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मलयालम इंडस्ट्री में एक्ट्रेस को दिए जाते हैं कोड नेम, फिर की जाती है गंदी हरकत, हेमा समिति की रिपोर्ट ने काले सच से उठाया पर्दा

 Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
 Published : Aug 20, 2024 04:36 pm IST,  Updated : Aug 20, 2024 05:10 pm IST

जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट में मलयालम फिल्म इंडस्ट्री पर कई सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट के सामने आते ही फिल्म उद्योग में खलबली मच गई है।

Hema Committee report - India TV Hindi
जस्टिस हेमा। Image Source : X

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सोमवार को जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट सामने आई। इस रिपोर्ट में मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिलाओं को यौन संबंधों की मांग के साथ काम दिया जाता है। कई महिलाओं ने आरोप लगाया है कि काम शुरू करने से पहले ही उन्हें समझौता करने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिला कलाकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 

साल 2019 में हुआ हेमा कमिटी का गठन

PTI के अनुसार सामने आई रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार ने 2019 में जस्टिस हेमा कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के सामने आने वाले मुद्दों का अध्ययन किया। इस रिपोर्ट में महिलाओं के यौन उत्पीड़न, शोषण और दुर्व्यवहार की अहम जानकारियां उजागर की गई हैं। सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने के पांच साल बाद रिपोर्ट की एक कॉपी आरटीआई एक्ट के तहत मीडिया को दी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला कलाकारों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इसमें फिल्म इंडस्ट्री में शराब के नशे में धुत पुरुषों द्वारा महिला कलाकारों के कमरे का दरवाजा खटखटाने की घटनाएं भी शामिल हैं।

महिला कलाकारों को दिए जाते हैं कोड नेम

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यौन उत्पीड़न की शिकार कई महिलाएं डर के कारण पुलिस में शिकायत करने से हिचकिचाती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जो महिला कलाकार समझौता करने के लिए तैयार होती हैं, उन्हें कोड नाम दिए जाते हैं और जो समझौता करने के लिए तैयार नहीं होती हैं, उन्हें काम नहीं दिया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'सिनेमा में अभिनय या किसी अन्य काम के प्रस्ताव महिलाओं को यौन संबंधों की मांग के साथ दिए जाते हैं। जैसा कि मैंने पहले ही बताया है कि महिलाओं से समझौता करने के लिए कहा जाता है, जिसके तहत उनसे यौन संबंध बनाने के लिए कहा जाता है।' 

नहीं होते लिखित कॉन्ट्रैक्ट

मलयालम फिल्म उद्योग में लिखित कॉन्ट्रैक्ट की कमी भी एक बड़ी समस्या है। लिखित कॉन्ट्रैक्ट की कमी का उपयोग कुछ लोग कलाकारों और पेशेवरों को मौखिक रूप से वादा किए गए पेमेंट न देने के लिए करते हैं। एक उदाहरण एक अभिनेत्री का है, जो एक फिल्म में मुख्य पात्र है, जिसे एक अंतरंग दृश्य करने के लिए मजबूर किया गया था। जब उससे और अधिक इंटीमेट सीन देने के लिए कहा गया तो वह काम किए गए दिनों के लिए अपना भुगतान लिए बिना सेट से भाग गई। हालांकि, निर्देशक ने कहा कि जब तक वह व्यक्तिगत रूप से कोच्चि नहीं आती, वह पहले से फिल्माए गए अंतरंग हिस्सों को नहीं हटाएगा। 

कानून बनाने की मांग

हेमा समिति का तर्क है कि एक आंतरिक शिकायत समिति अप्रभावी हो सकती है क्योंकि शक्तिशाली व्यक्ति आईसीसी सदस्यों को शिकायत को अपने मनचाहे तरीके से निपटाने के लिए धमका सकते हैं या मजबूर कर सकते हैं। यह आईसीसी को दी गई जानकारी की गोपनीयता के बारे में भी चिंता जताता है, अगर यह उद्योग के अंदरूनी लोगों से बना है, जिससे शिकायतकर्ताओं की परेशानी और बढ़ जाती है। समिति ने सलाह दी है कि सरकार एक उचित कानून बनाए और सिनेमा में महिलाओं के सामने आने वाली सभी चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक न्यायाधिकरण की स्थापना करे।

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