स्टार बनने की चाहत में मुंबई में हर रोज हजारों लोग पहुंचते हैं। अपने टैलेंट से कई ने दर्शकों को आकर्षित भी किया। बॉलीवुड एक ऐसी इंडस्ट्री है, जिसमें जाति-धर्म और इलाके का भेदभाव सालों तक नहीं था। इस इंडस्ट्री ने हर उस कलाकार को खुले दिल से स्वीकार किया, जिसके अंदर कला थी। फिर चाहे वो इसी देश का रहा हो या विदेशी। आज आपको 1950 की उस एक्ट्रेस के बारे में बताते हैं जिनकी जिंदगी उन्हें ग्लैमर की दुनिया में ले आई और बाद में ये इंडस्ट्री की बड़ी सुपरस्टार बनीं। ये एक्ट्रेस हैं लतिका, जिन्होंन अपने अभिनय से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई।
लतिका की कहानी बेहद दिलचस्प है। लतिका के पिता ऑस्ट्रेलियाई मूल के थे, जबकि मां तिब्बती थीं। वह जन्म से बौद्ध थीं, मगर स्कूल में उनका धर्म परिवर्तन करा दिया गया। लतिका सिर्फ अपनी एक्टिंग के लिए ही नहीं अपने डांस के लिए भी चर्चित रहीं और एक फिल्म में राज कपूर के साथ भी काम किया। लतिका की फिल्मी दुनिया में एंट्री की कहानी भी बेहद फिल्मी है।
दार्जिलिंग में जन्मीं लतिका का असली नाम हूंगू लामू था। उनके माता-पिता की बौद्ध धर्म में आस्था थी। लतिका के पिता दार्जिलिंग के महाराजा के अस्तबल में घोड़ों के ट्रेनर थे। जब लतिका छोटी थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। ऐसे में उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली। मां की दूसरी शादी के बाद लतिका को अनाथ आश्रम भेज दिया गया। उन्होंने कलिमपोंग में अनाथ लड़कियों के स्कूल में पढ़ाई की। ये एक स्कॉटिश मिशनरी थी, ऐसे में वहां कोई बौद्ध बच्चा नहीं पढ़ सकता था। जिसके चलते लतिका का धर्म परिवर्तन करा दिया गया और वह ईसाई बन गईं।
लतिका के सौतेले पिता का ट्रांसफर बंबई हो गया, जिसके चलते वह भी बंबई पहुंच गईं। बंबई में लतिका जहां रहती थीं, वहां एक कथक डांसर रहती थीं, जो फिल्मों में काम करती थीं। उन्हें देख-देखकर लतिका को भी फिल्मी दुनिया में दिलचस्पी होने लगीं। ये डांसर एक बार उन्हें मिनर्वा स्टूडियो ले गई, जहां सोहराब मोदी ने लतिका को पहली बार देखा और उन्हें 'परख' (1944) में काम करने का मौका दिया। वहीं उन्होंने गोपीनाथ में राज कपूर और जुगनू में दिलीप कुमार जैसे कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला।
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