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पाकिस्तान के निचले सदन में "CDF" के गठन को मंजूरी, 27वें संविधान संशोधन को लेकर हुआ भारी हंगामा

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Nov 12, 2025 10:46 pm IST,  Updated : Nov 12, 2025 10:46 pm IST

पाकिस्तान में तीनों सेनाओं की कमान एक हाथ में देने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) के गठन संबंधी 27वां संविधान संशोधन बुधवार को निचले सदन से पारित हो गया। इस दौरान विपक्ष ने भारी हंगामा किया।

शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री। - India TV Hindi
शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री। Image Source : AP

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की संसद के निचले सदन 'नेशनल असेंबली' ने बुधवार को हंगामे के बीच 27वें संविधान संशोधन विधेयक को दो तिहाई बहुमत से मंजूरी दे दी। इस विवादास्पद विधेयक में रक्षा बलों के प्रमुख का नया पद सृजित करने और एक संवैधानिक न्यायालय की स्थापना का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक मंगलवार को कानून मंत्री आजम नजीर तरार द्वारा नेशनल असेंबली में पेश किया गया था, जो पाकिस्तानी संसद के उच्च सदन 'सीनेट' द्वारा इसे मंजूरी दिए जाने के एक दिन बाद हुआ।

 

विपक्ष ने किया भारी हंगामा

विपक्ष के बहिष्कार के बीच नेशनल असेंबली ने विधेयक के सभी 59 उपबंधों को मंजूरी प्रदान की। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के सदस्यों ने विरोध में विधेयक की प्रतियां फाड़कर प्रधानमंत्री की कुर्सी की ओर फेंक दीं। सदन के अध्यक्ष अयाज सादिक ने घोषणा की कि विधेयक के पक्ष में 234 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में केवल चार वोट आए। सत्र में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) प्रमुख नवाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी उपस्थित रहे। दो दिनों तक चली बहस के बाद संशोधन को पारित कर दिया गया। हालांकि, पीटीआई के नेतृत्व वाले विपक्ष ने पूरी कार्यवाही का बहिष्कार किया।

 

मुनीर को तीनों सेनाओं की कमान सौंपने की तैयारी

कानून मंत्री तरार ने संवैधानिक सुधारों को एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसे व्यापक विचार-विमर्श के बाद अपनाया गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि मसौदे की गहन समीक्षा की गई और देशभर की बार काउंसिल तथा बार एसोसिएशन के साथ चर्चा हुई। अब विधेयक को प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मंजूरी आवश्यक है, जिसकी उम्मीद बुधवार को रात बाद में की जा रही है। प्रमुख प्रावधानरक्षा बलों का प्रमुख पद: विधेयक के अनुसार, थल सेनाध्यक्ष ही रक्षा बलों के प्रमुख का दायित्व निभाएंगे। वे प्रधानमंत्री के परामर्श से राष्ट्रीय सामरिक कमान के प्रमुख की नियुक्ति करेंगे, जो पाकिस्तानी सेना से ही होगा।

 

फील्ड मार्शल रहेगा आजीवन

नये संशोधन में उच्च पदोन्नति: सरकार सशस्त्र बलों के अधिकारियों को फील्ड मार्शल, एयर फोर्स मार्शल और फ्लीट एडमिरल जैसे पदों पर पदोन्नत कर सकेगी। फील्ड मार्शल का पद आजीवन होगा, अर्थात पदाधिकारी जीवन भर इस पद पर बने रहेंगे। वर्तमान में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर फील्ड मार्शल के पद पर आसीन हैं। संघीय संवैधानिक न्यायालय: संविधान से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए एक नया संघीय संवैधानिक न्यायालय स्थापित किया जाएगा। मौजूदा उच्चतम न्यायालय केवल पारंपरिक दीवानी और फौजदारी मामलों तक सीमित रहेगा।

 

विपक्ष ने नहीं किया बड़ा विरोध प्रदर्शन

विपक्ष का रुखविपक्षी गठबंधन तहरीक तहफ्फुज आईन-ए-पाकिस्तान (टीटीएपी) ने संशोधन के खिलाफ देशव्यापी विरोध आंदोलन की घोषणा की थी, लेकिन अब तक कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ है। विपक्षी नेता संसद में विरोध दर्ज करने और बयान जारी करने तक सीमित रहे हैं। यह संशोधन पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य संरचना में गहन बदलाव लाने वाला माना जा रहा है, जिससे सैन्य प्रभाव में वृद्धि हो सकती है। (भाषा)

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