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भारत-पाकिस्तान के बीच 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा पर इस बार दिवाली का त्योहार सतर्कता और उत्सव के अनूठे संगम के साथ मनाया गया। खुफिया जानकारी के आधार पर सीमा पर हाई अलर्ट है, क्योंकि आतंकी ड्रोन हमले और घुसपैठ की साजिश रच रहे हैं। फिर भी, BSF और भारतीय सेना के जवान पूरे जोश के साथ देश की रक्षा करते हुए दिवाली की खुशियां मना रहे हैं। इंडिया टीवी की यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट आपको ले चलती है सरहद की उस दुनिया में, जहां जवान मुश्किल हालात में भी त्योहार का जश्न मना रहे हैं।
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जम्मू-कश्मीर में 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा पर इस समय हाई अलर्ट है। खुफिया विभाग को सूचना मिली है कि सीमा पार से आतंकी ड्रोन के जरिए सुरक्षा बलों के कैंपों को निशाना बना सकते हैं। साथ ही, आतंकी लॉन्च पैड्स से घुसपैठ की कोशिशें तेज हो रही हैं। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 110-130 पाकिस्तानी आतंकी सीमा पार करने की फिराक में हैं। खासकर, पहाड़ी दर्रे बर्फ से ढकने से पहले आतंकी संगठन घुसपैठ की साजिश रच रहे हैं।
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सीमा पर तैनात जवान किसी भी आतंकी हमले से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बीएसएफ की गश्ती टीमें और निगरानी उपकरणों पर तैनात सैनिक हर पल सतर्क हैं। इंडिया टीवी से बात करते हुए एक जवान ने कहा, 'हमें मुख्यालय से सूचना मिली है और हम हाई अलर्ट पर हैं। चाहे बर्फबारी हो, बारिश हो या चिलचिलाती धूप, बीएसएफ सतर्क है। हमें इन परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी सुविधाएं प्रदान की गई हैं। हमारे पास एंटी-ड्रोन सिस्टम हैं, इसलिए चाहे वे किसी भी तरह का हमला करें, हमारे पास जवाबी कार्रवाई की क्षमता है। हम अपने देशवासियों को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और हमारा नारा है, 'जब देश सुरक्षित है, वही हमारी दिवाली है।' क्योंकि हमारे लिए सबसे ऊपर देश है, हम देश के लिए कुछ भी कर सकते हैं, हम 24 घंटे सतर्क रहते हैं।'
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खुफिया जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन बर्फबारी शुरू होने से पहले घुसपैठ की कोशिश में जुटे हैं। कई आतंकी लॉन्च पैड्स सक्रिय किए गए हैं, जहां से आतंकी भारत में दाखिल होने की फिराक में हैं। इसके जवाब में सुरक्षा बलों ने घुसपैठ-प्रवण क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है। संवेदनशील रास्तों पर घात लगाकर निगरानी की जा रही है, ताकि जंगल या खराब मौसम का फायदा उठाकर घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों को रोका और खत्म किया जा सके।
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BSF और सेना ने अपनी रणनीति को और मजबूत किया है। घने जंगलों और मुश्किल भूभाग में घात लगाकर गश्त बढ़ाई गई है। ये रणनीतिक घात आतंकियों को रोकने और उनकी साजिश को नाकाम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एंटी-ड्रोन सिस्टम और आधुनिक तकनीक के साथ जवान हर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
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उच्च अलर्ट के बावजूद, जवानों ने गुलमर्ग और कुपवाड़ा जैसे एलओसी से सटे इलाकों में दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया। सैनिकों ने पूजा-अर्चना की, आरती गाई और मिठाइयों का आदान-प्रदान किया। विभिन्न धर्मों, जातियों और जनजातियों के सैनिक एक परिवार की तरह एकजुट होकर त्योहार मनाते नजर आए। मोमबत्तियां और दीये जलाकर उत्सव का माहौल बनाया गया। जवानों ने देशभक्ति और बॉलीवुड गीतों पर नृत्य और गायन के साथ अपनी अटूट भावना का प्रदर्शन किया।
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गश्त पर तैनात और निगरानी उपकरणों पर नजर रखने वाले सैनिकों ने भी दिवाली के जश्न में हिस्सा लिया। बीएसएफ के जवानों ने मिठाइयां बांटीं, दीये जलाए। कठिन परिस्थितियों में भी ये जवान अपने परिवारों से दूर रहकर देश की रक्षा कर रहे हैं।