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ये हैं देश के दो ऐसे रेलवे स्टेशन जिनका नहीं है कोई नाम, अनोखी है इसके पीछे की कहानी

 Published : May 15, 2023 10:34 am IST,  Updated : May 16, 2023 12:19 pm IST

भारतीय रेल हर दिन लाखों लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती है। इसके लिए हर जिले में रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं, लेकिन देश में दो ऐसे रेलवे स्टेशन हैं जिनका कोई नाम ही नहीं है। आइए जानते हैं किस राज्य में हैं ये स्टेशन...

INDIAN railway- India TV Hindi
देश के दो ऐसे रेलवे स्टेशन जिनका नहीं है कोई नाम Image Source : INDIA TV

भारतीय रेल हमारे देश की धड़कन है। रेल नेटवर्क पूरे देश में कोने-कोने तक फैला हुआ है, शायद ही देश का कोई हिस्सा इससे अछूता हो। देश के रोजाना लाखों लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं। इसके लिए देश में जगह-जगह रेलवे स्टेशन बनाया गया है। उनसभी रेलवे स्टेशन के नाम भी होते हैं, पर देश में दो ऐसे भी रेलवे स्टेशन है जिसका ऑफिशियल नामकरण ही नहीं किया गया, वहां के साइन बोर्ड पर आज भी कोई नाम नहीं है। अगर आपको इसकी जानकारी नहीं है तो परेशान बिल्कुल न हो। हम आपको इन स्टेशन के बारे में पूरी जानकारी मुहैया कराएंगे, साथ ही ये भी बताएंगे कि इस स्टेशन का नामकरण क्यों नहीं हो सका।

ऑफिशियल ही नहीं किया गया नाम
Railway, BICI/Barkichanpi
Image Source : FILEझारखंड में है ये रेलवे स्टेशन

देश के हर राज्य, हर जिले में कई रेलवे स्टेशन होते हैं और इन सभी के ऑफिशियल नाम भी होते हैं। मगर इन सबसे हटकर दो रेलवे स्टेशन ऐसाे भी है जिनका कोई नाम ही ऑफिशियल नहीं है। हो सकता है कि आप इसे झूठ मान रहे हों, पर ये सच है। पहला रेलवे स्टेशन है झारखंड के लोहरदगा जिले में। इस रेलवे स्टेशन का आजतक कोई नाम नहीं है। बता दें जब आप रांची से टोरी के लिए रेल यात्रा करते हैं तो रास्ते में आपको ये बिना नाम वाला रेलवे स्टेशन दिखेगा। जानकारी के मुताबिक, रेलवे ने इसे 2011 में इस्तेमाल करना शुरू किया तो इसका नाम बड़कीचांपी रखा गया, लेकिन वहां के स्थानीय लोगों ने किसी बात को लेकर विरोध शुरू कर दिया, जिस कारण रेलवे ने इस नाम को ऑफिशियल ही नहीं किया और ये आज भी रेलवे स्टेशन बिना नाम के है।

रेलवे को हटाना पड़ा नाम
Rainagar
Image Source : FILEपश्चिम बंगाल में है ये दूसरा रेलवे स्टेशन

ऐसे ही दूसरा रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल में भी है, जिसका न कोई नाम नहीं है। ये रेलवे स्टेशन बंकुरा-मसग्राम रेलेव लाइन पर पड़ता है, ये रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल के वर्धमान से 35 किलोमीटर दूर है। बता दें कि पहले इस रेलवे स्टेशन का नाम रैनागढ़ था, लेकिन यहां भी स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया जिस कारण रेलवे को नाम हटाना पड़ा। ये स्टेशन आज भी बिना किसी नाम के चल रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि टिकट कैसे मिलता होगा तो बता दें कि आज भी रैनागढ़ के नाम से ही टिकट मिलता है।

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