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अमेरिकी वाायु सेना अड्डे के पास चीनी कंपनी के संयंत्र से मंडराया सुरक्षा लीक होने का खतरा, व्हाइट हाउस ने उठाया ये कदम

 Published : May 05, 2023 02:08 pm IST,  Updated : May 05, 2023 02:08 pm IST

अमेरिका की सुरक्षा के लिए चीन लगातार खतरा बनता जा रहा है। अमेरिकी खुफिया जानकारियां हासिल करने के लिए चीन कुछ भी करने को उतारू है। अब चीन ने फिर अमेरिका की सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा कर रहा है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : FILE

अमेरिका की सुरक्षा के लिए चीन लगातार खतरा बनता जा रहा है। अमेरिकी खुफिया जानकारियां हासिल करने के लिए चीन कुछ भी करने को उतारू है। अब चीन ने फिर अमेरिका की सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा कर रहा है। ऐसे में अमेरिका ने एक चीनी कंपनी द्वारा उत्तरी डकोटा में उसके वायु सेना अड्डे के करीब संयंत्र बनाने की कोशिशों को लेकर उपजे विवाद के बीच देश के आठ सैन्य ठिकानों के पास संपत्ति खरीदने के नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है।

इस बदलाव के तहत, विदेशी नागरिकों और कंपनियों को आठों सैन्य ठिकानों के 160 किलोमीटर के दायरे में कोई भी भूखंड खरीदने के लिए अमेरिकी प्रशासन की मंजूरी लेने की जरूरत पड़ेगी। कोषागार विभाग का निवेश सुरक्षा कार्यालय शुक्रवार को नियमों में बदलाव से संबंधित यह प्रस्ताव पेश करेगा। यह प्रस्ताव अमेरिकी कंपनियों और विदेशी निवेशकों के बीच व्यापारिक समझौतों की जांच करने वाली विदेशी निवेश संबंधी समिति को अतिरिक्त शक्तियां प्रदान करेगा, जिससे वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी संपत्ति की बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही पक्षों पर समझौते की शर्तों में बदलाव करने का दबाव बनाने में सक्षम हो जाएगी।

चीनी कंपनी 70 करोड़ डॉलर की लागत से लगा रही मक्का संयत्र

अमेरिका में चीनी कंपनी फूफेंग ग्रुप द्वारा ग्रांड फोक्स वायु सेना अड्डे से लगभग 19 किलोमीटर की दूरी पर 70 करोड़ डॉलर की लागत से मक्का प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की योजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस वायु सेना अड्डे से हवाई और अंतरिक्ष, दोनों ही अभियानों का संचालन किया जाता है। परियोजना के बढ़ते विरोध के बीच उत्तरी डकोटा के गवर्नर डग बर्गम और सीनेटर जॉन होवेन व केविन क्रेमर ने इससे होने वाले सुरक्षा खतरों को लेकर सवाल उठाए तथा संघीय सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। अमेरिकी वायु सेना द्वारा उक्त संयंत्र से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने की आशंका जताए जाने के बाद इसके निर्माण की योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गयी थी।

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