहता है, जो ये याद दिलाती है कि अमेरिका की याद दिलाती है। तालिबान ने अब काबुल के 'बुश बाजार' का नाम बदल दिया। अब ये बाजार 'मुजाहिद्दीन बाजार' के नाम से पहचाना जाएगा। ये जानकारी मोहम्मद जलाल नाम के ट्वीट यूजर द्वारा दी गई। मोहम्मद जलाल ने बताया कि काबुल शहर का 'बुश बाजार' जो अमेरिकी मिलिट्री आईट्म जैसे जैकेट, बूट और कुछ चीनी प्रोडक्ट्स के लिए जाना जाता था, उसका नाम बदलकर 'मुजाहिद्दीन बाजार' कर दिया गया है।

कतर के राजनयिक ने तालिबान के साथ वैश्विक समुदाय के सहयोग पर जोर दिया

विभिन्न देशों से अफगानिस्तान की नयी सरकार के साथ सहयोग करने का आह्वान करते हुए इस विषय पर कतर के वार्ताकार ने मंगलवार को चेतावनी दी कि उसे अलग-थलग करने का दूरगामी सुरक्षा खतरा पैदा हो सकता है जैसा कि अलकायदा ने 9/11 के हमले की साजिश रचने के लिए इस देश को अड्डे के तौर पर इस्तेमाल किया।

आतंकवाद निरोधक एवं संघर्ष समाधान पर मध्यस्थता पर कतर के विशेष दूत मुतलाक बिन माजिद अल-कहतानी ने कहा कि उन्होंने तालिबान के साथ समाज में महिलाओं की भूमिका, लड़कियों के लिए शिक्षा की सुलभता और समावेशी सरकार की अहमियत जैसे ज्वलंत मुद्दों पर तालिबान के साथ बातचीत की।

अफगानिस्तान पर कतर की नीतियों एवं अंतर्दृष्टि पर दुनिया की पैनी नजर है क्योंकि गैस समृद्ध इस छोटे से देश ने अमेरिका की वापसी के बाद युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में अपनी हैसियत से भी बड़ी भूमिका निभायी है। अल-कहतानी ने द साऊफान सेंटर द्वारा दोहा में आयोजित वैश्विक सुरक्षा मंच में एक भाषण में कहा, "हम तालिबान से क्या कह रहे हैं, जोकि एक कार्यवाहक सरकार या वास्तव में काबुल में प्राधिकारी है, (वह यह है कि) भेदभाव एवं बहिष्कार यह अच्छी नीति नहीं हैं।"

वर्तमान अफगान सरकार, जिसे तालिबान बस अंतरिम कहता है, में बस ऐसी तालिबान हस्तियां हैं जिनपर संयुक्त राष्ट्र ने पाबंदियां लगा रखी हैं। काबुल पर 15 अगस्त को तालिबान के काबिज हो जाने के बाद वहां से 100,000 से अधिक लोगों को अमेरिका द्वारा निकाले जाने में कतर की अहम भूमिका रही थी। उसने तालिबान एवं अमेरिका के बीच सीधी वार्ता की मेजबानी की है।

अल कहतानी ने बताया कि कतर क्यों तालिबान के साथ संवाद को बढ़ावा देता है जिसने सालों तक सैनिकों एवं आम नागरिकों पर आत्मघाती हमले किये एवं उनकी हत्याएं की। वैसे तालिबान अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिए बेताब है और वह अमेरिका के साथ शांति समझौते के लिए राजी हो गया है लेकिन वह सत्ता संभालने के बाद से सार्वजनिक रूप से फांसी लटकाने एवं अन्य नृशसंताएं करने लगा है।

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