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अमेरिका के पूर्व विदेशमंत्री हेनरी किसिंजर का 100 वर्ष की आयु में निधन, भारत पाक जंग में रही थी विवादास्पद भूमिका

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Nov 30, 2023 07:56 am IST,  Updated : Nov 30, 2023 08:06 am IST

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर का निधन हो गया है। वे 100 वर्ष के थे।

अमेरिका के पूर्व विदेशमंत्री हेनरी किसिंजर- India TV Hindi
अमेरिका के पूर्व विदेशमंत्री हेनरी किसिंजर Image Source : ANI

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर का बुधवार को 100 वर्ष की आयु में कनेक्टिकट में उनके घर पर निधन हो गया। किसिंजर एसोसिएट्स, इंक ने एक बयान में इस बारे में जानकारी दी है। किसिंजर, एक राजनेता और जाने-माने राजनयिक थे, जिन्होंने राष्ट्रपति रिचर्ड एम. निक्सन और जेराल्ड फोर्ड के प्रशासन के दौरान अमेरिकी विदेश नीति पर असरदार काम किया। वे अकेले ऐसे नेता थे जो विदेश मंत्री रहने का साथ साथ व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी रहे और दोनों ही पद एक साथ संभाला। इसी साल 27 मई को उन्होंने अपना 100वां जन्मदिन मनाया था।

यहूदी अप्रवासी थे, जर्मनी से भागकर आए थे अमेरिका

कहा जाता है कि उनका अमेरिकी विदेश नीति पर नियंत्रण किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति से अधिक था। जब 1938 में जब वह नाज़ी जर्मनी से भागकर एक यहूदी आप्रवासी के रूप में अमेरिका पहुंचे तो उन्हें बहुत कम अंग्रेजी बोलनी आती थी, लेकिन उन्होंने हार्वर्ड से स्नातक स्तर की पढ़ाई की। इतिहास में महारत हासिल की और एक लेखक के रूप में अपने कौशल का इस्तेमाल किया। राजनीति में में आने से पहले वह हावर्ड में पढ़ाते थे। उन्होंने ही वियतनाम युद्ध को खत्म करने और अमेरिकी सेना की वापसी में बड़ी भूमिका निभाई थी।

भारत पाक जंग में विवादास्पद रही थी भूमिका

1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी भूमिका काफी विवादास्पद रही थी। इसी युद्ध के कारण दुनिया के नक्शे पर एक स्वतंत्र देश बांग्लादेश का उदय हुआ था। 1971 के युद्ध के वक्त हेनरी किसिंजर अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। उन्ही के सुझाव पर ही तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भारत को डराने की कोशिश की थी। युद्ध की शुरुआत से पहले जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी रिचर्ड निक्सन से मिलने और हालात की जानकारी देने के लिए अमेरिका पहुंचीं तो उन्हें लंबा इंतजार करवाया गया। जब उनकी निक्सन से मुलाकात हुई तो उन्होंने काफी बेरूखी के साथ जवाब दिया। इसी के बाद इंदिरा गांधी ने निश्चय कर लिया था कि अब जो भी करना है, वो भारत खुद करेगा। 

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